Family Series
OTT Family Series

OTT Family Series: भले ही आज टीवी पर मनोरंजन के लिए विकल्‍पों की कमी नहीं है लेकिन जब बात आती है फैमिली के साथ कुछ देखने की तो कम ही विकल्‍प बचते हैं। रेगुलर चैलन्‍स पर कहीं सास बहू और साजिश ही दिखेगी तो कहीं परिवार में एक दूसरे के प्रति नफरत और साजिश। बात करें वेब सीरीज की तो उस पर कंटेंट की वैराईटी में कमी नहीं है। मगर भाषा, सेक्‍सुअल कंटेंट और वायलेंस के चलते फैमिली के साथ देखने लायक कंटेट इस पर भी कम ही हैं।

हालॉंकि कुछ सीरीज ऐसी हैं जो न सिर्फ फैमिली के साथ देखी जा सकती हैं बल्‍कि आपको कुछ बचपन की तो कुछ अपने आस-पडोस के किस्‍सों के साथ गुदगुदाती हैं। कुछ पढाई के दिनों के स्‍ट्रेस को तरोताजा कर सकती हैं तो कुछ नौकरी में हो रही उथल- पुथल को आपसे जोड देती हैं। आइए आपको ऐसी ही कुछ वेब सीरीज के बारे में बताते हैं जिनका लुत्‍फ आप पूरी फैमिली के साथ ले सकते हैं।

गुल्‍लक

गुल्‍लक के अबतक 3 सीजन आ चुके हैं। एक परिवार की कहानी पर आधारित ये सीरीज आपको अपनी या अपने आस पास से जुडी यादों की गलियों तक ले जाती है। मिडल क्‍लास की हर दूसरी फैमिली की सी लगने वाली ये सीरीज हंसाती गुदगुदाती आपको ऐसे छोटे छोटे जिंदगी के लम्‍हों से जोडती है जो अपने से लगते हैं। फिर चाहे वो कोई ऐसा पड़ोसी जो कभी भी घर में आ जाता है या फिर शादी के कार्ड पर सपरिवार न लिखा होना। कम बजट में घर के लिए कई सपने देखना और उनका टूटना। किसी बच्‍चे का डिग्री लेने के बाद भी जॉब न लगना और जिससे उम्‍मीद न हो उसके अच्‍छे मार्क्‍स आना। ऐसे ही अनगिनत किस्‍से पूरे सीजन तो आपको बांधे ही रहते हैं और खत्‍म होने के बाद अगले सीजन के लिए इंतजार करने पर मजबूर कर देते हैं। टीवीएफ की ये सीरीज सोनी ये पर मौजूद है।

ये मेरी फैमिली

90 के दशक पर आधारित ये सीरीज बचपन के किस्‍सों को फिर से जीने का मौका है। गर्मियों की छुट्टियों के दौरान दोस्‍तों के साथ प्‍लान बनाना, वो कॉमिक्‍स, डब्‍ल्‍यू डब्‍ल्‍यू एफ फाइटर्स या क्रिकेटर्स के कार्ड इकट्ठा करना वो पहला क्रश और बथर् डे पर घर पर होने वाला सेलिब्रेशन। ये सब 90 के दशक की यादों को ताजा करते हैं। ये सीरीज टीवीएफ और अमेजन प्राइम पर देखी जा सकती है। 

मेंटलहुड

‘आज के समय में बच्‍चों को पालना कोई आसान काम नहीं है’ वैसे तो ये डायलॉग पीढ़ी दर पीढ़ी चलता आ रहा है। लेकिन आज कल बच्चों के साथ उनकी पढ़ाई से लेकर उनके अलग अलग एक्टिविटीज के लिए मांए जिस प्रेशर से गुजरती हैं उसकी कहानी आल्ट बालाजी की सीरीज में बखूबी दिखाई गई है। बच्चों की परफॉर्मेंस से ज्यादा पेरेंट्स को खुद भी स्कूल और दूसरी एक्टिविटीज के लिए बच्चों के साथ खुद को प्रूव करने की जद्दोजहद नजर आती है। हर मां परफेक्ट होना चाहती है और बच्चों को सँभालने के साथ घर की जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बिठाती ये कहानी हाउसवाइफ को उनसे जुडी लगती है।

