सहज, जि़ंदादिल, नि:स्स्वार्थ और शॉपिंग में डूब जाने वाली अमाया माथुर मुंबई महानगरी में बस चुके धनी और सुसम्पन्न माथुर परिवार की चहेती है। हर सोमवार से शनिवार शाम 10 बजे स्टार प्लस पर प्रसारित ‘तेरे शहर में सीरियल में अमाया माथुर की भूमिका निभाने वाली हिबा नवाब से गृहलक्ष्मी की बातचीत के कुछ प्रमुख अंश इस प्रकार हैं- 

अमाया माथुर कौन है और पेरिस में वह कैसी जि़ंदगी जी रही है?
अमाया माथुर एक फैशनपरस्त लड़की है जो पेरिस में आपदा प्रबंधन पर कोर्स कर रही है। उसके पिता यानी ‘सुपरमैन माथुर के लाड़-प्यार ने उसे बिगाड़ रखा है। वे उसकी वो मांगें भी पूरी कर देते हैं, जिनके बारे में उसने अपना मुंह भी नहीं खोला होता है। यूं ही देखने पर एकबारगी ये लग सकता है कि वह गैर-जिम्मेदार है। पर अमाया जैसी दिखती है, उससे कहीं ज्यादा कुछ है। वह दृढ़ है, कटिबद्ध है, वह अपने परिवार से बहुत-प्यार करने वाली लड़की है। वह अपने परिवार और दोस्तों को खुश रखने के लिए किसी भी हद को पार कर सकती है। जैसे सहेली के इंटरव्यू के लिए उसने अपनी सबसे पसंदीदा ड्रेस उसको दे दी क्योंकि वह आसपास के सभी लोगों को खुश रखने में विश्वास करती है। दोस्त उसे ‘दिलवाली अमाया बुलाते हैं क्योंकि उनको विश्वास है कि उसका दिल सोने का है।

अमाया के परिवार और उसके साथ अपने सम्बन्धों के बारे में बताइये?
अमाया के परिवार में उसके ‘सुपरमैन पिता ऋषि माथुर हैं, बहुत ही सख्त मां स्नेहा माथुर और दो बहनें रचिता और जैस्मिन हैं। मैं अपने परिवार से बहुत ही जुड़ी हुई हूं और उनकी खुशी मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मैं अपने पिताजी को सुपरमैन बुलाती हूं क्योंकि मैं इससे बेहतर पिता की कल्पना भी नहीं कर सकती। वे मेरी सभी मुरादें पूरी कर देते हैं, वो जब मेरे पास होते हैं, मैं खुद को बहुत ही सुरक्षित महसूस करती हूं। दूसरी ओर, मेरी मां थोड़ी सख्त हैं। वे हमेशा इस बात से चिंतित रहती हैं कि मेरे पिता के लाड़-प्यार ने मुझे बिगाड़ दिया है। वे चाहती हैं कि मैं जमीनी हकीकत से हमेशा वाकिफ रहूं। मेरी दो प्यारी बहनें हैं- रचिता और जैस्मिन, जिनके साथ मेरा अटूट बंधन है। रचिता दी ओसीडी से ग्रस्त हैं। वह मुझ से ठीक उलट एक परफेक्शनिस्ट हैं। जैस्मिन यानी जैज़ को हम-प्यारसे जैज़पीडिया बुलाते हैं। वह किताबी कीड़ा है और उसका दिमाग जिज्ञासु। मेरा परिवार ही मेरे लिए सब कुछ है।

चूंकि अमाया का अपने पिताजी से संबंध बहुत ही मजबूत है, फिर उनके बिना वह कैसे रह पा रही है?
अमाया अपने पिता के काफी करीब है। अपने सुपरमैन से दूर रहना उसके लिए भावनाओं के भंवर में फंसने जैसा है। उसका सबसे मज़बूत सहारा उसके साथ नहीं है, पर अमाया माथुर दृढ़ है और वह किसी भी परिस्थिति में टूटने वालों में से नहीं है। वह अपने परिवार को संभालने के लिए उठ खड़ी होती है और अंतत: रहने के लिए बनारस चली जाती है जहां उसकी जड़ें हैं। अमाया अपने परिवार को $खुश रखना चाहती है और उन्हें सहारा देने के लिए हर तरह की मुसीबतों का सामना करती है।

हमें पेरिस से बनारस की अपनी यात्रा के बारे में बताइये?
अपने सुपरमैन पिता का साथ छूट जाने से अमाया यानी मेरी जि़ंदगी पूरी तरह बदल जाती है। मुझे पेरिस का विलासितापूर्ण जीवन छोड़कर बनारस शहर में बसना पड़ता है। यह बदलाव मेरे लिए बहुत ही कष्टप्रद है, परन्तु अमाया के लिए असंभव कुछ भी नहीं है। अगर मैंने कोई निर्णय कर लिया है तो मेरे पास वो हिम्मत है कि मैं उसको सही साबित कर सकूं। अमाया माथुर बनारस जैसे शहर में भी अपने लिए अवसर बना लेने की क्षमता रखती है। फैशन की राजधानी पेरिस, जहां पूरी दुनिया मेरे कदमों के नीचे थी, से आने के बाद बनारस जैसे शहर में रहना आसान नहीं था, पर मैं अपने व्यक्तित्व की विशिष्टता को हल्का नहीं पडऩे दूंगी। मैं, मैं हूं और मैं अपने परिवार की मदद करने और बनारस में बसने के लिए वो सब कुछ करने के लिए तैयार हूं जिसकी ज़रूरत होगी।

क्या बनारस में आपको कोई मुश्किल पेश आई?
बनारस आना मेरे लिए पूरी तरह से एक नया अनुभव है। जब हम लोग बनारस आते हैं तो हमारा सामान गुम हो जाता है और हमें पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज करानी पड़ती है। मेरी मां को बनारस में रहने के लिए एक हवेली दी गई है, पर इस हवेली की जर्जर स्थिति देखकर मैं स्तब्ध हो जाती हूं। सुख और समृद्धि की गोद में पलने-बढऩे वाली मुझ जैसी लड़कियों के लिए बनारस एक ऐसा अनुभव है जहां हमें सब कुछ नए सिरे से शुरू करना पड़ता है। मां हम सबको दैनिक खर्च के लिए पैसे देती हैं और मैं और मेरी बहनें इन पैसों को फिज़ूल में खर्च कर देते हैं, बिना यह सोचे कि इसका परिणाम क्या होगा। बनारस मेरे जीवन की बड़ी चुनौती है और मैंने इन चुनौतियों का सामना करने का निर्णय किया है।

हमें मंटू के बारे में बताइये जिसके साथ आपका अनोखा रिश्ता है?
मेरे और मंटू के बीच एक अनोखा रिश्ता है। जब मैंने उसे पहली बार देखा तो मेरी उसके साथ लड़ाई हो गई। पर बाद में मैंने यह पाया कि वह इतना बुरा भी नहीं है। जब मैं एक इंडक्शन कुकर खरीदने की कोशिश कर रही थी, उस समय वो मेरी मदद करता है। मेरे पिताजी की तेरहवीं के समय उसने रामाश्रय के लिए मुझसे मदद मांगी थी। ये उसके कुछ ऐसे उपकार हैं जिनके लिए मैं जितना भी शुक्रिया अदा करूं,