Summary : अंकुर ने सुनाई अमिता की कहानी...
ये कहानी है अमिता की। अमिता के माता-पिता की शादी को लेकर बस एक ही शर्त थी- पहले घर खरीदो, फिर शादी करो। तो अमिता और उनके पार्टनर ने वही किया।
अंकुर वारिकू ने एक्स पर एक ऐसी कहानी शेयर की, जिसने इंटरनेट पर खासी चर्चा छेड़ दी। ये कहानी है अमिता की। अमिता के माता-पिता की शादी को लेकर बस एक ही शर्त थी – पहले घर खरीदो, फिर शादी करो। तो अमिता और उनके पार्टनर ने वही किया। दोनों ने 30 साल की उम्र तक पैसे-पैसे जोड़कर सिर्फ एक ही लक्ष्य रखा…अपना खुद का घर। जब घर खरीद लिया, तब उनकी शादी हुई… और शादी इतनी सिंपल कि मेहमानों को सिर्फ एक समोसा और एक कोल्ड ड्रिंक दी गई।
वारिकू ने इस फैसले को “लाइफ में असली जीत” बताया क्योंकि इसमें साफ सोच, अनुशासन और प्राथमिकताओं की समझ दिखती है। लेकिन इंटरनेट को ये बात इतनी सीधी नहीं लगी और यहीं से शुरू हुई बहस! एक यूज़र ने अपनी कहानी शेयर की कि लगभग नौ साल पहले उनकी भी ऐसी ही स्थिति थी। उनका मानना था कि महंगा घर खरीदना बेकार है, किराये पर रहना ज्यादा स्मार्ट है। लेकिन उनकी गर्लफ्रेंड (जो अब पत्नी हैं) को अपना घर चाहिए था। बहुत समझाने के बाद भी मामला नहीं बदला, तो उन्होंने एक छोटा सा घर खरीद लिया… वो भी कम सैलरी, बड़ा लोन और ढेर सारी टेंशन के साथ। दो–तीन साल तक जैसे-तैसे गुज़ारा, बच्चों के प्लान को डिले किया और कड़ी मेहनत की। फिर समय बदला… इनकम बढ़ी, घर की कीमत दोगुनी-तिगुनी हो गई। वे कहते हैं, इस साल वह घर बेचकर बड़ा घर ले लिया। कठिन शुरुआत सही थी… आज बच्चों के साथ ज़िंदगी आसान लगती है।
कई लोगों को वारिकू की बात हजम नहीं हुई। एक यूजर बोले, “शादी के दिन सिर्फ समोसा और कोल्ड ड्रिंक? ये कैसी जीत है? शादी में दो परिवार मिलते हैं, सिर्फ खाना नहीं।” उनका कहना था – अगर इतना मिनिमल करना था तो कोर्ट मैरिज कर लेते। वारिकू ने इसका जवाब दिया – “शादी का असली मतलब… दावत नहीं, आशीर्वाद है।”
Met Amita, whose parents wanted to marry only after buying a house.
— Ankur Warikoo (@warikoo) November 29, 2025
So they married at 30 and spent everything on that house.
At their wedding, guests were served one samosa and a cold drink.
They won at life 💪
कुछ लोग सपोर्ट में, कुछ नाराज
एक यूजर ने कहा, उनके हिसाब से यह जोड़ी प्रैक्टिकल रूप से सफल रही होगी, पर इतना सादा आयोजन देखकर लोग आगे उन्हें किसी फंक्शन में बुलाना भी चाहें या नहीं, ये भी सवाल है। दूसरे ने कहा, “अगर मेहमान को बुलाकर सिर्फ समोसा-कोल्ड ड्रिंक देना है, तो मत बुलाओ। कंजूसी और सादगी में फर्क होता है।” वहीं, एक और व्यक्ति ने इस कपल की तारीफ की, “30 की उम्र में खुद का घर होना बहुत बड़ी बात है। लोग दिखावे में शादी में कर्ज ले लेते हैं, पर इन्होंने समझदारी से कदम उठाया।” एक और यूजर ने मज़ाक में कहा,“समोसा-कोल्ड ड्रिंक आइडिया बुरा नहीं। कम से कम किसी पर कर्ज तो नहीं चढ़ा!”
नतीजा क्या?
इस पूरी कहानी ने इंटरनेट पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया कि क्या शादी सादगी से करना समझदारी है… या सामाजिक उम्मीदों को नजरअंदाज करना है? किसी के लिए ये “जीत” है क्योंकि उन्होंने दिखावे से बचकर एक मजबूत शुरुआत की। किसी के लिए यह “हार” क्योंकि शादी सिर्फ दो लोगों का नहीं, दो परिवारों का उत्सव होती है। लेकिन एक बात पर सब सहमत दिखे कि हर कपल की अपनी प्राथमिकताएं होती हैं… और उनका चुनाव ही उनकी असली जीत या हार तय करता है।
