Selfie Movie Review: अक्षय कुमार और इमरान हाशमी की बहुप्रतीक्षित फिल्म सेल्फी आज रिलीज हो गई है। फिल्म ’सेल्फी’ एक फैन और उसके फेवरेट कलाकार के बीच की कहानी है। फिल्म और फिल्मी सितारे उनके फैंस की वजह से ऐसे मुकाम पर पहुंचते हैं जहां वे आम आदमी के लिए कई बार रोल मॉडल की तरह बन जाते हैं। फैंस पसंदीदा कलाकार के इस हद तक दीवाने होते हैं कि उनकी हर बात फॉलो करते हैं। ‘सेल्फी’ पृथ्वीराज सुकुमारन की मलयालम कॉमेडी ड्रामा ‘ड्राइविंग लाइसेंस’ का रीमेक है। इस फिल्म का निर्देशन गुड़ न्यूज और जुग जुग जियों फेम राज मेहता ने किया है। आइए जानते हैं कि साउथ की एक और रीमेक दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है या अक्षय की एक के बाद एक फ्लॉप फिल्मों की लिस्ट में इसका भी नाम जुड़ जाएगा।
Selfie Movie Review: क्या है फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी एक सुपर स्टार और उसके फैन पर आधारित है। फिल्म में ओम प्रकाश (इमरान हाशमी) और उसका बेटा सुपरस्टार विजय(अक्षयकुमार) के फैन हैं। हर दीवाने फैन की तरह इन दानों का भी सपना एक बार अपन फैवरेट स्टार विजय से मिलना और उनके साथ एक सेल्फी लेना है। उन्हें किस्मत से एक बार यह मौका मिलता भी है। सुपरस्टार विजय शूटिंग के सिलसिले में भोपाल आता है। यहां उन्हें नए ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत पडती है। ओम प्रकाश जो कि आरटीओ यानी रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर है, उसे पता चलता है कि उसके आइडल के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है। उसे लगता है कि वो विजय का लाइसेंस बनवाकर सेल्फी पा सकता है। लेकिन इसकी पहली मुलाकात में इनके बीच बहस हो जाती है जिसे मीडिया के जरिए पूरा देश जान जाता है। उनके बीच एक गलतफ़हमी से शुरू हुई तकरार ईगो की लड़ाई बन जाती है। यहीं से शुरू होती है एक फैन की कहानी जो दीवानों की तरह जिस तरह फैन का दीवाना होता है उसी जूनूनियत से उस सुपरस्टार को एक आम आदमी की ताकत का परिचय देने के लिए जी जान से जुट जाता है।
कैसा रहा अभिनय
अक्षय कुमार काफी समय बाद कॉमेडी करते नजर आए हैं। उनकी कॉमेडी के अनोखे अंदाज को फैंस पसंद करते हैं। ‘सेल्फी’ में अक्षय कुमार एक सुपरस्टार के किरदार में सहज ही दिखे हैं। कई बार ऐसा लगेगा की वो खुद को ही किरदार के रूप में निभा रहे हैं। जैसे वे जब अपने काम को गिना रहे थे तो लगता है जैसे असल जिंदगी की बात कर रहे हैं। अक्षय ने सामान्य अभिनय किया है। इस किरदार के लिए उन्हें ज्यादा एफर्ट नहीं डालना पडा है। वहीं बात करें इमरान हाशमी की तो उन्होंने अपने अभिनय से किरदार को और भी स्ट्रांग बनाकर पर्दे पर पेश किया है। उनके हिस्से ज्यादा इमोशलन सीन आऐ हैं और जिन्हें इमराने ने बखूबी निभाया है। बात करें फीमेल कलाकारों की तो डायना पेंटी और नुसरत भरूचा ने भी अपने किरदारों को बखूबी निभाया है। सपोर्टिंग कलाकार के रूप में महेश ठाकुर भी अच्छे साबित हुए हैं।
निर्देशन संगीत व तकनीकी टीम
गुड न्यूज और जुग जुग जीयो बनाने वाले राज मेहता की यह तीसरी फिल्म है। रान की इन तीनों फिल्मों की खास बात है कि इनमें इमोशन और कॉमेडी का मिश्रण हैं। यही कारण है सेल्फी एक रीमेक हुए भी ओरिजनल से अलग दिखती है। फिल्म का प्लॉट शानदार है हालांकि किरदारों को थोडा और अच्छे से पेश किया जा सकतस था। बात करें डायलाग के तो काफी एंटरटेनिंग और तंज से भरपूर हैं। ऋषभ शर्मा ने हल्के फुल्के व्यंग्य के साथ डायलॉग्स को चाशनी में लपेटा है। जैसे प्रोड्यूसर के आने पर ‘अपनी किडनी छुपा ले प्रोड्यूसर साहब आ रहे हैं।’ मीडिया पर व्यंग्य कसते हुए एक सीन में दिखाया गया है कि एक आदमी को होटल के बाहर घेरकर सवाल करते हैं, जवाब में वो कहता है ‘मैं माली हूं।’ फिर सवाल आता है आप मालिक हैं तो जवाब दीजिए। वो चिल्लाकर कहता है मैं मालिक नहीं माली हूं। क्लाईमैक्स में एक सुपरस्टार और एक फैन के बीच की बातचीत को भावनात्मकता से जोडने का प्रयास किया गया है।
क्यों देखें
सेल्फी’ ड्रामा से भरपूर हल्की कॉमेडी वाली फिल्म है। फिल्म में कई जगह आपके जेहन में कूछ सवाल आ सकते हैं जैसे ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया पर। लेकिन ऐसी गलतियों को नजरअंदाज किया जा सकता है। दरअसल बहुत दिनों बॉलीवुड फिल्म हल्की कॉमेडी और कई वर्गों पर व्यंग्य के साथ आई है जिसं एन्जॉय किया जा सकता है। फिल्म कुछ कम खींची जा सकती थी। फिर भी कुल मिलकर यह मनोरंजन करने वाली फिल्म है। इसमें ड्रामा है, एंटरटेनमेंट है, कई मौकों पर तर्क को धूल चटा देती है। पर एक बार देखने और कॉमेडी एंजॉय करने में करने में कोई खराबी तो नहीं है। आप भी देखकर तय करिए क्या फिल्म एक बार तो देखने लायक है या नहीं।
