Posted inआध्यात्म, लाइफस्टाइल

हां स्त्री अधिकारी है पिंडदान के अनुष्ठान की: Pitru Paksha

Pitru Paksha: हमें अपने पूर्वजों से उनके इस लोक से जाने के बाद उत्तराधिकार के रूप में कुछ न कुछ सम्पत्ति अवश्य प्राप्त होती है। जिसमे सबसे पहला है हमारा शरीर जो हमें अपने माता-पिता से मिला होता है, इसमें कन्या या पुत्र का कोई भेद नहीं होता। परन्तु सम्पत्ति प्राप्त करने के बाद क्या […]

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कनेर-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: “ए लड़की……चाय कितने की दी”?ये रौबदार शब्द सुनते ही सर झुकाये हुए चाय बना रही उस लड़की ने जैसे ही अपना चेहरा ऊपर उठाया …तो पाया काले पठानी सूट में एक युवा खड़ा था। चौड़ा माथा ,नीली आंखे, लम्बा क़द और पीठ पर बैगपैक लटकाये,।उसकी आवाज़ बड़ी सर्द थी ,लड़के का उसका मासूम […]

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बस भाभी ही काफ़ी हैं-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Story: जब एक चौदह साल की नववधू ने अपनी ससुराल में प्रवेश किया ,तो उसे मिलीं उसकी विवाहित बड़ी ननद मन्जु दीदी। उससे उम्र में थोड़ी सी बड़ी और दो बच्चों की माँ थी,पर हमेशा भाभी को ममता की छाँव देती रहीं।चूल्हे पर रोटी ख़ुद सेंकती और भाभी से बेलने को कह देतीं।भाभी की […]

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कर्तव्य की कीलें-गृहलक्ष्मी की कहानियां

आज फिर मेरे कदम पृथ्वीलोक की ओर बढ़चले थे,क्या करता? आख़िरकार मैं ईश्वर उसका सबसे अच्छा और सच्चा मित्र जो था। और वो थी मिट्टी के पुतले की कारा में बंद मेरी प्रिय आत्मा जो मुझ पर बहुत विश्वास करती थी,कई बरसों से उसकी पुकार सुनकर भी अनसुना कर देता था। वजह थे उसके कर्म […]

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राह चबेनी- गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahaniya: सुनो …..”लल्ला मदन! जो हमारे पेंशन के पैसे जमा हैं तुम्हारे पास उनसे ….इक्कीस किलो की खस्ता-कचौड़ी और उतने बूँदी के लड्डू बनाकर उनके चार-चार के पैकेट बनाकर जो सामने से मिले उसे देते जाना “।बचे उसे तुम रख लेना, सेवानिवृत्त शिक्षिका सावित्री देवी ने साधिकार कहामदन हलवाई एक छोटी सी दुकान का […]

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स्पून फीडिंग-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Courage Story: “मैं स्वर्णा हूँ…”पँचसितारा होटल जैसी सुविधाओं से युक्त हस्पताल के बिस्तर पर एकाकी लेटे हुए अपने कर्मों का ख़ुद से ही हिसाब कर रही हूँ।आज भी विवेक मेरे पति के शब्द मेरे कानों में प्रतिध्वनि बनकर गूँजते है,”तुम्हारे कर्म ही तुम्हें जीने नहीं देंगे”।मैं दर्दनिवारक दवाओं की सुरक्षा में होते हुए भी उनसे […]

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सबक सम्मान का-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Respect Story: “भई आजकल लड़कियाँ बहुत तेज आ रही हैं , हमें तो बिल्कुल सीधी सादी लड़की ही चाहिये”,रुचि को एक्सरे मशीन की तरह देख समोसा कुतरते हुए इमरतीदेवी ने कहा। “चिंता मत कीजिये हमारी बेटी बहुत ही सीधी सादी है,आपको शिकायत का कोई अवसर नहीं मिलेगा,”प्रतिउत्तर मे उसकी माँ ऊषाजी ने तपाक से कहा। […]

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एकता का बोझ-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Burden Story: अंकु देखो तो कौन आया है?आँगन से सोहित के आवाज़ लगाने पर अंकिता ने जैसे ही खिड़की से झाँका ,उसका मन और मुँह दोंनो बुरी तरह से कड़वे हो उठे।नीचे जो व्यक्ति  खड़ा था उसे देखकर ही मन का घाव टीस मारने लगा,वो अपने चेहरे पे छाए घृणा के भावों को संयत करने […]

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सनक-ए-वायरल-गृहलक्ष्मी की कहानी

Hindi Funny Story: हाय दईया…, पत्रिका की ओर से आये पार्सल को खोलते ही जोर की चीख के साथ धानी ‘खुदरंग यानी कि हमारी कहानी की नायिका बेहोश होकर गिर पड़ीं। कमरे के अंदर दफ्तर जाने को तैयार हो रहे उनके नाज-नखरे उठाने वाले कुछ महीनों के नए नवेले पति ने कोरियर वाले का फोन […]

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किश्तें-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Kishtey: आज विधि का फ़ोन आया या नहीं…. बेचैन रविशंकर जी ने पत्नी से सवाल किया?नहीँ जी …बड़ी लापरवाह होती जा रही है आपकी लाडली इन दिनों। काफ़ी दिनों से कम बात कर रही है पर आप लेट क्यों हो गए जी सुगन्धा ने उत्तर में सवाल दाग दिया? उसके लिए कार देख रहा था,दुबेजी का […]

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