Rukmini Vasanth
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Summary: कांतारा चैप्टर 1’ से छाईं रुक्मिणी वसंत: सादगी में छुपी सितारों की चमक

रुक्मिणी वसंत दक्षिण भारतीय सिनेमा की नई सनसनी बन चुकी हैं, जिन्होंने ‘कांतारा चैप्टर 1’ में अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया। वीरता, कला और गहराई से भरी उनकी ज़िंदगी आज उन्हें नई ऊंचाइयों तक ले जा रही है।

Rukmini Vasanth: दक्षिण भारतीय सिनेमा की नई पहचान बन चुकी रुक्मिणी वसंत आज अपनी अदाकारी, सादगी और गहराई भरे किरदारों के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में रिलीज़ हुई ‘कांतारा चैप्टर 1’ में उनके शानदार अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि रुक्मिणी की ज़िंदगी सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि साहस, डिसिप्लिन और त्याग से भी भरी हुई है।

ऋषभ शेट्टी की फिल्म ‘कांतारा चैप्टर 1’ ने बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन ही धमाल मचा दिया। फिल्म ने ओपनिंग डे पर करीब 60 करोड़ रुपये की कमाई की और दर्शकों ने रुक्मिणी की परफॉर्मेंस को खूब सराहा। फिल्म में वह एक योद्धा राजकुमारी के किरदार में नजर आईं, जिसमें उनकी मजबूती और नज़ाकत दोनों झलकती हैं। उनकी अदाकारी और डांस मूव्स ने हर किसी का दिल जीत लिया।

रुक्मिणी वसंत सिर्फ फिल्मों की दुनिया से नहीं आतीं, बल्कि उनका परिवार वीरता और कला दोनों का प्रतीक है। उनके पिता कर्नल वसंत वेणुगोपाल भारतीय सेना के पहले कर्नाटक सैनिक थे जिन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। यह भारत का सर्वोच्च शांति-कालीन वीरता पुरस्कार है। 2007 में जम्मू-कश्मीर के उरी में आतंकियों से लड़ते हुए उन्होंने शहादत दी थी।

रुक्मिणी की मां सुभाषिनी वसंत एक प्रसिद्ध भरतनाट्यम डांसर हैं और उन्होंने शहीद सैनिकों की विधवाओं की मदद के लिए एक एनजीओ भी शुरू किया। रुक्मिणी कहती हैं कि अपने माता-पिता से उन्होंने अनुशासन, संवेदना और आत्मबल सीखा है।

रुक्मिणी ने अपनी एक्टिंग की पढ़ाई दुनिया की मशहूर संस्था Royal Academy of Dramatic Arts (RADA), London से की है। वहां उन्होंने थिएटर, डांस और कैमरा एक्टिंग पर गहराई से काम किया। थिएटर के अनुभव ने उनकी परफॉर्मेंस में एक खास गहराई दी है। वह अपने किरदारों में इतनी बारीकी से उतर जाती हैं कि दर्शक उनके चेहरे से ही भावनाएं पढ़ लेते हैं।

रुक्मिणी ने 2019 में कन्नड़ फिल्म ‘बीरबल ट्रिलॉजी केस 1: फाइंडिंग वज्रमुनी’ से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ‘बघीरा’ और ‘मद्रासी’ जैसी फिल्मों में भी काम किया। लेकिन उन्हें असली पहचान मिली हेमंत राव की फिल्म ‘सप्त सागरदाचे एलो’ से। इस रोमांटिक ड्रामा में उनके ‘प्रिय’ के किरदार ने सबका दिल जीत लिया। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड भी मिला।

woman posing with hand on chin
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रुक्मिणी अब सिर्फ कन्नड़ सिनेमा तक सीमित नहीं हैं। वह जल्द ही यश की फिल्म ‘Toxic’ और जूनियर एनटीआर की फिल्म ‘Dragon’ में नजर आने वाली हैं। ‘Dragon’ का निर्देशन ‘KGF’ और ‘Salaar’ फेम प्रशांत नील कर रहे हैं। रुक्मिणी के लिए यह फिल्में उनके करियर का अगला बड़ा कदम मानी जा रही हैं। क्योंकि वह कन्नड़, तमिल, हिंदी और अंग्रेजी चारों भाषाओं में सहजता से अभिनय कर सकती हैं।

रुक्मिणी न सिर्फ एक्ट्रेस हैं बल्कि कवि, स्केच आर्टिस्ट और रीडर भी हैं। वह अक्सर अपने खाली समय में कविताएं लिखती हैं और किताबें पढ़ती हैं। उनका कहना है, “किताबें मुझे खुद को समझने और अपने किरदारों में सच्चाई लाने की ताकत देती हैं।”

रुक्मिणी उन गिनी-चुनी अभिनेत्रियों में हैं जो ग्लैमर से ज्यादा अभिनय पर ध्यान देती हैं। वह हमेशा कहती हैं कि फेम नहीं, इमोशन मायने रखता है। उनकी सादगी और शांत स्वभाव फैंस को बेहद पसंद आता है। सोशल मीडिया पर उनकी मुस्कान वाली तस्वीरें हजारों लोगों के दिलों को छू जाती हैं।

मैं एक बहुमुखी मीडिया पेशेवर हूं, जिसे कंटेंट लेखन में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। मेरा लक्ष्य ऐसी सामग्री पर ध्यान केंद्रित करना है जो सूचित, शिक्षित और प्रेरित करती है। चाहे लेख, ब्लॉग या मल्टीमीडिया सामग्री बनाना हो, मेरा लक्ष्य...