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Night Shift Credit: Istock

Overview: नाइट शिफ्ट से कम हो रही है युवाओं की फर्टिलिटी, ऐसे करें सेक्स लाइफ को मैनेज

नाइट शिफ्ट में काम करने से सर्कैडियन रिदम बाधित होती है जिससे हॉर्मोन्‍स पर प्रभाव पड़ता है। ये कपल्‍स की सेक्‍स लाइफ को खराब कर सकती है।

Infertility Due To Night Shift: आज की तेज़-रफ़्तार दुनिया में पति-पत्‍नी दोनों को जॉब करना जरूरी हो गया है। इसी के चलते कई सेक्‍टर्स में नाइट शिफ्ट की मांग भी बढ़ गई है। यह लाइफस्‍टाइल स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता पर गहरा प्रभाव डाल रही है। कई अध्‍ययनों में भी इस बात की पुष्‍टी हुई है कि जब कोई नियमित रूप से नाइट  शिफ्ट में काम करता है तो उसे फर्टिलिटी से संबंधित समस्‍याएं हो सकती हैं। नाइट शिफ्ट और फर्टिलिटी में क्‍या संबंध है और कैसे सेक्‍स लाइफ को मैनेज किया जा सकता है, चलिए जानते हैं इसके बारे में।

नाइट शिफ्ट और फर्टिलिटी का संबंध

Infertility Due To Night Shift-नाइट शिफ्ट से बढ़ सकती हैं दूरियां
The relation between night shift and fertility

नाइट शिफ्ट का काम व्‍यक्ति की सर्कैडियन रिदम को बाधित करता है, जो शरीर की कई प्रक्रियाओं, विशेष रूप से फर्टिलिटी कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है। नाइट शिफ्ट में काम करने वाले पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन क्षमता कम हो सकती है। महिलाओं में, नाइट शिफ्ट के कारण मासिक धर्म में अनियमितता, गर्भपात का खतरा और गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है। सर्कैडियन रिदम में गड़बड़ी से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन प्रभावित होते हैं, जो ओव्यूलेशन और गर्भावस्था के लिए आवश्यक हैं। पुरुषों में इसकी वजह से शुक्राणु की गुणवत्ता, टेस्टोस्टेरोन स्तर और अन्य हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्‍या हो सकती है। सर्कैडियन रिदम में व्यवधान स्वस्थ शुक्राणु उत्पादन को बाधित करता है।

महिलाओं में नाइट शिफ्ट के प्रभाव

पीरियड्स में अनियमितता: लगातार नाइट शिफ्ट से अनियमित पीरियड और ओव्यूलेशन की कमी हो सकती है, जिससे गर्भधारण मुश्किल होता है। 

अंडाशय की कमी: सर्कैडियन गड़बड़ी और ऑक्सीडेटिव तनाव से अंडाशय के फॉलिकल्स तेजी से कम हो सकते हैं। 

बांझपन का खतरा: लंबे समय तक हार्मोनल असंतुलन और ओव्यूलेशन में रुकावट से बांझपन का जोखिम बढ़ता है। 

गर्भपात का खतरा: मेलाटोनिन उत्पादन में कमी से गर्भाशय का वातावरण प्रभावित हो सकता है, जिससे गर्भपात का खतरा बढ़ता है। 

एंडोमेट्रियोसिस और PCOS: नाइट शिफ्ट से एंडोमेट्रियोसिस और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) का जोखिम बढ़ सकता है।

पुरुषों में नाइफ शिफ्ट के प्रभाव

शुक्राणु की गुणवत्ता में कमी: लंबे समय तक नाइट शिफ्ट से शुक्राणु की संख्या, गतिशीलता और संरचना प्रभावित होती है। 

हार्मोनल असंतुलन: टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने से प्रजनन स्वास्थ्य प्रभावित होता है। 

DNA क्षति: सर्कैडियन गड़बड़ी से शुक्राणु में DNA विखंडन बढ़ सकता है, जो गर्भपात और आनुवंशिक असामान्यताओं का कारण बन सकता है।

प्रभाव को कम करने के उपाय

नाइट शिफ्ट से बढ़ सकती हैं दूरियां
Measures to reduce the impact

लाइफस्‍टाइल में बदलाव: छुट्टी के दिन भी नियमित नींद का समय बनाए रखें। ब्लैकआउट पर्दे और व्हाइट नॉइज़ मशीन नींद की गुणवत्ता बढ़ाते हैं। 

प्रकाश प्रबंधन: नाइट शिफ्ट के दौरान तेज प्रकाश और सोने से पहले नीली रोशनी से बचें। ब्लू लाइट ब्लॉकिंग चश्मे मददगार हो सकते हैं। 

स्वस्थ आहार: फल, सब्जियां, लीन प्रोटीन और साबुत अनाज से युक्त भोजन हार्मोनल संतुलन बनाए रखता है। 

नियमित व्यायाम: नियमित व्यायाम तनाव कम करता है और सर्कैडियन रिदम को समर्थन देता है। सोने से पहले भारी व्यायाम से बचें। 

तनाव प्रबंधन: योग, ध्यान और गहरी सांस लेने की तकनीकें कोर्टिसोल स्तर को कम करती हैं।

विराम और आराम: शिफ्ट के दौरान नियमित ब्रेक और छोटी झपकी थकान कम करती हैं। 

सामाजिक समर्थन: सहकर्मियों और प्रबंधन के बीच खुला संवाद कार्यस्थल को सहायक बनाता है।

सेक्‍स लाइफ को कैसे करें मैनेज

– नाइट शिफ्ट के दौरान आप दोपहर के समय अपनी सेक्‍स लाइफ का आनंद उठा सकते हैं।

– सेक्‍स के दौरान ऑफिस की बातों को पूरी तरह से नजरअंदाज करें।

– छुट्टी वाले दिन कपल्‍स एक-दूसरे के साथ क्‍वालिटी टाइम बिताएं।

– सेक्‍स के लिए जरूरी नहीं कि पुरुष आगे आएं, महिलाएं भी अपनी इच्‍छाएं व्‍यक्त कर सकती हैं।