basil for skin
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Overview: सिर्फ खांसी-जुकाम नहीं पापों को भी हरती है तुलसी

तुलसी सिर्फ औषधि नहीं, बल्कि आस्था और पवित्रता का प्रतीक है। यह न केवल रोगों को मिटाती है बल्कि पापों और नकारात्मक ऊर्जा को भी दूर करती है।

Tulsi Benefits and Importance: तुलसी में औषधीय गुण होते हैं। लेकिन सनातन संस्कृति में तुलसी के पौधे को पवित्र और पूजन माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि, तुलसी में मां लक्ष्मी का वास होता है और इसकी नियमित पूजा से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। इसलिए हिंदू धर्म में तुलसी सिर्फ औषधि नहीं, बल्कि आस्था का भी प्रतीक है। आयुर्वेद में तुलसी को सर्व रोग निवारिणी कहा जाता है, क्योंकि तुलसी के पत्ते और डाली सर्दी, खांसी, जुकाम से लेकर कई रोगों को दूर करती है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार तुलसी का महत्व सिर्फ औषधीय नहीं बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत पवित्र है।

पुराणों में तुलसी को लक्ष्मी का स्वरूप बताया गया है। कार्तिक मास पर देवउठनी के बाद तुलसी विवाह परंपरा इसका प्रमाण है। कहा जाता है कि घर पर तुलसी का हरा-भरा पौधा होना शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक है। पद्म पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति प्रतिदिन तुलसी पूजन करता है, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।

तुलसी-दल-मात्रेण जलस्य चुलुकेन च।।
विकनिते स्वमात्मानं भक्तेभ्यो भक्तवत्सलः।।

इस श्लोक का अर्थ है कि, जो व्यक्ति भगवान विष्णु को तुलसीदल (तुलसी पत्ता) अर्पित करता है, उसे सभी यज्ञों के समान फल प्राप्त होता है।

खांसी-जुकाम ही नहीं पाप भी हरती है तुलसी

Tulsi Plant
Kitchen Ingredients For Plants Credit: Istock

खांसी, कफ और जुकाम के लिए जब हर तरह की दवा बेअसर हो जाए तो तुलसी असर दिखाती है। इसके लिए तुलसी को प्राचीन समय से ही रामबाण औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है और आज भी दादी-नानी और माताएं खांसी-जुकाम होने पर बच्चों तुलसी देती है। लेकिन तुलसी सिर्फ खांसी-जुकाम ही नहीं बल्कि पापों को भी हरती है। जिस तरह तुलसी के सेवन से खांसी-जुकाम दूर हो जाता है, उसी तरह तुलसी के संपर्क में आते ही मनुष्य के भीतर की समस्त नकारात्मकता भी दूर हो जाती है। इसलिए संत-महात्मा भी तुलसी को केवल पौधा नहीं, बल्कि ईश्वर का जीवंत स्वरूप मानते हैं।

नारद पुराण के अनुसार-

वर्जज्यं पर्युषितं पुष्पं
वर्जज्यं पर्युसितं फलं
न वर्जज्यं तुलसीपत्रं
न वर्जज्यं जाह्नवी-जलम्


भगवान की पूजा में पुराने फूल और फल को अस्वीकार कर देना चाहिए, लेकिन पुराने तुलसी के पत्ते और गंगाजल को कभी अस्वीकार नहीं करना चाहिए।

स्कंद पुराण के अनुसार-

Vastu Tips for Tulsi
Vastu Tips for Tulsi

कि किं करिष्यति संरुष्टो यमोऽपि सह किंकरैः
तुलसी दलेन देवेशः पूजितो येन दु:खहा।


यदि यमराज और उनके अनुयायी क्रोधित भी हो जाएं तो भी वे उस व्यक्ति को हानि नहीं पहुंचा सकते जो तुलसी के पत्तों से अपने भक्तों के संकटों का नाश करने वाले भगवान हरि की पूजा करता है।

अगस्त्य-संहिता के अनुसार-

न तस्य नरक क्लेशो
योर्कचयेत तुलसीदलैः
पापिष्टो वाप्य पापिष्टः
सत्यम् सत्यम् न संशयः

इसमें कोई संदेह नहीं कि यदि कोई मनुष्य, चाहे वह पापी हो या पुण्यात्मा, तुलसीदल से भगवान विष्णु की पूजा करता है , तो उसे नरक की यातनाएं नहीं भोगनी पड़ेंगी।

इन्हीं कारणों से तुलसी के हर पत्ते को भक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस पौधे को घर-आंगन में लगाना केवल हिंदू धर्म की परंपरा नहीं बल्कि ऐसा संस्कार है जो जीवन में शांति, समृद्धि और पवित्रता का मार्ग खोलती है।

मेरा नाम पलक सिंह है। मैं एक महिला पत्रकार हूं। मैं पिछले पांच सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैं लाइव इंडिया और सिर्फ न्यूज जैसे संस्थानों में लेखन का काम कर चुकी हूं और वर्तमान में गृहलक्ष्मी से जुड़ी हुई हूं। मुझे...