how much woman spend during periods
how much woman spend during periods

Overview:साइकिल सिंकिंग की मदद से आसानी से हार्मोनल समस्याओं को कम किया जा सकता है

महिलाओं को समय के साथ कई हार्मोनल बदलावों का सामना करना पड़ता है। लेकिन साइकिल सिंकिंग की मदद से इन हार्मोनल समस्याओं को कम किया जा सकता है।

Period Cycle Syncing: पीरियड का समय किसी भी महिला के लिए सिर्फ दर्दभरा नहीं होता है, बल्कि क्रैम्पस और ब्लीडिंग के साथ-साथ उनके शरीर में बहुत तेजी से हार्मोनल बदलाव भी होते हैं। ऐसे में उन्हें मूड स्विंग्स से लेकर थकान व क्रेविंग्स का सामना भी करना पड़ता है। अमूमन महिलाओं को यह लगता है कि पीरियड के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलावों का वह कुछ नहीं कर सकती हैं और इसलिए उन्हें सिर्फ एडजस्ट ही करना पड़ेगा। जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है। अगर आप चाहें तो इसे आसानी से मैनेज कर सकती हैं। बस आपको अपने शरीर में समय के साथ होने वाले इन हार्मोनल बदलावों को समझने की जरूरत है और उनके साथ थोड़ा एडजस्ट करने की जरूरत है।

जब आप अपने शरीर को बेहतर तरीके से समझती हैं तो उसे मैनेज करना भी उतना ही आसान हो जाता है। आप अपने पीरियड के चार फेज़ मसलन पीरियड्स, फॉलिक्युलर,ओव्यूलेशन और ल्यूटल के अनुसार अपनी डाइट, एक्सरसाइज़ व रूटीन को थोड़ा-थोड़ा एडजस्ट करें। जब आप साइकिल सिंकिंग करती हैं तो इससे शरीर एक नेचुरल रिदम के साथ चलता है, जिसकी वजह से पीरियड में होने वाले दर्द के साथ-साथ मूड व एनर्जी को भी बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। हालांकि, आज के समय में अधिकतर महिलाओं को साइकिल सिंकिंग के बारे में कुछ नहीं पता होता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको साइकिल सिंकिंग के बारे में विस्तारपूर्वक बता रहे हैं-

साइकिल सिंकिंग एक बेहद ही अलग तरह की अप्रोच है, जिसमें महिलाएं अपनी मेंस्ट्रुअल साइकिल के चारों फेज मसलन पीरियड्स, फॉलिक्युलर, ओव्यूलेशन और ल्यूटल को ध्यान में रखकर ना केवल अपनी डाइट प्लान करती हैं, बल्कि उसी के अनुसार एक्सरसाइज, वर्क और लाइफस्टाइल को भी एडजस्ट करती हैं। ऐसा करना काफी अच्छा माना जाता है, क्योंकि बदलते हार्मोन के साथ जब सिंक किया जाता है तो हार्मोनल फ्लक्चुएशन के दौरान बॉडी को सपोर्ट मिलता है। जिसकी वजह से पीसीओएस, थायराइड, हार्मोनल असंतुलन, इनफर्टिलिटी और पीएमएस को कंट्रोल करने में काफी मदद मिलती है।

महिलाओं की लाइफ को उनके मेंस्ट्रुअल साइकिल के आधार पर चार फेज में बांटा गया है- पीरियड्स, फॉलिक्युलर, ओव्यूलेशन और ल्यूटल। आइए इनके बारे में विस्तारपूर्वक जानने की कोशिश करते हैं

Period Cycle Syncing
Period Time

पीरियड टाइम अक्सर महिलाओं के लिए काफी मुश्किल माना जाता है, क्योंकि इस दौरान उन्हें लो एनर्जी, पेट दर्द, मूड स्विंग्स, क्रैम्प्स जैसी शिकायतें होती है। यह ऐसा समय होता है, जब एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन जैसे हार्मोन बहुत कम होते हैं और इस दौरान लगातार ब्लीडिंग हो रही होती है।

