वेट लॉस की यह प्रेरणा कहां से मिली?

दरअसल वेटलॉस के लिए मुझे किसी प्रेरणा की जरूरत नहीं थी। मैं अपने काम के लिए हमेशा से कॉन्फीडेन्ट थी, लेकिन अपनी बॉडी के प्रति हमेशा अंडर कॉन्फीडेन्ट। मैं एक्ट्रेस बनने से पहले ही वजन कम करना चाहती थी, फिट होना चाहती थी और मुझे पूरा एक साल लगा। बहुत हार्ड वर्क और डेडिकेशन के बाद यह हो सका। मैंने मार्शल आर्ट और सभी काम समय पर किए, खाना, सोना, एक्सरसाइज। अपनी बॉडी का बच्चे की तरह ख्याल रखा और एक साल में रिजल्ट दिखने लगा।

कभी ऐसा महसूस हुआ कि अब मुझसे नहीं होगा?
बहुत बार, महसूस होता था कि मेरी बॉडी पर कोई भी डाइट या एक्सरसाइज काम नहीं कर रही। लगता था कि सब पतले हो सकते हैं बस मैं नहीं। शुरूआत में एक दो महीने मोटिवेशन की ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन जब आप उस स्टेज को क्रॉस कर जाते हैं तब मजा आने लगता है और कॉन्फीडेन्स भी बढ़ता है।

वेटलॉस के बाद उसे मेनटेन करना कितना मुश्किल होता है?
वेटलॉस को मेनटेन करना बहुत मुश्किल है। जब आपका वजन कम हो जाता है तो आप सोचते हैं कि अब हम कुछ भी खा सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। मेन्टीनेंस भी एक माइंड गेम है, अपने आपको हमेशा मोटिवेट करना पड़ता है, वर्कआउट जरूरी है और खाने में कंट्रोल करना पड़ता है।

 

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अब तक का बेस्ट कॉम्पलीमेंट क्या मिला?
बहुत सारे कॉम्पलीमेन्ट्स मिल रहे हैं, सभी तारीफ करते हैं लेकिन बेस्ट कॉम्पलीमेंट मुझे मेरे अपने कपड़े दे रहे हैं। कुछ भी पहनती हूं तो अच्छा लगता है और इसीलिए मुझे लगता है कि मेरे कपड़े ही मुझे कॉम्पलीमेंट दे रहे हैं। 

आपका फेवरेट फूड क्या है?
मुझे हमेशा से घर का बना सादा खाना पसंद है। यह खाना सबसे ज्यादा हैल्दी होता है और ये खाकर गिल्ट फीलिंग भी नहीं होती। हां, जब मेरा मूड खराब होता है तो मैं पिज़्ज़ा खाती हूं, पिज़्ज़ा खाने में मेरी वीकनेस है।



आज की यंग जेनरेशन को क्या मैसेज देंगी?
आज की यंग जेनरेशन से कहूंगी कि फिटनेस बहुत जरूरी है। यही सही समय है, अभी से अपनी बॉडी का ख्याल रखेंगे तो बुढ़ापे में फिट रहेंगे। हेल्थ प्रॉब्लम्स कम होंगी, तकलीफ नहीं होगी। बड़ी उम्र में वजन घटाना मुश्किल होता है, खासकर लड़कियों के लिए। अपना ख्याल रखें, अपनी प्रॉब्लम्स के बारे में बात करें, अपने आपको मोटिवेट करें और मार्केट में उपलब्ध अच्छे-अच्छे प्रोडक्ट को यूज करके अपनी लाइफ को इजी बनाएं।

आपकी नजर में अल्ट्रागर्ल का क्या मतलब है? लड़कियों के पीरिएड्स को लेकर काफी मिथक हैं क्या आपने कभी उनका खुलकर विरोध किया?
देखिए, अल्ट्रागर्ल का मतलब सिर्फ चमकना नहीं है। मेरा अल्ट्रागर्ल से मतलब है कि मैं नेरोमाइंड नहीं हूं, मेरी सोच छोटी नहीं है और मुझे मर्दों के कंधे से कंधा मिलाकर काम करना आता है। जहां तक उन दिनों के टैबूज़ की बात है कि लड़कियों को पीरिएड्स के समय मंदिर नहीं जाना चाहिए, अचार नहीं टच करना चाहिए, किचन में नहीं जाना चाहिए आदि, इन सबका मैंने हमेशा विरोध किया है। मेरी दादी भी यह सब रेस्ट्रिक्शन्स लगाती थीं। मैं स्कूल में थी तभी से दादी से लड़ाई करती थी कि मैंने कुछ गलत नहीं किया है। हम पढ़े लिखे एजुकेटेड फैमिली से हैं, फिर यह ढकोसले क्यों फॉलो करें। इन सबके पीछे की सोच बदलना जरूरी है। अगर किसी को कोई मेडिकल प्रॉब्लम है तो बात अलग है वरना हमें अपनी नार्मल जिंदगी और रुटीन में काम करना चाहिए।