Beauty Surgical Remedies: बोटॉक्स और फिलर का ट्रेंड लोगों के बीच काफी मशहूर हो रहा है। खासकर युवा लोगों के बीच। लेकिन बिना जानकारी के सिर्फ ट्रेंड को फॉलो करते हुए इन्हें कराया जाए तो आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
हाल ही में चॢचत आर्ट कलेक्टर शालिनी पासी ने एक साक्षात्कार के दौरान छोटी उम्र की लड़कियों में बोटॉक्स और कॉस्मेटिक सर्जरी कराने के ट्रेंड को लेकर अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि मैंने देखा है कि 18 से 19 साल की लड़कियों में बोटॉक्स और इसी तरह के ट्रीटमेंट करवाना ट्रेंड बन गया है जोकि गलत है क्योंकि ये वो उम्र है जब आपका शरीर अभी पूरी तरह से विकसित भी नहीं हुआ है। यहां तक कि 22 साल की उम्र में भी ऐसी प्रक्रियाएं करवाना सही नहीं है। शालिनी ने भले ही ये बात कह दी है लेकिन कॉस्मेटिक सर्जरी कराने का चलन लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि लोग लंबे समय तक जवान और खूबसूरत दिखना चाहते हैं, जिसके लिए वह कॉस्मेटिक सर्जरी और नॉन-सॢजकल ब्यूटी प्रोसीजर्स का सहारा ले रहे हैं। कॉस्मेटिक सर्जरी और नॉन-सॢजकल ब्यूटी ट्रीटमेंट्स का चलन बढ़ने का कारण सोशल मीडिया और सेलेब्रिटीज भी हैं। इससे पहले कि हम आगे बढ़े उससे पहले आपको नॉन-सॢजकल ब्यूटी प्रोसीजर्स और कॉस्मेटिक सर्जरी के बीच का अंतर बताते हैं।
नॉन-सॢजकल ब्यूटी प्रोसीजर्स में बोटॉक्स, फिलर, फोटोथेरेपी जैसे ब्यूटी ट्रीटमेंट आते हैं। इन्हें कराने के लिए किसी तरह की सर्जरी नहीं की जाती। इनमें छोटे इंजेक्शन, लेजर थेरेपी या दूसरी नॉन-सॢजकल तकनीक का उपयोग होता है। लेकिन ये ट्रीटमेंट बहुत लंबे समय के लिए नहीं रहते और इनका रिकवरी करने
का समय भी बहुत कम होता है। इस तरह के ट्रीटमेंट में 5,000 रुपये से 50,000 रुपये प्रति सेशन तक की लागत आ सकती है। कॉस्मेटिक सर्जरी में राइनोह्रश्वलास्टी, फेसलिफ्ट, लिपोसक्शन या ब्रेस्ट इंह्रश्वलांट
जैसी कॉस्मेटिक सर्जरी आती है। इसमें पूरा एक मेडिकल प्रोसीजर किया जाता है।
कॉस्मेटिक सर्जरी में शरीर के किसी हिस्से को हमेशा के लिए उसके प्राकृतिक आकार को बदल दिया जाता है। इसमें कट लगाकर टिशूज को बदलते हैं। रिकवरी करने का समय ज्यादा होता है और यह महंगी भी होती
है। बावजूद इसके ये बहुत लोकप्रिय है। इस तरह के ट्रीटमेंट में 50,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये या उससे भी अधिक का खर्च आ सकता है।
क्या है बोटॉक्स

