प्रसिद्ध कपूर ख़ानदान के रणबीर कपूर के ख़ून में ऐक्टिंग भारी हुई है फिर भी फ़िल्मों में आने से पहले उन्होंने चार साल का ऐक्टिंग का कोर्स किया और संजय लीला भंसाली के साथ ब्लैक फ़िल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर का काम किया। अपने दस साल के करियर में साँवरिया, रॉकेट सिंग, बर्फ़ी, रॉक स्टार, ये जवानी है दीवानी जैसी सफल फ़िल्मे करी और क्रिटिक के साथ ही दर्शकों का भी प्यार पाया। सक्सेस और फेलियर को अपने उपर हावी ना होने देने वाले रनबीर को ग़ुस्सा भी नहीं आता है। रनबीर से हुई एक मुलाक़ात मुंबई ब्यूरो चीफ़ गरिमा चंद्रा की।
संजय दत्त की बायोपिक करने का निर्णय कितना मुश्किल था?
संजू जैसी फ़िल्म करना एक बहुत बड़ा चुनौती-पूर्ण निर्णय था। जब इस फ़िल्म का ऑफर मुझे आया तो पहले तो मुझे हैरानी हुई की संजय सर की बायोपिक के लिए राजू सर मुझे चुन रहे हैं? फिर क्या मैं ये रीयल लाइफ़ किरदार कर सकूँगा? इसे कई सवाल मेरे मन में आए लेकिन राजकुमार हीरानी का डायरेक्शन की फ़िल्म में काम करना हर एक्टर का सपना होता है। मेरे लिए ये सोने पर सुहागा वाली बात थी। संजू फ़िल्म आज के यूथ को मैसेज देती है की ड्रग लेना ग़लत है, उस से निकलना मुश्किल होता है।
क्या आप कभी रियल लाइफ़ में ड्रग जैसी आदत में पड़े है?
जब मैं कॉलेज में था तब ग़लत संगति में पड़ कर मैं ख़ुद भी ड्रग्स लेने लगा था लेकिन जल्दी ही मुझे समझ में आ गया की थोड़ी सी मज़े के लिए, थोड़े से रोमांच के लिये ड्रग्स नहीं लेना है। इससे ज़िंदगी में कुछ नहीं हो सकता, मुझे इस से निकलना है और मैं उस आदत से बाहर निकल गया। इसके लिए फैमिली का सपोर्ट और ख़ुद की विलपावर होना बहुत ज़रूरी है, अपने आप पर और परिवार पर विश्वास होना चाहिए वरना ड्रग्स से बाहर निकलना आसान नहीं होता है। इस जंग से अकेले निकलना मुश्किल है।
आपका बचपन किस तरह का गुज़रा?
मेरी ज़िंदगी बहुत अच्छी गुज़री है, बचपन से लेकर आज तक मुझे वो हर चीज़ मिली है जो एक माँ बाप अपने बच्चे को देते हैं। बेहतरीन एडुकेशन, लाड़ प्यार सब कुछ। लेकिन मैं कभी भी स्पोइल चाइल्ड नहीं था। मुझे कभी भी डिप्रेशन वग़ैरह नहीं हुआ। मुझे तो कभी ग़ुस्सा भी नहीं आता अपनी मम्मी के अलावा मैंने आज तक किसी से मार नहीं खाई है और कभी भी किसी को मारा भी नहीं है।
क्या आप अपनी करियर ग्राफ़ से संतुष्ट हैं?
