Short Story in Hindi: ‘दादी जी’ सरला नाम है उनका। जैसा उनका नाम, वैसा ही सरल स्वभाव और हंसमुख हैं, मेरी दादी माँ। एक दिन मैं उनके साथ बैठा , तो बोलीं –
” चिंटू! जब तू छोटा था, तो बड़ा शरारती था।
पता है! तूने एक दिन क्या किया?
तुम्हारी मम्मी के और मेरे पैसे, मिल ही नहीं रहे थे। तू तोतली जबान से बोलता जा रहा था। हम ही नहीं समझ पा रहे थे।
“दादी -दादी ! पैतो दा पेल उदेगा”
” सुनो ना मम्मी ! पैतों दा पेल उदेगा।”
फिर तू अपनी दादी और मम्मी दोनों को हाथ पकड़ कर, घर के सुंदर से छोटे से बग़ीचे की ओर ले गया। जहाँ पर एक खाली गमला रखा हुआ था।
वहाँ पर भी गमले की ओर इशारा करते हुए बोलने लगा ,
“दादी- दादी! मम्मी- मम्मी!पैतो दा पेल लदेगा “
तब हम सास- बहू को , बड़ी तेज हँसी आई और हमें बात समझ में आ गई ।
कि इसने पैसों को गमले में छुपा दिया है और बोल रहा है ,
“पैसों का पेड़ उगेगा।”
दादी और चिंटू ये किस्सा सुनकर आपस में ही, जोर – जोर से हंसने लगे। तभी मम्मी जी जो रसोईघर से सब सुन रहीं थीं , वह भी आकर हमारे साथ हँसने लगीं।