  • इस फेज में शरीर को आराम दें और गहरी नींद लें।
  • खुद को एक्टिव फील करवाने के लिए हल्का योग, वॉक या डीप ब्रीदिंग का सहारा लिया जा सकता है।
  • डाइट का खास ध्यान रखें और आयरन, फोलिक एसिड और गर्म चीजों को डाइट का हिस्सा बनाएं।
  • खजूर, गुड़, चुकंदर, पालक, हल्दी दूध, मूंग की खिचड़ी, दाल का सूप आदि को डाइट में शामिल करने से फायदा मिलेगा।
  • खुद को हाइड्रेटेड रखें।
Follicular Phase
Follicular Phase

पीरियड्स के बाद फॉलिक्युलर फेज शुरू होता है। इस दौरान शरीर की एनर्जी वापिस आती है और आप अधिक फोकस्ड महसूस करते हैं, क्योंकि एस्ट्रोजन धीरे-धीरे बढ़ रहा होता है। साथ ही साथ, नया एग डेवलप हो रहा होता है।  

  • चूंकि आप अधिक फोकस्ड हैं तो ऐसे में किसी नए प्रोजेक्ट को शुरू कर सकती हैं या फिर उसकी प्लानिंग की जा सकती है।
  • फॉलिक्युलर फेज में आप काफी एक्टिव फील करती हैं तो वर्कआउट में फुल बॉडी वर्कआउट, डांस, कार्डियो को किया जा सकता है।
  • इस दौरान आपकी डाइट प्रोटीन, फाइबर व एंटीऑक्सीडेंट्स रिच होनी चाहिए। कोशिश करें कि आप हरी सब्ज़ियां, मूंग, अंकुरित अनाज, फल, दही, छाछ, हर्बल ड्रिंक्स आदि का सेवन जरूर करें।
ovulation phase
ovulation phase

चूंकि इस दौरान एस्ट्रोजन सबसे ज्यादा होता है और बॉडी ओव्युलेट करती है, इसलिए एनर्जी सबसे ज्यादा हाई होती है। इस दौरान आप काफी अच्छा महसूस करती हैं और ऐसे में कुछ नया करना काफी अच्छा माना जाता है।

  • आप अच्छा महसूस करती हैं तो ऐसे में लोगों से मिलना व पब्लिक स्पीकिंग जैसी चीजें आपको और भी अच्छा महसूस करवाएंगी।
  • आप अधिक एक्टिव हैं तो ऐसे में आप स्ट्रेंथ ट्रेनिंग व आउटडोर एक्टिविटी कर सकती हैं।
  • डाइट में आप लाइट खाएं, जिससे आपकी एनर्जी बनी रहे। आप सलाद, फ्लैक्स सीड्स, कद्दू के बीज, नींबू पानी, नारियल पानी, पनीर, चिकपी व राजमा आदि को अपनी डाइट का हिस्सा बना सकती हैं।
luteal phase
luteal phase

ल्यूटल फेज पीरियड से पहले का वक्त होता है। जिस दौरान प्रोजेस्ट्रोन काफी हाई होता है। अमूमन इस दौरान प्रीमेंस्ट्रुअल लक्षण नजर आते हैं, इसलिए मूड स्विंग्स से लेकर थकान व क्रेविंग्स आदि का अहसास होता है। 

  • इस दौरान आपका शरीर थोड़ा आराम मांगता है, इसलिए रेस्ट को बिल्कुल भी नजरअंदाज ना करें। हालांकि, सॉफ्ट मूवमेंट्स भी बेहद जरूरी हैं।
  • एक्टिव रहने के लिए योगा, पिलाटे, स्ट्रेचिंग आदि का सहारा लिया जा सकता है।
  • अपनी डाइट में आप मैग्नीशियम, बी6 और ओमेगा-3 से भरपूर चीजों को शामिल करें। इस दौरान केले, बादाम, डार्क चॉकलेट, बीज, फिश आदि खाएं। अगर आपको मीठे की क्रेविंग हो रही है तो ऐसे में खजूर या गुड़ का सेवन किया जा सकता है।

मैं मिताली जैन, स्वतंत्र लेखिका हूं और मुझे 16 वर्षों से लेखन में सक्रिय हूं। मुझे डिजिटल मीडिया में 9 साल से अधिक का एक्सपीरियंस है। मैं हेल्थ,फिटनेस, ब्यूटी स्किन केयर, किचन, लाइफस्टाइल आदि विषयों पर लिखती हूं। मेरे लेख कई प्रतिष्ठित...