Assistant Director Rapido Driver
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Summary : विराज श्रीवास्तव आधी दुनिया घूम चुके और एक मशहूर सीरियल में एडी रहे

विराज की पहली तनख्वाह 2500 रुपए थे लेकिन वो निर्देशक बनने के लिए जुटे थे, अभी भी वो बनना तो डायरेक्टर ही चाहते हैं...

Assistant Director Rapido Driver: जब फिल्मकार और कंटेंट क्रिएटर रत्नम ई एम कालरा ने रैपिडो बाइक राइड बुक की, तो उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि बाइक चलाने वाला एक असिस्टेंट डायरेक्टर मिलेगा। लेकिन कुछ ऐसा ही हुआ, जब उनकी मुलाकात विराज श्रीवास्तव से हुई। एक पूर्व असिस्टेंट डायरेक्टर जो अब रैपिडो कैप्टन बनकर अपनी फिल्मी मंजिल की तलाश में जुटा है। उनकी संघर्ष, दर्द और अटूट जज्बे की कहानी आज इंटरनेट पर लोगों के दिलों को छू रही है।

रत्नम ने इस मुलाकात की कहानी इंस्टाग्राम पर शेयर की। उन्होंने बताया कि जब श्रीवास्तव ने उनके कंधे पर बंधे एक्शन कैमरे को देखा, तो उन्होंने पूछा, “क्या आप व्लॉगर हैं?” इस पर कालरा ने जवाब दिया, “मैं फिल्ममेकर हूं।” यह सुनते ही विराज बोले, “मैं भी था”।बस फिर क्या था, एक आम-सी राइड एक यादगार सफर में बदल गई। ये विराज की रैपिडो पर पहली सवारी थी और इत्तेफाक से उनकी पहली ही राइड एक फिल्ममेकर के साथ हो गई। यह मोड़ किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगा।

विराज श्रीवास्तव का ताल्लुक एक साधारण परिवार से है। उन्होंने जी टीवी के मशहूर धारावाहिक ‘कुबूल है’ में बतौर सह-निर्देशक काम किया है, जिसमें सुरभि ज्योति और करण सिंह ग्रोवर मुख्य भूमिकाओं में थे। उनकी पहली तनख्वाह मात्र 2250 रुपए थी, लेकिन यही काफी था उनकी फिल्मी आग को जलाने के लिए। लेकिन जिंदगी ने उन्हें तब कठिन मोड़ पर ला खड़ा किया, जब उनके पिता का निधन हो गया। घर की हालत बिगड़ने लगी। आर्थिक तंगी के चलते उन्हें पढ़ाई छोड़ना पड़ी और अपनी मां को छोड़कर दूसरे शहर में नौकरी की तलाश में निकलना पड़ा।

कालरा के वीडियो में विराज बहुत ही शांत भाव से अपनी कहानी बयां करते हैं, वो अब तक आधी दुनिया घूम चुके हैं, तीन पासपोर्ट भर चुके हैं। लेकिन आज छोटी-छोटी पार्ट टाइम नौकरियों से गुजारा कर रहे हैं। वे अपनी मां को बहुत याद करते हैं। कहते हैं, “मैं मां को पुकारता रहा… पर लौट नहीं सका।” वो बताते हैं कि हालात ऐसे हो गए थे कि उन्हें समझ नहीं आया कि घर कैसे लौटें।

लेकिन उनकी आत्मा कभी टूटी नहीं। विराज सिर्फ़ एक निर्देशक नहीं हैं, वे एक प्रशिक्षित संगीतकार भी हैं। वे ड्रम, कोंगो और युकुलेले जैसे वाद्य यंत्र बजा सकते हैं। साथ ही वे ठुमरी जैसी अर्ध-शास्त्रीय गायन शैली में भी पारंगत हैं। उनका एक सपना अब भी पूरी शिद्दत से ज़िंदा है, “मरने से पहले, मैं डायरेक्टर की कुर्सी पर बैठूंगा और कहूंगा … ‘रोल, कैमरा, एक्शन।’”

रत्नम कालरा ने विराज को तीन शब्दों में बताया – “खास, जिद्दी और बेहद प्रतिभाशाली”। इंटरनेट की जनता भी इससे सहमत है। इस वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोग भावुक हो उठे। ‘चक दे! इंडिया’ फेम अभिनेत्री और पूर्व हॉकी खिलाड़ी चित्राशी रावत ने इस रील पर प्रतिक्रिया देते हुए विराज को “अद्भुत इंसान” बताया। वहीं, एक्ट्रेस और कंटेंट क्रिएटर कुशा कपिला ने भी वीडियो में विराज के एक दमदार संवाद का जिक्र करते हुए पोस्ट शेयर किया। लोगों ने विराज के आत्मविश्वास और संघर्ष की दिल से सराहना की। एक यूजर ने लिखा, “इनका जज्बा वाकई प्रेरणादायक है।” एक ने कहा, “ऐसे लोगों की अडिग जिद ही उन्हें सबसे अलग बनाती है।”

ढाई दशक से पत्रकारिता में हैं। दैनिक भास्कर, नई दुनिया और जागरण में कई वर्षों तक काम किया। हर हफ्ते 'पहले दिन पहले शो' का अगर कोई रिकॉर्ड होता तो शायद इनके नाम होता। 2001 से अभी तक यह क्रम जारी है और विभिन्न प्लेटफॉर्म के लिए फिल्म समीक्षा...