Summary: पीरियड्स लेट होने के कारण और समाधान: क्यों होता है मासिक धर्म अनियमित
पीरियड्स का लेट होना हमेशा प्रेग्नेंसी का संकेत नहीं होता, बल्कि यह हार्मोनल बदलाव, तनाव, वजन या हेल्थ कंडीशंस से जुड़ा हो सकता है। सही लाइफस्टाइल और समय पर जांच से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
Delayed Period Reason: हर महिला कभी न कभी अपने मासिक धर्म के लेट होने का अनुभव करती है। जब पीरियड समय पर नहीं आता, तो पहला सवाल अक्सर यही होता है “क्या मैं प्रेग्नेंट हूँ?” लेकिन अगर प्रेग्नेंसी की संभावना नहीं है, तब भी पीरियड लेट हो सकते हैं। इसे समझना जरूरी है क्योंकि अक्सर यह शरीर के हार्मोनल बदलाव या जीवनशैली से जुड़ा होता है।
असल में, पीरियड्स का लेट होना कोई असामान्य बात नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, 5% से 35% महिलाओं में कभी-कभार अनियमित पीरियड्स देखने को मिलते हैं। यह उम्र, करियर और जीवनशैली के हिसाब से बदल सकता है। खासकर जीवन के दो अहम चरणों में—पहली बार पीरियड शुरू होने पर और मेनोपॉज़ के समय—पीरियड्स का अनियमित होना सामान्य है।
तो क्यों होता है यह? आइए जानते हैं कुछ मुख्य कारण:
ज़्यादा व्यायाम
अथलीट या बहुत मेहनत करने वाली महिलाएं अक्सर पीरियड्स मिस कर देती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि तेज़ और लगातार एक्सरसाइज़ से शरीर में तनाव हार्मोन बढ़ जाते हैं। ये हार्मोन प्रजनन हार्मोन के संतुलन को प्रभावित करते हैं, जिससे पीरियड्स लेट या मिस हो सकते हैं। लंबे समय तक ऐसा होने पर हड्डियों की मजबूती पर असर भी पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि व्यायाम संतुलित और नियंत्रित हो।
मोटापा
ज्यादा वजन होने से शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन पीरियड साइकिल को प्रभावित करता है। कभी-कभी पीरियड्स पूरी तरह रुक जाते हैं या बहुत लेट हो जाते हैं। डॉक्टर अक्सर सलाह देते हैं कि संतुलित डाइट और नियमित व्यायाम के माध्यम से वजन को नियंत्रित किया जाए।

तनाव और चिंता
तनाव हमारे शरीर पर काफी असर डालता है। जब हम लंबे समय तक मानसिक या भावनात्मक दबाव में रहते हैं, तो हार्मोनल बदलाव होते हैं और पीरियड्स प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा, अचानक वजन बदलना या बीमारियों का असर भी पीरियड्स को लेट कर सकता है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर या काउंसलर से बात करना मददगार होता है।
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS)
PCOS आजकल युवतियों में काफी आम है। इसमें पीरियड्स लंबे समय तक लेट या पूरी तरह रुक सकते हैं। इसके साथ मुंहासे, शरीर पर अनचाहे बाल आना और कभी-कभी मोटापा भी देखा जाता है। PCOS हार्मोनल असंतुलन का संकेत देता है, और इसके लिए डॉक्टर से सही जांच और इलाज जरूरी है।
स्तनपान
अगर आप बच्चे को स्तनपान करा रही हैं, तो पीरियड्स का लेट होना सामान्य है। इसका कारण प्रोलैक्टिन हार्मोन है, जो दूध बनाने में मदद करता है। यही हार्मोन मासिक धर्म को रोकता है, इसलिए कई महिलाओं को स्तनपान के दौरान पीरियड्स नहीं आते।
थायरॉइड की समस्या
थायरॉइड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज़्म को नियंत्रित करती है। अगर इसमें असंतुलन हो जाए, तो हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं और पीरियड्स प्रभावित हो सकते हैं। थायरॉइड की समस्या का इलाज समय पर किया जाए तो पीरियड्स फिर नियमित हो सकते हैं।

हार्मोनल बर्थ कंट्रोल
हार्मोनल गर्भनिरोधक गोलियाँ या इंजेक्शन पीरियड्स के पैटर्न को बदल सकते हैं। कभी पीरियड जल्दी आ जाते हैं, कभी देर से और कभी बिल्कुल रुक जाते हैं। यह आमतौर पर चिंता की बात नहीं है, लेकिन लंबे समय तक बदलाव हो तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
कब डॉक्टर से सलाह लें?
यदि पीरियड्स लगातार 3-6 महीने से अधिक समय तक नहीं आ रहे हैं या बहुत अनियमित हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। थायरॉइड, PCOS, हार्मोनल इम्बैलेंस और अन्य कारणों की पहचान करके सही इलाज किया जा सकता है।
याद रखें कभी-कभी पीरियड्स का लेट होना सामान्य है और जीवनशैली में बदलाव, तनाव कम करना और संतुलित डाइट ही इसे ठीक कर सकता है। लेकिन अगर यह लगातार हो रहा है, तो इसे अनदेखा न करें। आपका शरीर संकेत दे रहा है कि कहीं न कहीं संतुलन बिगड़ रहा है।
पीरियड्स की अनियमितता से डरने की जरूरत नहीं, समझने और सही कदम उठाने की जरूरत है। आपका स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है।
