Ankur with family
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Summary : अंकुर वारिकू ने देखी हैं कई असफलताएं

45 साल के अंकुर वारिकू ने सिर्फ अपनी उपलब्धियों के बारे में ही नहीं, बल्कि उन असफलताओं के बारे में भी लिखा जिनका उपयोग उन्होंने सफलता की सीढ़यों के रूप में किया।

Ankur Warikoo: मशहूर लेखक, उद्यमी और मोटिवेशनल स्पीकर अंकुर वारिकू ने हाल ही में अपनी जिंदगी के एक बेहद कठिन दौर का जिक्र किया। उन्हें अपने बेटे के लिए एक साइकिल खरीदने के लिए पत्नी के सोने के गहने बेचने पड़ गए थे। 45 साल के होने के बाद सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए वारिकू ने सिर्फ अपनी उपलब्धियों के बारे में ही नहीं, बल्कि उन असफलताओं के बारे में भी लिखा, जिन्होंने उन्हें गढ़ा।

अंकुर ने कहा है, “बेहतरीन यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई की, टॉप कंपनियों में काम किया, स्टार्टअप शुरू किए और बेचे, वेंचर कैपिटल से पैसा जुटाया, 18 साल से शादीशुदा हूं, 2 बच्चे हैं, मेटाबॉलिक ऐज 36 है, एक प्रॉफिटेबल स्टार्टअप चला रहा हूं, साल में 120+ दिन परिवार के साथ यात्रा करता हूं और 1.6 करोड़ से ज्यादा लोगों के लिए कंटेंट बनाता हूं… लेकिन मैंने बहुत बार असफलताएं देखी हैं।”

उन्होंने इसे अपना “फेल्योर रिज्यूमे” कहते हुए खुद को “एक सच्चा सीरियल लूजर” बताया। वो लूजर जो बार-बार असफल होता रहा है। कभी ऊपर उठते हुए, कभी इधर-उधर भटकते हुए, और कभी सीधा नीचे गिरते हुए। उन्होंने लिखा कि उनका रिज्यूमे असल में रिजेक्शन और झटकों से भरा है, जिसमें अकादमिक कमजोरियां, उद्यमी के तौर पर गलतियां और व्यक्तिगत दिवालियापन दर्ज है।

Ankur with WIFE
Ankur with WIFE

उनकी कई असफलताओं में सबसे दर्दनाक घटना 2017 की थी। उस वक्त वारिकू व्यक्तिगत रूप से दिवालिया हो गए थे। उनके दोनों क्रेडिट कार्ड की लिमिट खत्म हो चुकी थी, एक पर्सनल लोन और एक दोस्त से लिया कर्ज भी था। यानी वह कागज पर करोड़पति थे, लेकिन हाथ में नकदी नहीं थी।इसी हालात में उन्होंने अपने बेटे की 8वीं सालगिरह पर उसका एकमात्र तोहफा पूरा करने के लिए पत्नी के सोने के गहने बेच दिए। वारिकू को बेटे लिए एक साइकिल खरीदना थी।

वारिकू का फेल्योर रिज्यूमे स्कूल से ही शुरू होता है। उन्होंने क्लास 12 में इंग्लिश में सिर्फ 57 अंक पाए, जो उनकी पूरी क्लास में तीसरा सबसे कम स्कोर था। उनका सपना था आईआईटी में दाखिला लेने का, लेकिन तीन बार कोशिश करके भी वह उसमें सफल नहीं हो पाए। पहली बार उन्होंने स्कूल के तुरंत बाद IIT-JEE की परीक्षा दी, पर पास नहीं हुए। दूसरी बार, दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान दोबारा कोशिश की, लेकिन असफल रहे। तीसरी बार उन्होंने मास्टर्स के लिए आईआईटी में दाखिला लेने की कोशिश की, लेकिन तब भी रिजेक्ट हो गए।

इतना ही नहीं, सेंट स्टीफंस कॉलेज के इंटरव्यू में रिजेक्ट हो गए और अमेरिका की जिन सात यूनिवर्सिटीज में आवेदन किया था, उनमें से छह ने उन्हें मना कर दिया। किसी तरह मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के पीएचडी प्रोग्राम में दाखिला मिला, लेकिन दो साल बाद बीच में ही छोड़ दिया। बिजनेस स्कूल में भी हालत वही रही, जिन 6 बी-स्कूल्स में आवेदन किया था, उनमें से 5 ने रिजेक्ट कर दिया। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में उन्हें इंटरव्यू के दौरान लगभग हर कंपनी ने रिजेक्ट कर दिया। प्लेसमेंट में भी जिन 3 कंपनियों से इंटरव्यू किया, उनमें से 2 ने मना कर दिया। उन्होंने लिखा: “मैंने जिंदगी में कभी भी कोई एंट्रेंस एग्जाम पास नहीं किया और मैंने बहुत सारे एग्जाम दिए हैं।”

ढाई दशक से पत्रकारिता में हैं। दैनिक भास्कर, नई दुनिया और जागरण में कई वर्षों तक काम किया। हर हफ्ते 'पहले दिन पहले शो' का अगर कोई रिकॉर्ड होता तो शायद इनके नाम होता। 2001 से अभी तक यह क्रम जारी है और विभिन्न प्लेटफॉर्म के लिए फिल्म समीक्षा...