Formula for Beauty: यदि आप स्वस्थ रहने के साथ खूबसूरत और आकर्षक दिखना चाहते हैं तो अपनी थाली में आपको बदलाव करने की जरूरत है।
आजकल सबसे हॉट टॉपिक है- एंटी-एजिंग! हर कोई वो जादुई फॉर्मूला (या कहें सुपरफूड) ढूंढ रहा है जो हमें अंदर से जवान बनाए रखे और हो सके तो उम्र का असर पीछे कर दे। पर क्या ये सच में मुमकिन है? क्या उम्र बढ़ना रोका जा सकता है? ज्यादा मुश्किल नहीं है!
सफेद जादू- दही को अपनाएं

दही में दूध के सभी फायदे हैं और साथ में प्रोबायोटिक्स भी, जो हमारी आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाते हैं और पाचन तंत्र को फिट रखते हैं। ये हमारी इम्यूनिटी भी बूस्ट करते हैं, क्योंकि 70 प्रतिशत प्रतिरोधक क्षमता हमारी गट (आंत) में होता है, इसलिए यदि यह सुस्त है तो इससे प्रतिरोधक क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ता है।दही में मौजूद भरपूर कैल्शियम हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाती है। साथ ही, यह कोलेजन के प्रोडक्शन में मदद करता है। कोलेजन एक प्रोटीन है जो त्वचा और टिशू को मजबूती देता है और झुर्रियों को कम करता है। इतना ही नहीं, इसमें मौजूद विटामिन सी, जिंक और कैल्शियम कोलेजन प्रोटीन के स्ट्रैन्ड्स को मजबूती से जोड़े रखने में मदद करते हैं, जिससे आपकी त्वचा उम्र बढ़ने के बावजूद भी जवां बनी रहती है।
सही ऑयल्स का करें चयन
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, आमतौर पर हमारी सबसे बड़ी चिंताएं होती हैं- सोचने, याद रखने और सीखने जैसी दिमागी गतिविधियों में गिरावट (जो कि मस्तिष्क की तंत्रिका गतिविधि से जुड़ी होती हैं) और अन्य अंगों का काम करना, खासकर हृदय से जुड़ी समस्याएं। ऐसे में सही तेलों का चुनाव करना बहुत जरूरी हो जाता है। सैचुरेटेड फैट्स (जैसे- मक्खन, घी) का सेवन कम रखें (बिल्कुल न छोड़ें) और मोनोसैचुरेटेड और पॉलीसैचुरेटेड फैटी एसिड्स (साथ ही ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड्स) के सही अनुपात पर ध्यान दें ताकि एलडीएल कोलेस्ट्रॉल, जो धमनियों में चिपकता है, कम रहे और फायदेमंद एचडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़े। इस बैलेंस से दिमाग भी खुश रहता है। और सबसे जरूरी है कि आप कोशिश करें कि प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दो चम्मच तेल की मात्रा ही सही मात्रा हो।
ग्रीन टी पिएं
चाय के तरोताजा करने वाले राज का खुलासा हो चुका है। इसके पीछे का राज एंटी- ऑक्सीडेंट्स है। ये वही पोषक तत्व हैं जो हमारे खाने-पीने में होते हैं और शरीर को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाने और फ्री रेडिकल्स पर लगाम लगाने में मदद करते हैं। चाय में फ्लेवोनॉइड्स नाम का एक खास तत्व होता है, जो सेल्स डैमेज को बचाता है और अल्जाइमर जैसी उम्र से जुड़ी ब्रेन डिजेनरेटिव बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद करता है।
रंग-बिरंगा खाओ, जवां रहो
इंद्रधनुष कभी पुराना नहीं लगता, तो आप क्यों लगें? थोड़ा घिसा-पिटा लग सकता है, लेकिन बात सोलह आने सच है। सच तो ये है कि एक रेनबो थाली सबसे आसान और बेहतरीन तरीका है अपने शरीर को ढेर सारे मिनरल्स, विटामिन्स, एंटी-ऑक्सीडेंट्स, बायोफ्लेवोनॉयड्स और दूसरे न्यूट्रिएंट्स देने का, जो उम्र बढ़ने से बचाते हैं। आसान शब्दों में कहें- सेहतमंद और लंबी जिंदगी की गारंटी! तो हर रंग को अपनी थाली का हिस्सा
बनाओ- पीला, बैंगनी, नीला, हरा, नारंगी, लाल और जितना हो सके, उतना और।
ब्रेन फूड्स पर करें फोकस
यहां पर मछली बाजी मार ले जाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसमें मौजूद ओमेगा-3 जैसे जरूरी फैटी
एसिड्स। कई स्टडीज में ये साबित हुआ है कि ओमेगा-3 ना सिर्फ याददाश्त को मजबूत बनाता है बल्कि उम्र के साथ दिमागी कमजोरियां आने से भी बचाता है। अगर बात मछली की करें, तो सैल्मन बेहतरीन है क्योंकि इसमें ये फैटी एसिड्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। अपने डाइट में बस अखरोट और अलसी के बीज
शामिल कर लो, और तुम्हें ओमेगा-3 की कमी महसूस नहीं होगी।
चीनी कम करें
ज्यादा चीनी खाने से शरीर में सूजन बढ़ती है। यह मोटापे, डायबिटीज और अन्य बीमारियों के साथ-साथ झुर्रियों को भी बढ़ाता है। अगर आप अपनी त्वचा और सेहत का बेहतर तरीके से ख्याल रखना चाहते हैं, तो चीनी से दूरी बनाएं।
सफेद चीजों को कहें ‘ना’
इंद्रधनुष में सफेद रंग नहीं होता, और आपकी डाइट में भी सफेद चीजें ज्यादा नहीं होनी चाहिए! यहां ‘सफेद’ से मतलब है रिफाइंड चीजें जैसे- सफेद आटा, नमक, चीनी इत्यादि।
