The burden of unspoken words
The burden of unspoken words

Hindi Motivational Story: ” सुबह का समय था , सूरज की लालिमा ने अपने दर्शन देना शुरू कर दिया था। पक्षियों ने भोजन की तलाश में अपनी उड़ान भरना शुरू कर दिया था। पूरे शहर में अब धीरे – धीरे जिंदगी की भागदौड़ शुरू हो चुकी थी सब कुछ अपनी दैनिक दिनचर्या के अनुसार चल रहा था। कुछ ऐसा नहीं था जिसे परिवर्तन की ओर संकेत चिन्ह के रूप में देख सकें कोई उत्साह या उमंग नहीं थी यह सिर्फ जीवन की एक भागदौड़ थी जिसकी कोई समाप्ति की सीमा नहीं थी “। अपनी कुर्सी पर बैठकर खिड़की की ओर देखते हुए मेज़ पर रखी हुई डायरी में यह सब लिख रहा विकास अचानक से रुक जाता है और बालकनी के दरवाजे को खोलकर बालकनी से चारों ओर देखने लगता है। कुछ बच्चे विद्यालय की ओर जा रहे थे और कुछ अपने दफ़्तर की ओर भाग रहे थे। चेहरे पर कोई खुशी नहीं थी सिर्फ एक ही भावना नज़र आ रही थी मजबूरी की भावना। उन्हें यह मालूम था ” शुक्रिया कहना ज़रूरी है ” मगर क्यों ? कुछ ” अनकहे शब्दों का बोझ ” लेकर सिर्फ भाग रहे थे। विकास सोचता है – ” क्या मानव का जीवन बस इतना ही होता है सुबह से रात सिर्फ काम और फिर हर रात इंतज़ार सुबह होने का करना है , क्या जीवन का कोई उद्देश्य है या फिर यह मजबूरी का अनुसरण करने वाला मात्र एक शरीर है ” ?

विकास अपने रोजमर्रा के जीवन में व्यस्त हो जाता है और अपने कमरे में किताबें पढ़ने लगता है वह कुछ कविताओं की किताबें पढ़ता है और फिर कुछ कविताओं को गुनगुनाकर कुछ दूसरी किताबों को पढ़ना शुरू कर देता है कुछ प्रेम आधारित और कुछ जीवन के महत्व को समझाने वाली किताबें उसे कुछ सोचने पर मजबूर कर देती हैं। विकास अपनी कलम उठाकर डायरी में कुछ शब्दों को लिखने लगता है वह लिखते हुए कहता है – ” कुछ शब्दों का महत्व बहुत अधिक होता है यह आपके जीवन को दिशा देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं “। विकास अपने घर से बाहर निकलकर पूरे शहर में घूमने लगता है और वह देखता है कि सभी एक – दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं मगर फिर भी एक – दुसरे को कभी भी शुक्रिया नहीं कहते हैं। कुछ शब्दों को बोलना है बस। उसने एक व्यक्ति से इस विषय पर चर्चा करने की कोशिश की मगर उसने स्पष्ट शब्दों में विकास से सवाल किया ” शुक्रिया कहना ज़रूरी है ” मुझे मालूम है मगर क्यों ” ? विकास कुछ भी नहीं बोल पाया इस सवाल का जवाब देने में वह असमर्थ रहा। इन ” अनकहे शब्दों का बोझ ” लेकर वह चुपचाप अपने घर लौट आया। 

अपने घर आकर विकास अपनी खिड़की से बाहर देखने लगता है और फिर स्वयं के लिए चाय और नाश्ता बनाने लगता है। चाय और नाश्ता बनाकर वह अपनी खाने की मेज़ पर बैठ जाता है और पहला निवाला और चाय का पहला स्पर्श करने के बाद वह स्वयं से सवाल करता है आखिर क्यों मुझे इस चाय और इस नाश्ते को शुक्रिया कहना है इन ” अनकहे शब्दों का बोझ ” बहुत भारी है। वह शाम का इंतज़ार करने लगता है और कुछ मनोवैज्ञानिक किताबों को पढ़ने लगता है धीरे – धीरे शाम होने लगती है और विकास के मन में उसके सवालों के जवाबों का मिलना शुरू हो जाता है। वह स्वयं से कहता है – ” शुक्रिया कहना ज़रूरी है ” मगर क्यों ” ? मुझे मालूम है इसका उत्तर क्या है “। वह अपनी कलम से कागज़ पर लिखता है – ” किसी को शुक्रिया कहकर हम सिर्फ उसके साथ ही नहीं बल्कि पूरी सभ्यता के प्रति अपनेपन का एहसास कराने लगते हैं जो उसकी आत्मा को स्पर्श करता है “। 

विकास सुबह होने का इंतजार करने लगता है और सोचता है अगर मैं ” शुक्रिया कहना ज़रूरी है ” इस विषय पर शोध करके इसे एक शोध पत्र के रूप में सभी के सामने आकर प्रस्तुत करता हूं फिर शायद इस सवाल का उत्तर सभी को आसानी से मिल जाएगा। विकास इस विषय पर शोध करना शुरू कर देता है वह बहुत सारी किताबें पढ़ना शुरू कर देता है और कुछ अपने जीवन के अनुभवों को शामिल करता है। विकास इस कार्य में प्रकृति द्वारा मानव को बताने की कोशिश को भी महत्व देता है। वह हर दिन पूरे शहर में घूमता है और इस विषय पर लोगों के साक्षात्कार लेना भी शुरू कर देता है। वह देखता है कि हर व्यक्ति के अनुभव समय और परिस्थिति के अनुसार इस विषय पर अलग हैं। कोई इसके पक्ष में और कोई इसके विपक्ष में मगर एक चीज जो सभी जगह सामान्य थी वह इसके अस्तित्व को स्वीकार करना है। इन ” अनकहे शब्दों का बोझ ” एक दिन अवश्य हर व्यक्ति को अपने मन से बाहर निकालना है। अब विकास का काम बहुत ही आसान हो गया था। 

कुछ दिनों की मेहनत और अपनी सही रणनीति से विकास ने एक शोध पत्र तैयार किया और इसे प्रकाशित भी किया। मगर उसने देखा कि उसके इस शोध पत्र को लेकर किसी की कोई रुचि नहीं है। वह निराश होने लगता है। मगर कुछ दिनों के बाद विकास को एक पत्र मिलता है जिसमें उसके शोध के बारे में लिखा होता है। आपके शोध पत्र के प्रकाशित होने पर आपको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आपके इस शोध पत्र को पढ़कर मुझे अपने सभी सवालों के जवाब प्राप्त हुए हैं। ” शुक्रिया कहना ज़रूरी है ” यह मुझे मालूम था मगर क्यों ? इस सवाल का उत्तर मुझे आपके इस शोध पत्र से प्राप्त हुआ है। कुछ ” अनकहे शब्दों का बोझ ” बहुत भारी होता है जो हमारे जीवन को आगे बढ़ने से रोक देता है। आपके इस सहयोग के लिए सदैव आपके आभारी रहेंगे। उसकी इस मेहनत ने अब सफलता का रूप धारण कर लिया था। विकास को इस विषय पर चर्चा और वक्तव्य के लिए विभिन्न मंचों पर आमंत्रण मिलना शुरू हो चुका था। विकास ने कुछ ” अनकहे शब्दों का बोझ ” हर व्यक्ति के मन से बाहर निकाल दिया था।