‘तनु वेड्स मनु रिटन्र्स में आपके लिए डबल रोल करना कितना मुश्किल या आसान था?

डबल रोल में सबसे पहले फिजिकल अपियरेंस देखनी पड़ती है। फिर दोनों किरदारों के इमोशन और बॉडी लेंग्वेज। मुझे इन तीनों पर काम करना पड़ा, जो आसान नहीं था। बहुत मुश्किल और चुनौतीपूर्ण था। तनु और दत्तो में काफी अंतर भी है। दोनों किरदारों के लिए हेयर स्टाइल पर भी काम किया गया। दत्तो के किरदार के लिए मैंने हरियाणवी भी सीखी।

इतनी बड़ी सेलिब्रिटी होने के बाद कैसा महसूस होता है?

सेलिब्रिटी होना तो अच्छा लगता है लेकिन मैं थोड़ी अलग हूं। मुझे अकेले घूमने की आदत है, मुझे परेशानी होती है जब लोग घूरते हैं, देखते हैं। अभी भी मैं कम्फर्टेबल फील नहीं करती हूं।

इन दस सालों में आपका फिल्मी सफर कैसा रहा?

बहुत संघर्षपूर्ण सफर था। बहुत कुछ सीखने को मिला। एक्टिंग के साथ ही इन दस सालों में मेरी मेंटल ग्रोथ भी हुई है और सबसे बड़ी बात यह सीखी है कि मेहनत करने से ही सफलता मिलती है।

निजी जिंदगी में आपका कौन सा स्ट्रांग और वीक पॉइंट है?

मेरा सबसे बड़ा स्ट्रांग पॉइंट यह है कि मुझमें दूरदॢर्शिता है, जिंदगी को लेकर मैं फॉर साइडेड हूं। कभी-कभी तो बहुत अनुभवी लोग भी हैरान रह जाते हैं जब मैं पहले ही बता देती हूं कि इसका क्या भविष्य है। मेरा वीक पॉइंट भी यही है कि मैं अपने पॉइंट ऑफ व्यू के आगे किसी की भी नहीं सुनती हूं।

आपका अपना समय क्या होता है यानि मी टाइम?

मुझे पढऩे का बहुत शौक है। फिक्शन, फिलोसफी, आत्मकथाएं और धार्मिक सब कुछ पढ़ती हूं। आजकल विवेकानंद पढ़ रही हूं। रीडिंग की सबसे अच्छी बात यह है कि आप राइटर की दुनिया में खो जाते हैं। मुझे खुद राइटिंग का भी शौक है, स्क्रिप्ट भी लिखी है। कभी न कभी डायरेक्शन भी करूंगी।