सोनी लिव पर रिलीज़ वेबसीरीज़ ‘महारानी’ में हुमा ने बिहार की मुख्यमंत्री रानी भारती का किरदार निभाया,जिसकी काफी सराहना हुई। इसके जरिए एक बार फिर उन्होंने साबित कर दिया कि वो एक सफल और बेहतरीन अभिनेत्री हैं। बॉलीवुड के साथ उन्होंने हॉलीवुड में भी दस्तक दे दी है। वो इसी वर्ष हॉलीवुड फिल्म ‘आर्मी ऑफ द डेड’ में भी नजर आईं। जल्द ही वो अगली फिल्म ‘बेलबॉटम’ में अक्षय कुमार के साथ नजर आएंगी। 

हुमा उन एक्टर्स में से हैं, जो समाज के प्रति अपनी जि़म्मेदारी निभाने में भी आगे हैं। वो ‘सेव द चिल्ड्रन’ संस्था से जुड़ी हैं, जहां वो दिल्ली के तिलक नगर में बच्चों के लिए 100 बेड के अस्पताल की सुविधा जुटाने का काम कर रही हैं। उनसे हमने उनके फिल्म, करियर व और कई पहलुओं पर बात की। 

आपके लिए महारानी में रानी भारती का किरदार निभाना कितना मुश्किल था?

मुश्किल तो था ही, साथ ही चुनौतीपूर्ण भी था। काम शुरू करने के पहले थोड़ा डर भी था कि यह रोल मैं कर पाऊंगी या नहीं। मेरे डायरेक्टर करण शर्मा और राइटर सुभाष कपूर ने मुझे इस रोल को निभाने में बहुत सहयोग दिया। मुझे इसके लिए बिहारी भाषा में बोलने-बात करने का ढंग सीखना था, जो आसान तो नहीं था, लेकिन मज़ा भी उसी में आता है, जो मुश्किल होता है। जब ऐसी भूमिका निभाने का मौका मिलता है, जिसमें बहुत कुछ करने के लिए हो और कई उतार-चढ़ाव हो, तो एक एक्टर के लिए यह बहुत बड़ी बात होती है। ऐसा रोल मिलना एक बहुत बेशकीमती तोहफे जैसा है। मैंने इसे चुनौती नहीं, बल्कि गिफ्ट के तौर पर लिया। 

जब आपको यह रोल ऑफर हुआ, तो आपका क्या रिएक्शन था? क्या इसे हां कहने से पहले हिचक रही थी?

जब मुझे यह रोल ऑफर हुआ, तभी मुझे यह बहुत एक्साइटिंग लगा। इसकी राइटिंग डीप और ओथेनटिक थी। लेकिन साथ में मैं यह भी जानती थी कि यह एक ऐसा कैरेक्टर है, जिसे अगर मैंने ईमानदारी से नहीं निभाया, तो बहुत दिक्कत हो सकती है। मुझे याद है कि जब हम इसकी वर्कशॉप कर रहे थे और रीडिंग व एक्सेन्ट पर काम कर रहे थे, तब दो हफ्ते की रीडिंग में ही मुझे थोड़ा-थोड़ा एक्सेन्ट पकड़ में आने लग गया था। सभी को लग रहा था कि तुम गांव की औरत लग पाओगी या नहीं। यहां तक कि खुद मेरे मन में ये सवाल थे कि इस गेट-अप में कैसी लगूंगी। मेरे मन में था कि बिना किसी ग्लैमर के बगैर किसी मेकअप के आप उस प्रदेश के कैसे दिख सकते हैं। हमारा पूरा फोकस इसी बात पर ही था। 

क्या यह अपका अब तक का बेहतरीन रोल है?

हां, मुझे ऐसा लगता है। महारानी मेरा अब तक का बेस्ट रोल है। महारानी का रोल निभाना बहुत खूबसूरत और साथ ही सबसे चुनौतीपूर्ण था। 

किसी भी रोल के लिए आप खुद को कैसे तैयार करती हैं?

मैं स्क्रिप्ट पढ़ती हूं और उसे पूरी तरह से समझती हूं। अगर आप अच्छे लोगों के साथ काम कर रही हैं और आपने एक अच्छी स्क्रिप्ट चुनी है, तो आपका आधा काम तो ऐसे ही हो जाता है। इस फिल्म में काम करते हुए मैंने ध्यान रखा कि ऐसी, कोई चीज़ ना लाऊं, जो हम पहले फिल्मों में देख चुके हैं। इस किरदार के लिए मैंने एक्सेन्ट के साथ अपने लुक पर भी मेहनत की। कॉम्प्लेक्शन को दबाना, साड़ी ठीक से पहनना, आई ब्रो ना बनाना, देसी व ऐसी महिला दिखना, जो पूरी तरह गांव की है और तबेले में काम करती है, उसकी बॉडी लैंग्वेज कैसी होगी। इस पर काम करना। मेरे लिए नेचुरल लगना बहुत जरूरी था। 

कौन-सी चीजें हैं, जो आपको खुशी देती है?

मेरी फैमिली। मेरा भाई, मेरे दोस्त, मेरा घर, मेरा कुत्ता और मेरा काम। 

एक शब्द में आप अपने व्यक्तित्व को कैसे परिभाषित करेंगी?

खुशमिज़ाज़। 

आपका फैशन मंत्र क्या है?

