Overview: रामायण की शूटिंग के दौरान हुए थे ये चमत्कार
रामानंद सागर की 'रामायण' (1988) एक ऐतिहासिक धारावाहिक था। इसकी शूटिंग के दौरान कई चमत्कारी घटनाएं हुईं। आइये जानते हैं इन घटनाओं के बारे में विस्तार से
Ramayan Serial Miracles: 1988 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुए रामानंद सागर के धारावाहिक रामायण ने भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक नई मिसाल कायम की थी। 25 जनवरी से 31 जुलाई तक चले इस सीरियल ने पूरे देश को एक सूत्र में बांध दिया था। इस शो को जिस तरह का प्रेम और सम्मान मिला, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था।
विशेष रूप से कोरोना महामारी के दौरान जब इस धारावाहिक का पुनः प्रसारण हुआ, तो यह फिर से लोकप्रियता की ऊंचाइयों पर पहुंच गया। आज हम आपको बताते हैं इस ऐतिहासिक शो की शूटिंग के दौरान घटित कुछ ऐसे वाकये जो लोगों के लिए किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं थे।
इन कलाकारों को भगवान समझते थे लोग
धारावाहिक में भगवान राम का किरदार निभा रहे अरुण गोविल और माता सीता की भूमिका में दीपिका चिखलिया दर्शकों के दिलों पर इस कदर छा गए थे कि लोग उन्हें वास्तविक भगवान मानने लगे थे। ग्रामीण इलाकों में जब शूटिंग होती थी, तो वहां के लोग इन कलाकारों को देख कर जमीन पर झुक जाते थे।
दीपिका ने एक इंटरव्यू में बताया था कि एक बार जब वे एक गांव में शूटिंग कर रही थीं, तो एक महिला उनके पास आई और उनके पैर छूकर आशीर्वाद मांगा।
युद्ध के सीन के दौरान बदल गया था मौसम
राम और रावण के बीच होने वाले युद्ध का दृश्य न केवल अभिनय की दृष्टि से अद्भुत था, बल्कि इसकी शूटिंग के दौरान प्रकृति ने भी मानो अपना योगदान दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब युद्ध के क्लाइमैक्स सीन की शूटिंग हो रही थी, तब आसमान बिल्कुल साफ था। लेकिन जैसे ही राम और रावण आमने-सामने हुए, अचानक तेज़ आंधी और बिजली की गर्जना शुरू हो गई। ऐसा लग रहा था जैसे स्वर्ग के देवता भी इस दिव्य युद्ध के साक्षी बनने आए हों।
इस सीन ने सेट को बना दिया मंदिर
शूटिंग के दौरान एक ऐसा दृश्य भी आया जब राम और सीता द्वारा पूजन किया जा रहा था। इस सीन के दौरान सेट पर उपस्थित हर व्यक्ति की इतना भावुक हो गया हैं, और भक्ति की गहराई से जुड़ गया कि कैमरा बंद होने के बाद भी लोग मंत्रों का उच्चारण करते रहे। पूरे माहौल में ऐसी भक्ति की ऊर्जा भर गई थी कि ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सेट पूरी तरह से मंदिर बन गया हैं। यह अनुभव सभी कलाकारों के लिए अविस्मरणीय बन गया।
हनुमान के रूप में दारा सिंह पर बालाजी की कृपा
रामायण में हनुमान जी की भूमिका निभाने वाले दारा सिंह अपने समय के बेहद शक्तिशाली पहलवान रहे थे। लेकिन रामायण के दौरान उनमें जो ऊर्जा और समर्पण देखने को मिला, वह साधारण नहीं था। शो के “मेकिंग ऑफ” वीडियो में दिखाया गया है कि कई बार दारा सिंह ने ऐसे कठिन सीन किए जिन्हें आमतौर पर रीटेक की जरूरत होती है, लेकिन उन्होंने उन्हें एक ही टेक में पूरा कर लिया।
एक दृश्य में उन्हें एक भारी चट्टान उठानी थी, जो उन्होंने बिना किसी सहायता के सीन को इतनी सहजता से कर दिखाया कि पूरे सेट पर मौजूद लोग आश्चर्यचकित रह गए। इसे देखकर हर कोई यही मानने लगा कि उन पर हनुमान जी की विशेष कृपा है।
जब कौए की तलाश बन गई थी मुश्किल
रामायण के उत्तरकांड में एक विशेष दृश्य था, जिसमें बाल रूप में भगवान श्रीराम को काक भुशुण्डि के साथ खेलते हुए दिखाया जाना था। यह सीन भावनात्मक और सांकेतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था। लेकिन इस दृश्य को वास्तविकता देने के लिए टीम को एक असली कौए की जरूरत थी।
पूरी टीम ने आसपास के इलाकों में, पक्षी पालकों के पास, और जानवरों से संबंधित केंद्रों में जाकर कौए की तलाश की, लेकिन उन्हें कहीं भी सफलता नहीं मिली। जैसे-जैसे समय बीत रहा था, टीम की चिंता बढ़ती जा रही थी।
रामानंद सागर को सेट पर मौजूद एक पेड़ की शाखा पर उन्हें एक कौआ बैठा दिखाई दिया। उस क्षण उन्होंने हाथ जोड़कर प्रार्थना की, “हे काक भुशुण्डि महाराज, हमारी सहायता करें।” जैसे ही रामानंद सागर ने प्रार्थना की, वह कौआ उड़कर सीधे उस बच्चे के पास आ गया जो बाल श्रीराम का किरदार निभा रहा था।
वह कौआ न केवल पास आया, बल्कि बिना किसी डर या संकोच के उसके साथ खेलने लगा। यह दृश्य इतना स्वाभाविक और भावुक था कि कैमरा रोल करता रहा और बिना किसी ट्रेनिंग, बिना किसी कट या रीटेक के पूरे 10 मिनट तक यह रियल सीन शूट हुआ।
