Rajeev Khandelwal's HOME
Rajeev Khandelwal's HOME

Summary : राजीव को घर देखकर भूल जाएंगे कि मुंबई में हैं...

राजीव खंडेलवाल अपने घर को हम्बल अबोड कहते हैं, यह तीन मंजिला है और हर फ्लोर की अपनी कहानी है।

Rajeev Khandelwal Home: मुंबई की चहल-पहल से भरी दुनिया के एक कोने में बसा एक्टर राजीव खंडेलवाल का ट्रिप्लेक्स घर अगर आप देखेंगे तो सुकूनभरा अहसास होगा। यहां आप सुबह-सुबह चिड़ियों की चहचहाहट सुन सकते हैं। बड़े-बड़े कमरे, टैरेस गार्डन और स्पीकीजी-स्टाइल लाउंज वाला यह घर शहर की भीड़-भाड़ और तंग जगह वाली छवि को पूरी तरह तोड़ देता है। इसे देखकर आप समझ जाएंगे कि क्यों राजीव गर्व से इसे अपना “हम्बल अबोड” यानी “विनम्र आशियाना” कहते हैं।

‘ब्रूट’ के एक होम टुअर वीडियो में राजीव साफ कहते हैं, “मैं अपनी इस छोटी-सी जगह को लेकर बहुत पॉजेसिव हूं”। जैसे ही आप उनके घर में दाखिल होते हैं, सबसे पहले जो चीज ध्यान खींचती है, वह है खुला-खुला स्पेस। राजीव बताते हैं, “मुंबई में अक्सर घर बहुत भरे-भरे होते हैं। यहां हमें अपने लिए बहुत जगह मिली है।” छोटे शहर से आने के कारण उन्हें हमेशा खुली जगह की चाहत रही, और उनका घर उसी ख्वाहिश की झलक है। जो सपना कभी समझौते से परे था, अब हकीकत बन चुका है। राजीव कहते हैं, “जब हमें यह प्रॉपर्टी मिली तो हमने कहा कि चलो, जगह पर कोई समझौता नहीं करेंगे। इसे बड़ा ही रखते हैं।” और सचमुच यह बड़ा है, तीनों फ्लोर की अपनी-अपनी पहचान, जरूरत और यादें हैं।

Rajeev Khandelwal Home garden
garden

पहली मंजिल पर मौजूद है एक स्टाइलिश, ओपन किचन, जिसमें एक शानदार आइलैंड सिंक भी है। यहीं राजीव अपनी डाइट का राज खोलते हैं। उनका ब्रेकफास्ट आम तौर पर सॉरडो ब्रेड, ऑलिव्स और अंडों से बना होता है। राजीव हंसकर कहते हैं, “ये फैंसी नहीं है, बल्कि बेसिक है।” वहीं उनका लंच ज्यादातर इंडियन होता है और इसमें अक्सर टैरेस किचन गार्डन से तोड़ी गई ताजी सब्जियां शामिल होती हैं। वे कहते हैं, “कभी अंकुरित दाल, कभी हमारी टैरेस गार्डन की सब्जियां… बस यही खाते हैं”।हालांकि उन्होंने अपने शुरुआती दिन पीछे छोड़ दिए हैं, जब वे समोसा और बॉम्बे सैंडविच खाकर गुजारा करते थे लेकिन वे मानते हैं कि कभी ये चीजें उनकी जिंदगी का हिस्सा हुआ करती थीं।

Rajiv khandelwal home
Rajiv khandelwal home
YouTube video

दूसरे फ्लोर पर आता है राजीव का सबसे खास हिस्सा…बेडरूम। यह कमरा शांति से भरा है, प्राकृतिक रोशनी से जगमगाता है और हरियाली से घिरा हुआ है, मुंबई में यह किसी खजाने से कम नहीं। राजीव मुस्कराकर कहते हैं, “जब आप सुबह उठते हैं और बाहर चिड़ियों की आवाज सुनते हैं… तो ऐसा लगता है कि आप बॉम्बे में नहीं हैं। यही चीज मैं हमेशा चाहता था।” इस कमरे की एक दीवार किताबों से सजी हुई है। पहले यह दीवार उन्हें बैचलर दिनों में गंभीर दिखाने का बहाना भर थी, लेकिन अब यह उनकी असली साहित्यिक रुचि को दर्शाती है। हालांकि वे मजाक में जोड़ते हैं, “चलो, उस दीवार के बारे में बात ही मत करो, वो थोड़ी-सी नर्सिसिज्म है।” दरअसल, उस दीवार पर उनकी “वैनिटी वॉल” भी है, जिस पर उनकी फ्रेम की हुई तस्वीरें और मेडल टंगे हैं।

इनमें से दो मेडल उन्हें बेहद गर्व देते हैं। एक तो है बॉम्बे हाफ मैराथन का, जिसे उन्होंने एसीएल सर्जरी के बाद दो घंटे से कम समय (1 घंटा 52 मिनट) में पूरा किया। राजीव कहते हैं, “मैं खुद को साबित करना चाहता था कि मैं ठीक हूं। सिर्फ दौड़ पूरी करना नहीं, बल्कि अच्छे से पूरी करना चाहता था।” उसी साल उन्होंने लद्दाख मैराथन में भी कोशिश की और दो घंटे से थोड़ा अधिक समय में फिनिश किया, जो अब भी काबिल-ए-तारीफ़ उपलब्धि है।

Home Tour
Home Tour

ग्राउंड फ्लोर पर उतरते ही जैसे आप किसी और ही दुनिया में पहुंच जाते हैं। यहां एक पूरा लाउंज है, जिसमें बार भी है। राजीव मुस्कुराकर कहते हैं, “ये पार्टी एरिया है”। एक कोने में शान से रखा है एक ग्रैंड पियानो। राजीव बताते हैं, “पियानो रखना हमेशा से मेरा सपना था। लेकिन बॉम्बे में अगर आपके पास पियानो हो उसके लिए जगह होनी चाहिए वरना तो उस पर ही सोना पड़ेगा।”

piano
piano

संगीत हमेशा से उनकी जिंदगी का हिस्सा रहा है और यह पियानो उनके पूरे हुए सपनों का प्रतीक है, चाहे वह कला से जुड़ा सपना हो या स्पेस से जुड़ा।

ढाई दशक से पत्रकारिता में हैं। दैनिक भास्कर, नई दुनिया और जागरण में कई वर्षों तक काम किया। हर हफ्ते 'पहले दिन पहले शो' का अगर कोई रिकॉर्ड होता तो शायद इनके नाम होता। 2001 से अभी तक यह क्रम जारी है और विभिन्न प्लेटफॉर्म के लिए फिल्म समीक्षा...