मूर्धासन खड़े होकर किया जाने वाला एक आसन है, यह शीर्षासन के लिए शरीर को तैयार करता है यानि इस आसन का अभ्यास हो जाने पर शीर्षासन करना आसान हो जाता है। आइये जानते हैं इस आसन के करने के तरीके और फ़ायदों के बारे में –
 
मूर्धासन से होने वाले फायदे 
  • इस आसन को करने से ब्लड फ्लो हार्ट की तरफ होता है जिसके कारण यह आसन लो ब्लड प्रैशर की समस्या में राहत पहुंचाता है। 
  • इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी में खिंचाव होता है, इस कारण रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है जिससे स्पाइन से जुड़ी परेशानियों से बचने में मदद मिलती है। 
  • नियमित रूप से इस आसन को करने से एंटि एजिंग इफैक्ट मिलते हैं। चेहरे की तरफ ब्लड का प्रवाह होने से झाइयाँ, ब्लैक हेड्स, एक्ने जैसी समस्याएँ दूर होती हैं। 
  • यह हमारे नर्वस सिस्टम को बैलेंस करता है जिससे तनाव, चिंता और डिप्रेशन दूर होता है। 
  • यह गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत करता है। इस आसन से शरीर के बैलेंसिंग सिस्टम में सुधार होता है और एकाग्रता बढ़ती है। 
  • इस आसन को करने से इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।  
ऐसे करें यह आसन 
 

 

  • पैरों के बीच में लगभग 1 मीटर की दूरी रखते हुए सीधे खड़े हों। 
  • श्वास छोड़ते हुए कमर से सामने की तरफ झुकते हुए अपने हाथों को दोनों पैरों के बीच में सामने की तरफ रखें। ध्यान रहे कि पूरे शरीर का भार दोनों पैरों पर समान रूप से बंटा हुआ रहे। 
  • अब धीरे से अपने सिर के ऊपरी भाग या मूर्धा वाले भाग को दोनों हाथों के बीच में जमीन पर रखें।
  • अपने सिर पर बैलेन्स बनाते हुए अपने हाथों को उठाकर पीठ के पीछे की ओर ले जाएँ। पीछे ले जाकर एक हाथ से दूसरे हाथ की कलाई पकड़ लें। 
  • इस स्थिति में अपनी सुविधानुसार जितनी देर रुक सकते हों, रुकें। फिर धीरे से पहली स्थिति में वापस आ जाएँ।  
  • इस अभ्यास को 2-3 बार करें। शुरुआत में कुछ सेकेंड्स के लिए फ़ाइनल पोजिशन में रुकें, फिर धीरे -धीरे समय को बढ़ाते जाएँ। 
सावधानी है बेहद जरूरी 
 
  • जिन व्यक्तियों को हाई ब्लड प्रैशर या किसी भी तरह की हार्ट में समस्या है, वे लोग इस अभ्यास को न करें। 
  • क्रोनिक अस्थमा, कोल्ड या सिन्यूसाइटिस की स्थिति में भी इस आसन को नहीं करना चाहिए। 
  • ऐसे लोग जिनका ब्लड बहुत अशुद्ध है या जिनको वर्टिगो ( चक्कर आना ) की समस्या है उन्हें यह आसन नहीं करना है। 
  • स्लिप डिस्क या रीढ़ की हड्डी में कोई समस्या होने पर यह अभ्यास नहीं करें।