jersey movie review
Movie Review of Jersey

Jersey Movie Review: शाहिद कपूर एक बार फिर अपना जलवा दिखाने वाले हैं, कबीर सिंह के बाद अब बॉक्स ऑफिस पर उनकी फिल्म ‘जर्सी’ धूम मचाने के लिए तैयार है। गौतम तिन्नानुरी द्वारा निर्देशित फिल्म 22 अप्रैल को सिल्वर स्क्रीन पर रिलीज हो रही है। शाहिद कपूर और मृणाल ठाकुर की मच अवेटेड फिल्म जर्सी में आपको लव, रोमांस और जुनून का तड़का मिलेगा। आम तौर पर हम केवल विजेताओं और कामयाब लोगों की कहानियां सुनना या सुनाना पसंद करते हैं,  जबकि यह फिल्म एक असफल इंसान में हीरो को ढूंढती है। फिल्म एक शानदार क्रिकेटर अर्जुन तलवार (शाहिद कपूर) की कहानी है जिसमें एक पिता अपने बेटे ( किट्टू) के नजरों में इज्जत कमाने के लिए जान की बाजी तक लगा देता है। फिल्म में अर्जुन अपने करियर की पीक पर अचानक उस खेल को अलविदा कह देता है जो उसकी जिंदगी जैसी है, वो एक ऐसा पति है, जो अपनी पत्नी विद्या (मृणाल ठाकुर) की नजरों में नकारा बन चुका है। लेकिन अपने बेटे के नजरो में हीरो है।

फिल्म का ट्रेलर देख आपको लगेगा जैसे ये किसी क्रिकेट खेल पर आधारित है, लेकिन क्रिकेट तो बस इसमें एक जरिया है, एक पिता और उसके बेटे के बीच के प्यार को दिखाने का। फिल्म की शुरुआत होती है 32 साल के एक बेटे से जो अपने पिता की कहानी पर लिखी किताब खरीदने पहुंचता है फिर शुरू होती है अर्जुन की कहानी। वह क्रिकेट कोच माधव शर्मा (पंकज कपूर) का स्टूडेंट है जिसने उसे तलाशा और तराशा है। जिसके बाद अर्जुन एक ऐसा बल्लेबाज बना जिस पर सबको गर्व होता है। इसी बीच अपने लव ऑफ लाइफ विधा से शादी कर लेता है जो अपना सब कुछ छोड़कर अर्जुन के पास आ जाती है। जिसके बाद उनकी जिंदगी में खुशी को और बढ़ाने उनका बेटा जन्म लेता है। इसी बीच अर्जून को सरकारी नौकरी से सस्पेंड कर दिया जाता है और उसे घर पर रहना पड़ता है। घर का पूरा जिम्मा पत्नी विधा उठाती है। यहीं से शुरू होती है उनका स्ट्रगल। किट्टू अपने जन्मदिन पर पिता से इंडियन टीम की जर्सी गिफ्ट देने की जिद करता है जो 500 रुपये की है। अर्जुन क्रिकेट ग्राउंड में मेहनत से लेकर उधार मांगने, अपने ही घर में चोरी करने तक हर कोशिश करता है लेकिन नाकामयाब रहता है। यहीं से अर्जुन की जिंदगी में बदलाव आता है।

jersey movie review
Jersey

जहां 36 की उम्र में लोग रिटायरमेंट की सोचते हैं, अर्जुन दोबारा क्रिकेट क्रीज पर उतरता है। फिल्म में आगे कई ऐसे सीन्स और डायलॉग है जो आपको भावुक कर देंगे। कहानी में सबसे मुख्य है, इंडियन क्रिकेट की वो जर्सी जिसे अर्जुन का बेटा पाना चाहता है और अर्जुन इसे उसे देने के लिए जान की बाजी तक लगा देता है। शाहिद ने एक फ्रस्ट्रेटेड, हारे हुए पिता और क्रिकेटर के बॉडी लैंग्वेज को बखूबी पर्दे पर उतारा है। वहीं पंकज कपूर संग उनकी केमिस्ट्री देखते बनती है। मृणाल ठाकूर और बेटे रोनित के साथ भी उनकी केमिस्ट्री आपको भाएगी। वहीं एक समय में आपको लग सकता है कि फिल्म थोड़ी लंबी खींच रही है।

jersey movie review
Father – Son Relation are shown in Jersey

बता दें कि जर्सी निर्देशक गौतम तिन्नानुरी के करियर की यह तीसरी फिल्म है। इससे पहले उन्होंने इसी कहानी पर इसी नाम से तेलुगू में फिल्म बनाई थी। तेलुगू के मुकाबले इस हिंदी रिमेक में कुछ सीन और ज्यादा प्रभावी तौर पर दर्शाया गया हैं। गौतम को अपने कलाकारों से इस फिल्म में पूरा साथ मिला। फिल्म में सबसे अनोखा है बाप-बेटे का प्यार जिसे फिल्म का एक डायलोग और स्ट्रॉग बनाता है- सीन में जब सात साल का बच्चा अपने पिता से कहता है कि, “आपने मुझे मारा, किसी से कहूं भी तो ये बात कोई मानेगा ही नहीं!” बच्चे का अपने पिता के स्नेह पर ऐसा विश्वास देख आपकी आंखें भर आएंगी। 

Leave a comment