मां बनना ईश्वरीय वरदान है, इसका माखौल ना उड़ाए
Author Views: गृहलक्ष्मी के माध्यम से एक बात अपने देश की होने वाली मांओं से कहना चाहूंगी, वह दिन दूर नहीं जब मां के अंतिम संस्कार के वक्त बेटा सेल्फी लेकर पोस्ट करेगा और मां की आत्मा इस पर कर्राह उठेगी, क्योंकि मां बनना एक ईश्वरीय वरदान है, जहां से बालक के सभी सोलह संस्कारों की नींव पड़ती है।
सोचिए यदि इस नींव में ही मां बेहूदा विचारों की खरपतवार बो देंगी तो बालक क्या खाक विचारशील बनेगा। भले ही वह बालक मशीनी युग में प्रथम आए पर भावनाएं, संस्कार और विचार प्रदूषित ही पाओगे। जब अभिमन्यु अपनी मां के गर्भ में चक्रव्यूह की रचना सीख सकता है तो क्या आज बेहूदा रील बनाती मांओ का फूहड़ कपड़े पहनकर फोटोशूट कराना, गन्दे विचारों का प्रभाव शिशु के संस्कार और विचारों पर नहीं पड़ेगा? कहा जाता रहा है कि जब एक औरत मां बनती है
तो समस्त दैविय शक्तियां उस स्त्री और उसके बच्चे की रक्षा हेतु दृढ़ संकल्पित होती है। इसलिए मेरा अनुरोध है आज की मांओ से की कृपया अपने बच्चों में अच्छे संस्कारों की नींव गर्भावस्था से डाले। अच्छा सुनें, अच्छा देखें, अच्छा बोलें, तभी आप एक स्वस्थ विचारों वाले स्वस्थ बच्चे को जन्म दे पाएंगी। तब देखना फिर एक बार भारत वर्ष में उन मांओं की गुणगाथा सुनहरे अक्षरों में लिखी जाएगी, जिन्होंने गर्भावस्था से ही अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दिए।
रितु गुप्ता
खुर्जा-बुलंदशहर (उ.प्र.)
गृहलक्ष्मी से विशेष लगाव

गृहलक्ष्मी के लिए मेरे हृदय में एक भावनात्मक लगाव है, जिसके कारण मैं अपना और भी समय इस पत्रिका को देना चाहूंगी। साथ ही मैं कुछ विचार भी रखना चाहती हूं जिससे कि हमारी गृहलक्ष्मी सफलता के नये कीर्तिमान प्राप्त करे। जैसा कि आप जानते ही हैं कि मीडिया चतुर्थ स्तंभ है, समाज को विकसित बनाने में एक अतिमहत्वपूर्ण बिंदु है। समाज में ज्यादा से ज्यादा महत्वपूर्ण विचार
और मुद्दे गृहलक्ष्मी के माध्यम से पहुंचते हैं। जैसे गृहलक्ष्मी आफ द डे का स्तंभ है, वैसे ही ‘फैमिली आफ द वीक’ भी शुरू किया जा सकता है जिसमें अपने परिवार के चित्र के साथ उसके विषय में चंद लाइनें लिखकर भेजे जाएं और उनका महत्व क्या है भेजने वाले के लिए। इससे ये फायदा होगा कि और भी लोग ज्यादा से ज्यादा इसमें जुड़ते जाएंगे। दूसरा जैसे बच्चों या पतिदेव के जन्मदिन पर उनके लिए कुछ शब्द पिक के साथ भेजें। इससे परिवार के सभी सदस्यों को गृहलक्ष्मी के लिए विशेष लगाव होगा, स्वाभाविक है कि फालोवर बढ़ते जाएंगे। युवा वर्ग इसमें जुड़ते जाएंगे। मेरी
हार्दिक इच्छा है कि गृहलक्ष्मी के फालोवर मिलियन से भी ज्यादा हों। अन्य कोई विचार भी मैं अवश्य यहां प्रेषित करूंगी। एक तथ्य स्पष्ट है कि जितना अधिक लोगों में गृहलक्ष्मी जाएगी और भी सफलता के उच्चतम स्तर को प्राप्त करेगी। मेरी शुभकामनाएं हमेशा से अपनी गृहलक्ष्मी के
