Summary: अमिताभ बच्चन से डर गए थे अभिषेक कि वैनिटी में छुपे रहे

अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन ने पॉलिटिकल क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘सरकार’ में एक साथ स्क्रीन शेयर की थी|

Amitabh Scolded Abhishek: अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन ने पॉलिटिकल क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘सरकार’ में एक साथ स्क्रीन शेयर की थी। द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में अभिषेक ने याद किया कि कैसे शूटिंग के पहले दिन वे अपने पिता के साथ स्क्रीन शेयर करते समय घबरा गए थे। बाद में, अमिताभ ने अपनी कार में बैठकर उन्हें डांटा, जिससे वह अंदर से टूट गए थे।

अभिषेक ने इस घटना को याद करते हुए कहा, “हमने पहली बार साथ में ‘सरकार’ के लिए शूट किया था। रामू (राम गोपाल वर्मा) ने कहा कि हम कुछ टेस्ट शूट करेंगे, फिर मैं जाकर ‘बंटी और बबली’ की शूटिंग कर सकता हूं। यह सितंबर 2004 की बात है। पहले दिन मैं घबरा गया था और पसीने-पसीने हो गया था। पापा ने मुझे कहा, ‘शंकर’ और मुझे बस पलटकर कहना था, ‘जी?’ मैं बहुत डर गया था, सच में कांप रहा था। उनकी मौजूदगी में ऐसा ही होता है।”

अभिषेक ने आगे बताया कि शूटिंग खत्म होने के बाद वे अपनी वैनिटी वैन में बैठकर इंतजार कर रहे थे कि उनके पापा पहले निकल जाएं, फिर वह निकलेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि अमिताभ खुद उनकी वैनिटी वैन के बाहर आए और बोले कि दोनों साथ में घर चलते हैं। उस रास्ते में पूरी ड्राइव पिन-ड्रॉप साइलेंस में गुजरी। अमिताभ बस सामने देख रहे थे। जब दोनों अपने बंगले के आंगन में पहुंचे, स्टाफ गाड़ी से उतर गया और कार में सिर्फ पापा-बेटे रह गए। अभिषेक बताता हैं, “वो बस बैठे रहे, फिर धीरे से मेरी तरफ मुड़े और बोले, ‘इसलिए मैंने इतने साल मेहनत करके तुम्हें पढ़ाया-लिखाया? डायलॉग बोलना आता नहीं है तुम्हें’। उनकी नजरें देख कर मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने कोई जुर्म कर दिया हो। उस पल उन्होंने मुझे अंदर से तोड़ दिया।”

अभिषेक बताते हैं, “एक्टर बेहद नाज़ुक होते हैं। बाहर से हम एक मजबूत चेहरा दिखाते हैं, लेकिन अंदर से हम डरे हुए बच्चों की तरह होते हैं। हमें दूसरों की सराहना चाहिए होती है। हमें यह डर होता है कि अगर हम कहीं बाहर गए तो कोई हमें पहचानेगा भी या नहीं। मैं सच में चाहता हूं कि हर एक्टर यह दोनों अनुभव करे। तभी आप इनकी असली कदर कर पाते हैं। मैं ऐसे कमरों में गया हूं जहां कोई मुझे देखकर पलट कर भी नहीं देखता था। मैं होटल की लॉबी में गया और वहां मेरे होने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा। मुझे लगा था कि मैं फिल्म स्टार हूं तो फर्क पड़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ…।”

अभिषेक ने आगे कहा, “जब आप होटल की लॉबी में जाते हैं तो उम्मीद होती है कि कोई ऑटोग्राफ के लिए आएगा और फिर कोई नहीं आता। आप इसे चुपचाप सह लेते हैं और आगे बढ़ जाते हैं। कुछ महीने बाद ‘धूम’ रिलीज होती है, और आप मैरियट होटल में जाते हैं तो लॉबी एकदम रुक-सी जाती है। आप इसकी कदर इसलिए कर पाते हैं क्योंकि आपने इसका उल्टा भी देखा है। और चूंकि आपने वह उल्टा देखा है, आप फिर से वहां वापस नहीं जाना चाहते, इसलिए आप और ज्यादा मेहनत करते हैं। मैं अक्सर कहता हूं कि सफलता की नींव असफलता की जमीन पर रखी जाती है।”

हाल ही में अभिषेक बच्चन ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने 25 साल पूरे किए हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जेपी दत्ता की फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से की थी। अब वह अपनी अगली फिल्म ‘कालीधार लापता’ में नजर आएंगे जो 4 जुलाई को जी5 पर रिलीज हो रही है।

ढाई दशक से पत्रकारिता में हैं। दैनिक भास्कर, नई दुनिया और जागरण में कई वर्षों तक काम किया। हर हफ्ते 'पहले दिन पहले शो' का अगर कोई रिकॉर्ड होता तो शायद इनके नाम होता। 2001 से अभी तक यह क्रम जारी है और विभिन्न प्लेटफॉर्म के लिए फिल्म समीक्षा...