Overview: महिलाओं में सेक्सुअल डिस्फंक्शन से बढ़ सकती हैं ये समस्याएं, न करें इग्नोर
महिलाओं में सेक्सुअल डिस्फंक्शन एक सामान्य समस्या है। लेकिन समय पर विशेषज्ञ की सलाह और जागरूकता से इस समस्या का समाधान संभव है।
Sexual Dysfunction in Women: महिलाओं में सेक्सुअल डिस्फंक्शन एक ऐसी समस्या है, जिसके बारे में खुलकर बात नहीं की जाती। पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या आम है, लेकिन महिलाओं में भी सेक्सुअल डिस्फंक्शन के कई रूप देखे जा सकते हैं। यह न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक और सामाजिक कारणों से भी हो सकता है। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो ये कई गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है। तो चलिए जानते हैं इसके कारण और जोखिमों के बारे में।
क्या है सेक्सुअल डिस्फंक्शन

सेक्सुअल डिस्फंक्शन एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को यौन गतिविधियों में भाग लेने, आनंद लेने या संतुष्टि प्राप्त करने में कठिनाई होती है। महिलाओं में यह समस्या पुरुषों की तुलना में कम चर्चा में आती है, लेकिन यह काफी आम है। यह शारीरिक, हार्मोनल, मनोवैज्ञानिक या सामाजिक कारकों के कारण हो सकती है। इसे नजरअंदाज करने के बजाय समय पर पहचान कर उपचार किया जाए तो इससे निजात मिल सकता है।
महिलाओं में सेक्सुअल डिस्फंक्शन के लक्षण
कम यौन इच्छा: यह सबसे आम समस्या है, जिसमें यौन संबंधों में रुचि की कमी या सेक्स न करने की इच्छा होती है।
यौन उत्तेजना में कमी: भले ही आप सेक्स करना चाहें, लेकिन उत्तेजना प्राप्त करना या उसे बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
ऑर्गेज्म में कठिनाई: पर्याप्त उत्तेजना के बावजूद ऑर्गेज्म तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है।
यौन संबंध के दौरान दर्द: सेक्स के दौरान दर्द, जिसे डिस्पैर्यूनिया कहते हैं, भी एक आम लक्षण है।
सेक्सुअल डिस्फंक्शन के कारण
शारीरिक कारण: कैंसर, डायबिटीज, हार्ट डिजीज, किडनी फेल्योर, मल्टीपल स्क्लेरोसिस या मूत्राशय की समस्याएं इस स्थिति को बढ़ा सकती हैं। कुछ दवाएं, जैसे डिप्रेशन, हाई ब्लड प्रेशर या कैंसर के इलाज की दवाएं, यौन इच्छा को कम कर सकती हैं या ऑर्गेज्म में बाधा डाल सकती हैं।
हार्मोनल बदलाव: मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से जननांगों में रक्त प्रवाह कम हो सकता है, जिससे उत्तेजना और ऑर्गेज्म में समय लगता है। योनि की परत पतली और कम लचीली हो जाती है, जिससे सेक्स दर्दनाक हो सकता है। प्रसव या स्तनपान के दौरान भी हार्मोनल बदलाव यौन इच्छा को प्रभावित करते हैं।
मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण: अनुपचारित चिंता, डिप्रेशन, लंबे समय तक तनाव, गर्भावस्था में समस्या, शिशु की देखभाल का दबाव, पार्टनर के साथ खराब रिश्ते, सांस्कृतिक या धार्मिक मुद्दे और बॉडी इमेज की समस्याएं भी सेक्सुअल डिस्फंक्शन को बढ़ा सकती हैं।
सेक्सुअल डिस्फंक्शन से हो सकता है ये जोखिम

– मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, जैसे डिप्रेशन या चिंता।
– हृदय रोग, डायबिटीज, कैंसर या न्यूरोलॉजिकल समस्याएं।
– गायनोकोलॉजिकल समस्याएं, जैसे संक्रमण।
– डिप्रेशन या हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं।
– रिश्तों में तनाव या यौन शोषण का इतिहास।
सेक्सुअल डिस्फंक्शन में उपचार के विकल्प
चिकित्सा उपचार: हार्मोन थेरेपी, दवाएं और लुब्रिकेंट्स योनि की शुष्कता और दर्द को कम कर सकते हैं।
थेरेपी: कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT), सेक्स थेरेपी और कपल्स काउंसलिंग मानसिक और भावनात्मक समस्याओं को हल करने में मदद करती हैं।
जीवनशैली में बदलाव: तनाव प्रबंधन, स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद यौन स्वास्थ्य को बेहतर बना सकती है।
पार्टनर के साथ संवाद: खुला संवाद रिश्तों में तनाव को कम करता है और यौन अनुभव को बेहतर बनाता है।
स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज: डायबिटीज, हृदय रोग या अन्य बीमारियों का प्रबंधन करना जरूरी है।
कैसे करें पहचान और बचाव
सेक्सुअल डिस्फंक्शन को पहचानने के लिए अपने शरीर और मन की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है। अगर आपको यौन संबंधों में रुचि की कमी, दर्द या उत्तेजना में परेशानी महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें। विशेषज्ञ से सलाह लें।नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं, खासकर हार्मोनल और गायनोकोलॉजिकल जांच जरूरी है।
