Summary: करवाचौथ: भारत के राज्यों में अलग-अलग परंपराएँ और जश्न
करवाचौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि पति की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए प्यार और समर्पण का त्योहार है। भारत के हर राज्य में इसे मनाने के अलग अंदाज़, रीति-रिवाज और रंगीन परंपराएँ इसे और खास बनाती हैं।
Karwa Chauth Celebration: करवाचौथ का दिन हर महिला के जीवन में एक खास अनुभव लेकर आता है। यह सिर्फ उपवास का त्योहार नहीं है, बल्कि पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए प्यार और समर्पण का प्रतीक है। भारत के हर राज्य में इसे मनाने के अलग अंदाज़, रीति-रिवाज और परंपराएँ हैं। कहीं महिलाएं गीत और लोककथाओं के साथ रातभर जागरण करती हैं, तो कहीं पारंपरिक करवे और मेलों की रौनक से दिन भर उत्सव का माहौल बनता है। हर जगह का अनुभव अपने आप में अनोखा है और यह त्योहार भारतीय संस्कृति की रंगीनी और विविधता का जीता-जागता उदाहरण है। इस साल 10 अक्टूबर को करवाचौथ देश भर में मनाया जाएगा।
उत्तर भारत में साड़ी, मेहंदी और चंद्र दर्शन

उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा की गलियों में करवाचौथ का दिन शुरुआत से ही रंगीन होता है। महिलाएँ लाल, पीली या हरा रंग की साड़ी पहनती हैं, हाथों में मेहंदी रचती हैं और पारंपरिक गहनों की झिलमिल उनके उत्साह को बढ़ाती है। दिनभर हल्का भोजन या सूखे मेवे ही खाए जाते हैं। शाम को चंद्रमा को देखकर पति की लंबी उम्र के लिए व्रत तोड़ा जाता है। यहाँ व्रत के साथ साथ दोस्त और पड़ोसी भी मिलकर गीत और कहानियां सुनते हैं, जिससे पूरा दिन आनंद और उत्साह से भर जाता है।
पंजाब में गीत के साथ जश्न और रातभर की जागरण

पंजाब में करवाचौथ का त्योहार गीतों और जागरण के साथ रंगीन बनता है। महिलाएँ अपने समूह में बैठकर लोकगीत गाती हैं और करवा चौथ की कथा सुनती हैं। रातभर जागने की परंपरा उन्हें सिर्फ धार्मिक भाव नहीं बल्कि आपसी दोस्ती और हंसी-खुशी का अनुभव भी देती है। कुछ परिवार इस अवसर पर विशेष मीठे पकवान बनाते हैं, जिन्हें व्रत तोड़ने के बाद बांटा जाता है।
महाराष्ट्र में खास है करवे की पूजा और मेलों की रौनक
महाराष्ट्र में इसे ‘करवात’ कहा जाता है। महिलाएं सिंदूर, चूड़ियों और पारंपरिक गहनों के साथ पूजा करती हैं। शहर और गांवों में करवे की सजावट और लोकनृत्यों की रौनक देखने लायक होती है। कुछ जगहों पर रातभर मेलों का आयोजन भी होता है। महिलाएं पारंपरिक गाने गाती हैं, नृत्य करती हैं और रंग-बिरंगे करवे और सजावट की झांकियों के साथ व्रत का आनंद दुगना कर देती हैं।
बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में फल, मेवे और कथा

बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में करवाचौथ में खासियत है व्रत के दौरान सुनाई जाने वाली कहानियाँ। महिलाएँ दिनभर विशेष फल और सूखे मेवे खाती हैं और रात को चंद्रमा दर्शन करके व्रत खोलती हैं। हर कहानी पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली का संदेश देती है। यहां व्रत के दौरान महिलाएँ आपस में अनुभव साझा करती हैं और कथा सुनते-सुनते रात का समय पूरी तरह बिताती हैं।
राजस्थान और गुजरात में पारंपरिक उत्सव
राजस्थान और गुजरात में महिलाएं समूह में मिलकर पारंपरिक लोकगीत गाती हैं और अपने रंग-बिरंगे पहनावे में झूमती हैं। करवाचौथ सिर्फ उपवास का दिन नहीं, बल्कि समाजिक मेलजोल और परंपरा का भी प्रतीक है। यहां की सजावट, गीत और पारंपरिक झांकियाँ त्योहार को यादगार बनाती हैं। महिलाएँ साथ बैठकर चंद्रमा का दर्शन करती हैं और अपने परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं।
करवाचौथ केवल उपवास का दिन नहीं है, यह महिलाओं की संस्कृति, परंपरा और अपने प्रियजन के लिए समर्पण का उत्सव है। भारत के हर राज्य में इसके अलग रंग, रीति-रिवाज, खाने-पीने और पहनावे के अंदाज़ इसे और भी खास बनाते हैं। उत्तर भारत की सजधज और भक्ति, पंजाब का गीत-संगीत और जागरण, महाराष्ट्र के मेलों और नृत्य, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की कथाएँ, राजस्थान और गुजरात की पारंपरिक झांकियां हर राज्य अपने आप में अलग अनुभव और जादू प्रस्तुत करता है।