ऐसा कुछ सैटिस्फैक्शन वाली बात कभी सोची नहीं है, कभी ये नहीं सोचा कि इतना काम किया है या नाम कमाया है। मैं तो सिर्फ़ एक एक्टर हूँ, सारी दुनिया तो मेरी वजह से नहीं चल रही है, मेरा काम एक्टिंग करना है, वो मैं पूरी ईमानदारी से करता हूँ। मैं अपने आप को एस ऐन ऐक्टर कभी सिरीयसली नहीं लेता हूँ, हर रोज़ ये नहीं सोचता कि काश मेरी फ़िल्म चल जाए, सूपर हिट हो जाए बल्कि मेरे लिए इम्पोर्टेंट है कि पापा से बात करनी है, पावना लेक में घर बनाना है, मैं ये सीन कैसे करूँगा। मैं एक डिटैच क़िस्म का ऐक्टर हूँ कोई भी रोल करके बहुत जल्दी उसमें से निकल जाता हूँ। मैंने “संजू” ख़त्म होते ही “ब्रह्महस्त “की शूटिंग शुरू कर दी। मैं सक्सेस और फेलियर को ज़्यादा तवजो नहीं देता हूँ बस मेरा मेन काम है ऑडियंस को ख़ुश रखना।
किस तरह से अपने किरदार का चुनाव करते हैं?
जब भी कोई एक्टर फ़िल्म सेलेक्ट करता है तो उसके ज़हन में उस किरदार को करने के लिए एक चाहत होती है। इस कहानी में कोई बात है, वो कई बार सोचता है कि इस रोल को कैसे करेंगे लेकिन अगर ज़बरदस्ती किसी के कहने पर कोई फ़िल्म करे तो उसके साथ आप जुड़ नहीं पाएँगे और फिर उस किरदार के साथ जस्टिस नहीं हो पायेगा। मैंने अपनी फ़िल्म साँवरिया से लेकर आज तक हर किरदार से कुछ ना कुछ सीखा है अब रोल सेलेक्ट करते समय कहानी स्क्रिप्ट डायरेक्टर सब का ध्यान रखता हूँ ये सोच कर फ़िल्म साइन नहीं करता कि अवॉर्ड मिलेगा या नहीं?
अपने दादाजी राज कपूर जी के साथ किस तरह की यादें जुड़ी हैं? क्या राज कपूर के जीवन पर फ़िल्म बननी चाहिए?
जब मैं ख़ुद फ़िल्मों में काम कर रहा हूँ तो अपने ग्रैंड फ़ादर राज कपूर जी को बहुत मिस करता हूँ। अपने ग्रैंड फ़ादर को मैं उनकी फिल्मों के ज़रिए ज़्यादा जानता हूँ, उनकी फ़िल्मे, उनका कहानी कहने का अंदाज़ मुझे बहुत पसंद है। जिस तरह से उन्होंने फ़िल्मे बनाई, जिस क़िस्म का उन्होंने सिनेमा दिया वो तारीफ़ के काबिल है। लेकिन उनके जीवन पर फ़िल्म बनाई जाए ये शायद मुमकिन नहीं है क्योंकि जब भी कभी किसी की भी बायोपिक बने तो ऑनेस्ट तरीक़े से बननी चाहिए, आप प्रोपोगन्डा फ़िल्म नहीं बना सकते कि वो भगवान थे। वो एक नोर्मल इंसान थे, उनकी लाइफ़ में भी फ़ॉल्ट थे तो अगर मेरी फेमिली परमिशन दे कि उनके उपर सच्ची ऑनेस्ट फ़िल्म बने तभी ये मुमकिन होगा।
आपकी निजी ज़िंदगी में जब मीडिया दख़ल अंदाजी करती है तो कैसा लगता है ?
हाँ ये सच है कि हम ऐक्टर ऐक्ट्रेस के बारे में सब लोग जानना चाहते है और मीडिया हमारी निजी ज़िंदगी में दख़ल करता है लेकिन मुझे इस से कोई बुरा नहीं लगता क्यूँ कि ये हमारी ज़िंदगी का एक हिस्सा है पार्ट एंड पर्सनल ऑफ़ आवर लाइफ़। हमें यहाँ तक पहुँचने में मीडिया का बहुत बड़ा रोल है (हंस कर) हाँ बहुत बार मीडिया मेरा मज़ाक भी उड़ाते है अब तो मुझे भी तैमूर की नई फ़ोटो का इंतज़ार रहता है लेकिन मैं मानता हूँ कि सब अपना काम करते है।
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