Overview: शनि देव का स्त्री रूप धारण करने की कथा
क्या आपने कभी शनि देव को स्त्री स्वरूप में देखा है? यह सवाल सुनकर बहुत से लोग चौंक सकते हैं, लेकिन यह बिल्कुल सच है। गुजरात में भगवान हनुमान का एक विशेष मंदिर स्थित है, जहां शनि देव एक स्त्री रूप में भगवान हनुमान के चरणों में विराजमान हैं।
Shanidev Temple: हिंदू धर्म में शनि देव को न्याय के देवता और सबसे कठोर ग्रह माना जाता है। उनकी दृष्टि जिसे भी छू जाए, उसके जीवन में संघर्ष, बाधाएं और कष्टों का सैलाब आ सकता है। लेकिन अगर श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी पूजा की जाए, तो वे प्रसन्न होकर भक्तों के सारे कष्ट दूर भी कर देते हैं।
वैसे तो भारत में शनि देव के अनेक मंदिर हैं, पर क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा भी मंदिर है जहां शनि देव पुरुष रूप में नहीं, बल्कि स्त्री स्वरूप में विराजते हैं? यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से अनोखा है, बल्कि इसके पीछे की कथा भी अत्यंत रहस्यमयी और प्रेरणादायक है।
कहां स्थित है यह अनोखा मंदिर?
यह अद्भुत मंदिर गुजरात के भावनगर जिले के पास सारंगपुर गांव में स्थित है, जिसे कष्टभंजन हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर भगवान हनुमान जी को समर्पित है, और पूरे देशभर से भक्त यहां अपने जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति पाने के लिए आते हैं।
यह मंदिर अपनी भव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए विख्यात है। मंदिर परिसर में भगवान हनुमान जी सोने के सिंहासन पर विराजमान हैं और उनके चरणों में शनि देव नजर आते हैं — वह भी स्त्री रूप में। यह दृश्य अपने आप में अनूठा है और दुनिया में अन्यत्र कहीं देखने को नहीं मिलता।
शनि देव का स्त्री रूप धारण करने की कथा
इस मंदिर से जुड़ी एक पौराणिक मान्यता अत्यंत दिलचस्प है। कहा जाता है कि एक समय शनि देव का प्रकोप इतना बढ़ गया था कि जनसाधारण अत्यधिक परेशान हो गया। उनकी दृष्टि से बच पाना कठिन हो गया था और लोग निरंतर दुखों से घिरते जा रहे थे। ऐसे में भक्तों ने भगवान हनुमान से प्रार्थना की कि वे शनि देव के क्रोध से उनकी रक्षा करें।
हनुमान जी ने भक्तों की पुकार सुनकर यह निश्चय किया कि वे शनि देव को सबक सिखाएंगे। जब यह बात शनि देव को ज्ञात हुई, तो वे भयभीत हो उठे। उन्हें पता था कि हनुमान जी अपार शक्ति के स्वामी हैं और बाल ब्रह्मचारी भी। इस डर से शनि देव ने स्त्री रूप धारण कर लिया, क्योंकि यह माना जाता है कि हनुमान जी किसी स्त्री को कभी भी क्षति नहीं पहुंचाते।
हनुमान जी को शनिदेव ने दिया था ये वचन
स्त्री रूप धारण करके शनि देव हनुमान जी के चरणों में जाकर बैठ गए और क्षमा याचना की। उनकी विनम्रता और पश्चात्ताप से हनुमान जी प्रसन्न हुए और उन्हें क्षमा कर दिया। इसी क्षण शनि देव ने हनुमान जी को यह वचन दिया कि जो भी भक्त सच्चे मन से हनुमान जी की उपासना करेगा, उस पर शनि की कुदृष्टि नहीं पड़ेगी। यही कारण है कि इस मंदिर में न केवल हनुमान जी की, बल्कि शनि देव की भी पूजा की जाती है।
यहां मिलती हैं शनि दोष से मुक्ति
यह मंदिर उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है जिनकी कुंडली में शनि दोष होता है, या जो साढ़े साती या ढैय्या से परेशान होते हैं। यहां आकर पूजा करने से, विशेषकर शनिवार के दिन, व्यक्ति को मानसिक शांति, बाधाओं से मुक्ति और जीवन में नई ऊर्जा की अनुभूति होती है।
कहा जाता है कि इस मंदिर में दर्शन मात्र से ही शनि दोष कम होने लगता है। भक्त हनुमान जी के चरणों में बैठी शनि देवता को देख कर यह अनुभव करते हैं कि शक्ति और विनम्रता का संगम कैसे किसी के जीवन को बदल सकता है।