कम्फर्टेबल, जो आपकी बॉडी टाइप को सूट करे। 

ब्यूटी सीक्रेट?

रात को मेकअप के साथ ना सोएं। अच्छे से मेकअप उतारकर और स्किन को क्लीन करके सोएं। 

फेवरेट डिश?

इन दिनों मेरा फेवरेट है चीज़ पास्ता।

क्या बनाना पसंद करती हैं?

(हंसते हुए) मैं बनाती नहीं सिर्फ खाती हूं।

हर बार अलग-अलग किरदार निभाने के बाद क्या आपकी पर्सनैलिटी में भी किसी तरह का  बदलाव आता है?

बिल्कुल। 2-3  महीने तक आपको एक किरदार को समझने में लग जाते हैं। आप उसकी साइकोलॉजी को समझते हैं, वो कहीं ना कहीं आपकी मानसिकता पर भी असर डालता है। आपके अंदर जो चीज़ें होती है, वो आप अभिनय करते समय हम उस किरदार में छोड़ देते हैं और कुछ उससे ले लेते हैं। जैसे- मैंने रानी भारती से सीखा कि जब वो अकेले मर्दों के सामने खड़ी होती है और इसका मज़ाक उड़ाया जाता है, तब यह उससे भागती नहीं बल्कि यह अपनी ईमानदारी और सादगी से अपने मन की बात लोगों के सामने पेश करती है। उससे लोगों का दिल जीत लेती है। हमको लगता है कि हमें कुछ हासिल करने के लिए खुद को अलग बनाना पड़ेगा, बदलना पड़ेगा, लेकिन यदि आप अपनी सादगी व सच्चाई से खुद से जुड़े रहें, तो वही काफी है। वो कहते हैं ना बी औथेनटिक, बस, यही सीखा। 

पिछले साल से पूरी दुनिया कोरोना महामारी से लड़ रही है। आपका यह लॉकडाउन पीरियड कैसे बीता और कैसे खुद को नेगेटिविटी से दूर रखा? 

बहुत मुश्किल दौर था, पिछला साल तो खराब था ही, ये साल बहुत ज़्यादा खराब बीता। अपने आस-पास के लोगों को इस बीमारी से गुज़रते हुए देखा। बहुत लोग तकलीफ से गुज़रे और बहुत लोगों की जान गई। इस समय पता चला कि हम कितना अनप्रीपेयर्ड हैं, मेडिकल फैसिलिटीज़ को लेकर। मैं भी बहुत डिस्टर्ब थी, इस सबसे। मुझे लगा कि मुझे कुछ करना चाहिए। मैंने दिल्ली में 100 बेड का कोविड ऑक्सीजन अस्पताल बनवाने का काम शुरू किया। हम सोशल मीडिया पर इस बारे में नेगेटिव चीजें लिखते हैं, जो एक तरह का फ्रस्ट्रेशन ही है।  सिर्फ गुस्सा होकर या भड़ास निकालकर कुछ नहीं होगा। बेहतर होगा कि आप अपनी एनर्जी को सही डायरेक्शन में अच्छे कामों में लगाएं।

क्या एक सेलिब्रिटी होने के नाते समाज के लिए कुछ करना अपनी जिम्मेदारी समझती हैं?

हम भी समाज का ही हिस्सा है। हम नहीं करेंगे तो कौन करेगा! दर्शक हमें इतना प्यार भी तो करते हैं। लोग हमारा काम देखते हैं हमारी सराहना करते हैं।  हिंदुस्तान के फैंस वर्ल्ड के बेस्ट फैंस हैं, जो एक्टर्स को पूरा सपोर्ट करते हैं, उन्हें प्यार करते हैं। इस व$क्त पूरी दुनिया एक पैनडेमिक से गुज़र रही है, हमें लोगों के सपोर्ट में आगे आना चाहिए। हम सभी की ये जिम्मेदारी बनती है कि हम समाज के लिए कुछ करें। 

 

दिल्ली से मुंबई आना और फिल्म इंडस्ट्री में अपना एक अलग मुकाम बनाना आपके लिए कितना मुश्किल था?

मुश्किल तब भी था, जब मैं आई थी और अभी भी है। संघर्ष तब भी था, अभी भी है। एक्टर के लिए हर दिन एक नया संघर्ष होता है। अब तो यह सोचते हैं कि कल सुबह उठकर काम पर जाना है और तब तक काम करना है, जब तक काम करने में मज़ा आ रहा है। 

हुमा सेट पर कैसी होती है?

सेट पर मैं सिर्फ एक एक्ट्रेस होती हूं। मैं बहुत ओपन माइंड से जाती हूं काम पर। बतौर एक्टर आप कुछ सीखने जा रहे हो। 

और घर पर?

घर आकर मैं सब कुछ भूल जाती हूं। अगर कोई पत्रकार हैं या बैंक में काम कर रहे हैं तो क्या वो काम को घर पर लाते हैं? नहीं ना। वैसे ही मेरे साथ है। मैं घर आकर सिर्फ घर की हो जाती हूं। परिवार के साथ समय बिताना, साथ खाना खाना, आदि। 

जब शूटिंग नहीं कर रही होती हैं, तब समय कैसे गुज़ारती हैं?

किताबें पढ़ती हूं, फिल्में देखती हूं, सोती हूं, अकेले समय बिताती हूं। मुझे खुद का साथ बहुत पसंद है।

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