Why deworming, hygiene and nutrition are important for children
Why deworming, hygiene and nutrition are important for children

Importance of Deworming: आज के समय में जब हम बच्चों की सेहत और इम्यूनिटी की बात करते हैं, तो अक्सर वैक्सीन और सप्लीमेंट्स पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, लेकिन मजबूत स्वास्थ्य की नींव कुछ सरल और रोज़मर्रा की आदतों पर टिकी होती है- जैसे नियमित डीवॉर्मिंग (कृमिनाशन), अच्छी स्वच्छता और संतुलित पोषण। ये तीनों मिलकर बच्चों की शारीरिक और मानसिक वृद्धि को बेहतर बनाते हैं और उन्हें संक्रमणों से बचाने में मदद करते हैं।

बच्चों में होने वाली आम समस्या डीवॉर्मिंग

Why deworming, hygiene, and nutrition are important for children.
Deworming is a common problem in children.

बच्चों में पेट के कीड़े एक आम लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली समस्या है। दूषित पानी, मिट्टी में खेलने, बिना हाथ धोए खाना खाने या अस्वच्छ वातावरण के कारण बच्चे आसानी से इस संक्रमण का शिकार हो सकते हैं। पेट में कीड़े होने से बच्चों में कमजोरी, भूख कम लगना, पेट दर्द, एनीमिया, पढ़ाई में ध्यान की कमी और शारीरिक विकास में रुकावट जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए डॉक्टर नियमित अंतराल पर डीवॉर्मिंग की सलाह देते हैं, ताकि शरीर से हानिकारक परजीवी बाहर निकल सकें और पोषण सही तरीके से अवशोषित हो सके।

स्वच्छता भी बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है। बच्चों को बचपन से ही हाथ धोने की सही आदत सिखाना, साफ पानी पीना, फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाना और साफ-सुथरे वातावरण में रहना संक्रमण के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है। खासकर बाहर खेलने के बाद या खाने से पहले साबुन से हाथ धोना बेहद जरूरी है।

पोषण बच्चों की सेहत का महत्वपूर्ण स्तंभ

Why deworming, hygiene, and nutrition are important for children.
Nutrition is an important pillar of children’s health

संतुलित आहार जिसमें प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और फाइबर शामिल हों, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। हरी सब्जियां, मौसमी फल, दालें, दूध, अंडे और साबुत अनाज बच्चों के दैनिक भोजन का हिस्सा होने चाहिए। जंक फूड और अत्यधिक शुगर से बचना भी जरूरी है, क्योंकि ये इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकते हैं।

आज के डिजिटल युग में बच्चों की जीवनशैली भी बदल रही है। स्क्रीन टाइम बढ़ने और शारीरिक गतिविधि कम होने से इम्यूनिटी पर असर पड़ सकता है। इसलिए बच्चों को नियमित खेल-कूद, पर्याप्त नींद और एक्टिव लाइफस्टाइल के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है।

अंत में, माता-पिता और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों में स्वस्थ आदतों को शुरू से ही विकसित करें। नियमित डीवॉर्मिंग, स्वच्छता और संतुलित पोषण अपनाकर हम न केवल बच्चों को बीमारियों से बचा सकते हैं, बल्कि उनके बेहतर विकास और उज्जवल भविष्य की नींव भी रख सकते हैं। यदि बच्चे में बार-बार पेट से जुड़ी समस्या, कमजोरी या विकास में कमी दिखे, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

(डॉ. चिराग टंडन, डायरेक्टर – इंटरनल मेडिसिन, शारदाकेयर-हेल्थसिटी)

Subscribe GL

वर्तमान में गृहलक्ष्मी पत्रिका में सब एडिटर और एंकर पत्रकारिता में 7 वर्ष का अनुभव. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी दैनिक अखबार में इंटर्न के तौर पर की. पंजाब केसरी की न्यूज़ वेबसाइट में बतौर न्यूज़ राइटर 5 सालों तक काम किया. किताबों की शौक़ीन...