लिए है।
- डॉ. श्वेता श्रीवास्तव
मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश)
प्रकृति की रक्षा सर्वोपरि
गृहलक्ष्मी मेरी पसंदीदा पत्रिका में से एक है। हमने मई महीने में मदर्स डे फिर जून में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया। हमें अपनी मां के साथ धरती मां का भी ध्यान रखना होगा अन्यथा हमारी भविष्य की मांए भी सुरक्षित नहीं रहेंगी आज हम विकास के नाम पर विनाश कर रहे हैं। धरती मां की हरी भरी गोद उजाड़ रहे हैं। हाइवे, मॉल, बहुमंजिली इमारतें बना रहे हैं, सीमेंट रोड
बनाकर सड़क किनारे खड़े पेड़ों का दम घोंट रहे हैं। नदियों में शहर और कारखानों का कूड़ा कचरा डालते हैं। पूजन सामग्री यहां तक कि कपड़े भी वहीं छोड़ देते हैं मानो हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है, सब सरकार ही करेगी। हम सरकार को दोषी ठहरायेंगे पर हम नहीं सुधरेंगे। पर्यटन स्थल पर हम
कचरा करने से बाज नहीं आते। पहाड़ दरक रहे हैं, अतिवृष्टि अनावृष्टि हो रही है। भूकंप सुनामी ने सशक्त राष्ट्रों को भी सहमा दिया है। तेजी से कटते पेड़, घटते वन पक्षियों के उजड़ते आशियाने घटती हुई खेती की जमीन विनाश की ओर संकेत कर रही है। विलुप्त होती प्रजातियां पशु पक्षियों की जो पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं। ये ही नहीं रहे तो कोरोना जैसी महामारियों का
अंदेशा सदैव बना रहेगा।
आज हम भले ही महंगे मोबाइल लेकर इतराते फिरें परंतु हमें असली मानसिक शांति प्रकृति के सानिध्य में ही मिलती है। हमारा तन-मन भी स्वस्थ रहता है। हम कितनी भी भौतिक प्रगति कर लें, हमें जीवित रहने के लिए शुद्ध वायु, जल और भोजन की आवश्यकता होगी जो हमें प्रकृति
ही देगी। प्रकृति का संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है। हमें केवल पेड़ पौधे लगाने ही नहीं बल्कि उनका संरक्षण भी करना जरूरी है। यदि प्रकृति ही नहीं रही तो समस्त मानव जाति का नाश हो जाएगा।
प्रवीणा चिंचोलकर
नागपुर (महाराष्ट्र)
गृहलक्ष्मी एक संपूर्ण पत्रिका
गृहलक्ष्मी अगस्त में हार्मोनल बदलाव के साथ स्वास्थ्य संबंधी संपूर्ण उपयोगी एवं नवीन जानकारियां मिली। ‘लड्डू गोपाल की पूजा के लिए जान लें जरूरी बातें’ से बहुत
कुछ जानकारी मिली, इसके लिए धन्यवाद। ‘गृहलक्ष्मी श्रेष्ठ’ की दोनों कहानी बहुत ही सुंदर लगीं, ‘सॉरी’ कहानी जीवन की सच्चाई है। ‘सॉरी’ बोलने में हम पूरी जिंदगी निकाल देते हैं और कितने रिश्ते खराब कर देते हैं। सावन की पोशाकें, गहने सभी आकर्षनीय है। ‘जरा हट के’ से बहुत कुछ जानकारी मिली है, ‘विश्वास की तिजोरी में सेंध’ बहुत महत्वपूर्ण एवं हम लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी भी
दी। गृहलक्ष्मी एक संपूर्ण पत्रिका है इसकी पाठिका होने का मुझे गर्व है।
– मनिकना मुखर्जी
झांसी (उ.प्र.)
