Film Gandhi World Record: आजकल फिल्में भव्यता और अत्याधुनिक तकनीक के लिए जानी जाती हैं। विशाल सेट, प्रभावशाली वीएफएक्स, और सीजीआई के साथ फिल्मों को एक नया आयाम मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी फिल्म है जो आज भी एक रिकॉर्ड अपने नाम किए हुए है, और वह फिल्म न तो किसी डिजिटल वीएफएक्स का उपयोग करती है, न ही बड़े सेट के साथ भव्य दृश्य। वह फिल्म थी “गांधी“, जो 1982 में रिचर्ड एटेनबरो द्वारा निर्देशित की गई थी। इस फिल्म ने न केवल सिनेमा की तकनीकी सीमाओं को चुनौती दी, बल्कि एक शानदार रिकॉर्ड भी बनाया।
फिल्म “गांधी” का अंतिम संस्कार सीन
फिल्म “गांधी” का एक बहुत ही खास और प्रभावशाली सीन था, जिसमें महात्मा गांधी के अंतिम संस्कार को दिखाया गया था। यह सीन पूरी तरह से वास्तविक था और इसे शूट करने के लिए कोई डिजिटल तकनीक का सहारा नहीं लिया गया था। फिल्म के निर्माताओं ने 31 जनवरी 1981 को दिल्ली में इस सीन की शूटिंग की, जो कि गांधी जी के असली अंतिम संस्कार के ठीक 33 साल बाद था।
यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था, क्योंकि इस सीन को पूरी तरह से यथार्थवादी और भावनात्मक रूप से प्रभावशाली बनाना था। इसके लिए 94,560 पैसे लेकर काम करने वाले लोग और 2 लाख से ज्यादा स्वयंसेवकों की जरूरत पड़ी थी। यह सब केवल वास्तविक भावनाओं और परिस्थितियों को पकड़ने के लिए था।
इस फिल्म ने बनाया था वर्ल्ड रिकॉर्ड
यह सीन भले ही सिर्फ दो मिनट का था, लेकिन इसे फिल्माने में असाधारण मेहनत और समर्पण की आवश्यकता थी। इस सीन के निर्माण में कई तरह के सहयोग की आवश्यकता थी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण था लोगों की भीड़ को नियंत्रित करना। भारतीय सेना और विभिन्न स्थानीय समूहों ने इस कार्य में मदद की। निर्देशक रिचर्ड एटेनबरो ने 11 कैमरा टीमों का इस्तेमाल किया ताकि हर एंगल से सीन को सही तरीके से शूट किया जा सके।

निर्देशक ने इसे एकदम सटीक तरीके से फिल्माया। इस प्रयास के परिणामस्वरूप, “गांधी” फिल्म ने सबसे अधिक लोगों को एक साथ एक फिल्म में शामिल करने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज कराया, जो आज भी कोई फिल्म तोड़ नहीं पाई है। अभिनेता बेन किंग्सले, जिन्होंने महात्मा गांधी का किरदार निभाया, इस सीन में चुपचाप खड़े रहे, जबकि हजारों लोग उनके आसपास चलते रहे।
भारत सरकार ने दिया था गांधी फिल्म के एक तिहाई बजट का हिस्सा
यह फिल्म भारतीय इतिहास पर आधारित थी, इसलिए भारत सरकार ने भी इस फिल्म का समर्थन किया था। गांधी फिल्म के एक तिहाई बजट का हिस्सा भारत सरकार ने दिया था, जो इस फिल्म की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाता है। यह फिल्म केवल एक ऐतिहासिक घटना को नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और महात्मा गांधी के विचारों को भी पूरी दुनिया में फैलाने का माध्यम बन गई।
सिनेमा का असली अनुभव
आजकल अधिकांश फिल्में विशेष प्रभावों के माध्यम से भीड़ को दिखाती हैं, लेकिन “गांधी” ने यह सिद्ध कर दिया कि असली लोग, असली भावनाएं और वास्तविक परिस्थितियां फिल्म की शक्ति को कहीं अधिक बढ़ा देती हैं। यह फिल्म एक सच्ची श्रद्धांजलि थी महात्मा गांधी के जीवन को और एक शानदार उदाहरण है कि कैसे सिनेमा को एक सशक्त कला के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। गांधी के जीवन पर आधारित यह फिल्म न केवल एक इतिहास बन चुकी है, बल्कि सिनेमा की दुनिया में एक ऐसा आयाम जोड़ चुकी है जिसे आने वाली पीढ़ियां कभी नहीं भूल पाएंगी।
