Hundred Dates
Hundred Dates

Hindi Love Story: फाल्गुन की आख़िरी सांसे दिन में भले ही बेचैनी और खीज लिए फिरती हों, लेकिन होलिका दहन के वक़्त घर वालों की आँखों में अँधेरा झोंक कर, चर्च ग्राउन्ड में एक घंटे के लिए मिलने की प्लॉनिंग हो, तो मन सावन हो उठता है।

उसके घर के बहुत पास ही है चर्च और क्रिश्चनों का मोहल्ला, जहाँ हमारी कम्यूनिटी के लोगों के ज़्यादा आने-जाने का कोई काम नहीं। कोई गुज़रता भी हो उधर से, तो चर्च का बड़ा ग्राउन्ड और कम रौशनी; आवाजाही वाले रस्ते से लगभग ओझल होकर, गाड़ी पार्किंग में लगी होने का भ्रम बनाने में मददगार है।

मेरी ही तरह, मेरी बार बैग से भी उसे मोहब्बत है। कम समय का ध्यान रखते हुए दो मार्टिनी ग्लास, साठ-साठ एम.एल.एबस्लूट वोदका के दो पैग, मिनेचर की बॉटल में डाल कर रख लिए थे मैंने। ब्लडी मैरी का प्री-मिक्स बनाकर उसे बर्फ के साथ हॉट एंड कोल्ड फ्लॉस्क में इश्क़ घुलने के इंतज़ार में छोड़ा हुआ था।

उसके घर के पीछे वाली गली से मैंने उसे लिया और तीन-चार मिनटों में ही हमारी कार तय जगह पर थी। पूर्णिमा की रात, गुलमोहर के नीचे। ड्राइविंग सीट से थोड़ा उठने की नीयत में,चुम्बन मिलाते हुए पिछली सीट से बैग उठाई। बामुश्किल दो मिनट ही लगे होंगे, हमारी ब्लडी मैरी को छतरी और नींबू के साथ डेस्क बोर्ड पर सजने में।

कॉक्टेल्स के लिए मेरी तल्लीनता देखना उसे भाता है, यह मैं समझ सकता था। गहरे लाल रंग का इश्क़, ख़ुश होते हुए मैंने उसकी ओर बढ़ाया और मुस्कान बिखेरते हुए उसने इस्तिक़बाल किया।

“चीयर्स।”

यूँ मैं जानता था, मैं एक नीम फ़ेमिनिस्ट चढ़े करेले नार्सिसिस्ट के साथ हूँ, पर मोहब्ब्त को इतनी अक्ल की बातें समझ कब आई हैं। पिछले बार के पलंगतोड़ इश्क़ के बाद यह हमारी पहली ही मुलाक़ात थी। मैं अपनी ही उम्दा दुनिया में खोया; कुछ वक़्त के लिए यह भूल गया कि, मुझे इस मोहब्बत में डूबने के लिए भी सम्भल कर कदम रखने होते हैं।

“हम हमेशा के लिए कब मिल रहे हैं?” मेरी इच्छा उसे अपना बना लेने की हमेशा रही थी।

“इस दुनिया में हमेशा के लिए कुछ नहीं होता जान।” उसने मुस्कुराते और एक घूँट भरते हुए कहा।

“होता है। लोग मिलते हैं; प्यार मिलता है और एक होते हैं।” मैं अबोध?

“हा…हा…हा…सुनो, एक बात कहूँ?”

“हाँ, क्यों नहीं।”अब मेरा सम्हलना किसी काम का नहीं था और मैं कुछ ऐसा सुनने के लिए ख़ुद को तैयार करने लगा, जिसके बाद दिमाग की नसों में दर्द पसर जाए।

“तुम भी दुनिया को जैसे की तैसी बने रहने देने की साज़िश के हिस्सेदार हो।”

“कुछ गलती हुई मुझसे?”

“नहीं। गलती हुई नहीं है, और ना मैं अपने साथ यह गलती होने दूंगी।”

“मतलब?” इतनी सरगरमी से तैयार की हुई ब्लडी मैरी की लज़्ज़त के बारे में कुछ भी बता पाने की क़ुव्वत मुझ में रह नहीं गई थी।

“मैंने पहले भी तुम्हें इस बात का जवाब दिया है, पर दुनिया की बदलाहट से तुम्हें घबराहट होती है। मैं नहीं हूँ तुम्हारी उस दुनिया का हिस्सा, जो लोगों के तानों के हिसाब से अपने पैर पसारती या समेटती है। अगर तुम्हें लगता हो, फ़िजिकली हमारे बीच जो हुआ उससे मेरे कुछ ख़्यालात बदल जाने वाले हैं, तो तुम गलत हो।”

थोड़ी देर के लिए वह रुकी, एक और घूँट भरते हुए उसने आगे कहा-“मैं तुम्हारे साथ इस रिलेशन में भावनाओं में बहकर या अनजाने नहीं आ गई। मुझे तुमसे प्यार है, और इतना कि शायद कभी अपने मम्मी-पापा से भी ना किया हो, लेकिन तुम समझो; किसी को मैं अपना रिमोट कंट्रोल नहीं बनाना चाहती।”

“क्या तुम्हें ऐसा लगता है कि, मैं तुम्हें अपने अकॉर्डिंग चलाना चाहता हूँ?” हालाँकि मुझे पता था कि, किन्हीं फ़रियादों और दलीलों की इस अदालत में सुनवाई नहीं।

उसने हँसते हुए कहा-“अपने नहीं, दुनिया के अकॉर्डिंग।”

अपना कुछ दिनों पहले का फ़ैसला मैंने याद किया। अफ़सोस कि, मैं उस पर कायम न रह सका।

“ठीक कहा तुमने। हम अभी की क्यों नहीं सोचते। देखो, चाँद कितना प्यारा है।” मैं एक झटके में उन वहमों से निकलकर कार से उतरा और उसके गेट की ओर पहुँचकर सिगरेट सुलगा ली। यूँ तो उसे सिगरेट के धुएँ और गंध से ज़्यादा कुछ नफ़रत नहीं, पर मोहब्ब्त भी नहीं।

आधा वक़्त हमारे पास अब भी बाकी था, पर मन अब व्यग्र हो चला था। शायद यह भी सोचने की कोशिश में था कि, मैं अकेले इस गुलमोहर और पूरे चाँद के साथ ज़्यादा वफ़ा कर पाता। आधे बचे वक़्त को किसी फ़िज़ूल सी बात के लिए गवाँ देने का ख़्याल हावी हुआ और सिगरेट फेंक कर कार की विंडो में अपना चेहरा घुसाते हुए, मुझे उसकी लिपिस्टिक पुत जाने की फ़िक्र करना ज़िंदगी से लबालब लगा।