उम्र बढ़ने के साथ त्वचा में कोलेजन और इलास्टिन बनना कम हो जाता है जिस कारण झुॢरयां आने लगती हैं। इसके साथ ही मांसपेशियां ढीली पड़ने लगती हैं। इन ढीली पड़ी मांसपेशियों को फिर से स्वस्थ करने के लिए लोग बोटॉक्स का सहारा लेते हैं।
बोटॉक्स एक इनजेक्टेबल्स कॉस्मेटिक है जो मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है। यह बोटुलिनम टॉक्सिन टाइप ए है जिसमें खास तौर पर ओनाबोटुलिनमो टॉक्सिन ए का इस्तेमाल किया जाता है। बोटॉक्स का
मेडिकल और कॉस्मेटिक दोनों में इस्तेमाल किया जाता है।
क्या है फिलर
फिलर एक कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट है, जिसमें इंजेक्शन के जरिए खासकर होंठों को पाउटी लुक देने के लिए किया जाता है। अगर इसको एक्सपर्ट्स से न कराया जाए या गलत तरीके से किया जाए तो आपके होंठों का संतुलन बिगड़ सकता है। फिलर के कई प्रकार होते हैं। ह्यालुरोनिक एसिड फिलर त्वचा में प्राकृतिक नमी बनाए रखने में मदद करता है। कोलेजन फिलर त्वचा की लोच और मजबूती बढ़ाता है। पॉली-एल-लेक्टिक एसिड फिलर शरीर को कोलेजन उत्पादन के लिए प्रेरित करता है और कैल्शियम हाइड्रॉक्सिलएपेटाइट फिलर गहरी झुॢरयों को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है।
बोटॉक्स और फिलर करवाने की सही उम्र
बोटॉक्स और फिलर कराने की सही उम्र को लेकर कॉस्मेटिक ह्रश्वलास्टिक सर्जन और एंड्रोलॉजिस्ट डॉ. अनूप धीर का कहना है कि फिलर होंठों को पाउटी दिखाता है ऐसे में मॉडलिंग प्रवृति के लोग इसको ज्यादाकरवाते हैं। युवाओं में भी फिलर करवाने की ट्रेंड लगातार बढ़ रहा है। वहीं बोटॉक्स एंटी एजिंग है तो लोग आमतौर पर इसको 25 और 30 से पहले नहीं करवाते हैं क्योंकि इस उम्र में झुॢरयां नहीं आती है। अगर किसी अनुभवी सर्जन से बोटॉक्स और फिलर न कराया जाए तो मांसपेशियों में लकवा मार सकता है, जो आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। बोटॉक्स लगभग 6 महीने तक रहता है और फिलर अधिकतम 9 महीने या
1 साल तक रहता है। ऐसे में अगर आपको इन्हें कराने की लत लगती है तो आपके पास इन्हें दोबारा कराने की क्षमता होनी चाहिए।
बोटॉक्स और फिलर के जमाने में आयुर्वेद और घरेलू नुस्खे

बोटॉक्स और फिलर के जमाने में अगर आप अपनी त्वचा को इंजेक्शन और सर्जरी से बचाकर रखना चाहते हैं तो आयुर्वेद और घरेलू नुस्खों को भी अपना सकते हैं। आयुर्वेद में भी त्वचा और बालों की खूबसूरती को बनाए रखने के कई उपाय हैं।
इस तरह के उपायों में आपको किसी तरह के दुष्परिणाम की चिंता नहीं रहती। आयुर्वेद में पंचकर्म की स्नेहन और स्वेदन विधि को प्रयोग में लाया जाता है। पंचकर्म दरअसल, शरीर की शुद्धिकरण की एक प्रक्रिया है।
इसके साथ ही योग और खानपान से भी आप अपनी बाहरी और अंदरूनी खूबसूरती को बनाए रखते हैं। आजकल के खानपान का असर हमारी बाहरी सुंदरता को प्रभावित करता है। आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां जैसे-
अश्वगंधा, हल्दी, आंवला, ब्राह्मïी और चंदन का प्रयोग त्वचा को जवां बनाए रखने में मदद करता है। इसके साथ ही योग और प्राणायाम त्वचा की चमक को बढ़ाते हैं।
स्नेहन विधि: में शरीर की तेल मालिश की जाती है, जो शरीर की कई परेशानियों को दूर करते हैं। स्नेहन शरीर के बाहर और अंदर दो तरीकों से किया जाता है। बाहरी प्रक्रिया में शरीर की तेल मालिश की जाती है जिससे
त्वचा की नमी बनी रहती है और रूखापन कम होता है। आंतरिक प्रक्रिया में औषधि युक्त घी या तेल रोगी को पिलाया जाता है जो शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर निकालता है।
स्वेदन विधि: इस विधि में सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से गर्मी उत्पन्न करके शरीर से पसीना निकाला जाता है, जिससे त्वचा से टोक्सिन बाहर निकलते हैं। ये गर्मी औषधीय हर्बल काढ़े की भाप के जरिये उत्पन्न की जाती है।
इस प्रक्रिया से शरीर से विषाक्त पदार्थ अथवा तत्व बाहर निकलते हैं और तनाव में कमी आती है। इस तरह की प्रक्रिया शरीर की संपूर्ण त्वचा में चमक प्रदान करती है।

(आलेख कॉस्मेटिक ह्रश्वलास्टिक सर्जन और एंड्रोलॉजिस्ट डॉ. अनूप धीर से बातचीत पर आधारित है)
फिलर एक कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट है, जिसमें इंजेक्शन के जरिए खासकर होंठों को पाउटी लुक देने के लिए किया
जाता है। फिलर हमेशा किसी एक्सपर्ट से ही करवाएं।