पंचायत

इंजीनियरिेंग करने के बाद मनचाही जॉब न मिलना या गर्वनमेंट जॉब के लिए ट्राई करना, ज्‍यादा अच्‍छी जॉब की चाहत में एमबीए करना ये बहुत से युवाओं की जिंदगी की कहानी है। कुछ ऐसी ही कहानी को ताने बाने में बुनकर पंचायत में दिखाया गया है। कहानी इंजीनियरिंग स्नातक लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है, जो नौकरी के अवसरों की कमी के कारण गांव फुलेरा, उत्तर प्रदेश में पंचायत सचिव के रूप में शामिल हुआ। शहर और गांव के अंतर के बीच वह अपने काम और पढाई में सामंजस बिठाता है। कॉमेडी के साथ गांव के लोगों की सादगी और अपनेपन को सीरीज में बखूबी दिखाया गया है।  

कोटा फैक्‍ट्री

हर पेरेंट्स की यही उम्‍मीद होती है कि उनका बच्‍चा पढ लिखकर कुछ बन जाए। कोई डाक्‍टर, कोई इंजीनियर, कोई सरकारी नौकरी और न जाने क्‍या क्‍या सपने मां बाप संजोते हैं। बच्‍चे भी अपनी क्षमता के अनुसार अपना करियर बनाने का प्रयास करते ही हैं। ये कहानी ऐसे ही कुछ बच्‍चों के स्‍ट्रगल को दिखाती है। देश में हर साल लाखों बच्‍चे आई.आई.टी की तैयारी करतें हैं। कुछ अपनी मर्जी से तो कुछ पेरेंट्स के दबाव में। कोटा शहर में जाकर आई.आई.टी. की तैयारी करने के दौरान बच्‍चों की जिंदगी को दिखाने का प्रयास किया गया है। इस सीरीज से कुछ तो पेरेंट्स अपनी पढाई के दौरान होने वाले कॉम्‍पटीशन के साथ अपने बच्‍चों की प्रेशर को समझ सकते हैं। कोचिंग बिजनेस किस तरह काम कर रहे हैं और कैसे एक छोटा सा शहर कोटा आज कोचिंग हब बर चुका है से सब भी सीरीज में दर्शाया गया है।  

आम आदमी फैमिली

हल्‍की फुल्‍की कॉमेंडी के साथ एक परिवार की कहानी वाली यह सीरीज एक और मिडिल क्‍लास पर बेस्‍ड सीरीज है। घर में किसी बुजुर्ग के साथ रहने और यंग बच्‍चों के साथ नए और पुरानी सोच के बीच झूलती बीच की जेनरेशन यानि पेरेंट्स की कहानी आपको जरूर पसंद आएगी। मिडल क्‍लास की हर दिन की समस्‍याओं का हंसते मुस्‍कुराते सामना करने के साथ इस सीरीज में कुछ बदलावों को अपनाने की कहानी को दिखया गया है।

व्‍हॉट द फोल्‍क्‍स

सीरीज़ सभी रूढ़ियों को तोड़ने के बारे में है और आधुनिक परिवार इसे कैसे कर सकते हैं। अब तक हम सिर्फ इस बात पर गौर करते थे कि शादी के बाद लड़की का ससुराल में अपनापन पाने के लिए जद्दोजहद करनी पडती है। शायद ऐसा पहली बार किसी ने दिखाने की कोशिश की है कि आज लडके भी ससुराल को  अपना घर बनाने का प्रयास करते हैं। उन्‍हें भी ससुराल में दामाद नहीं बेटे जैसा अपनाने की चाहत है। पहले सीजन में दिखया गया है कि लड़का पत्नी के माता-पिता के साथ रहने जाता है और जो स्‍पेशल ट्रीटमेंट मिलता है उससे वा नाखुश होता है। उनके साथ रहकर वह समाज की पुरानी सोच को बदलता है कि दामाद का मतलब कोई स्‍पेशल प्राणी नहीं बल्कि अपने परिवार में जुडने वाला नया सदस्‍य है। अब तक इस सीरीज के चार सीजन आ चुके है। हर सीजन में कुछ मैसेज देने का प्रयास किया गया है।

निशा सिंह एक पत्रकार और लेखक हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिलेमें हुआ। दिल्‍ली और जयपुर में सीएनबीसी, टाइस ऑफ इंडिया और दैनिक भास्‍कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्‍थानों के साथ काम करने के साथ-साथ लिखने के शौक को हमेशा जिंदा...

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