Hindi Short Story: सरिता के मकान का मुहूर्त था। उसकी मित्र तरला बहुत खुश थी। उसका सालों का सपना पूरा हुआ, अपना घर बन गया। वैसे हम बोलचाल में भाषा की कई गलतियां करते हैं। जैसे बनता तो मकान है, मगर स्त्री उसे घर बना देती है। स्त्री के बिना घर-घर कहां रहता है…!
तरला जैसे ही घर पहुंची, बाहर ही सरिता मिल गई और उत्साह के साथ मकान दिखाने लगी साथ में उसका पति शिखर भी था। घर तीन मंजिला था और बहुत ही खूबसूरत था।लेकिन तरला को नेमप्लेट खटक रही थी और उसने शिखर के सामने ही सरिता से पूछ लिया- नेम प्लेट पर तुम्हारा नाम क्यों नहीं है सरिता…?
सरिता की निगाह नेमप्लेट की ओर उठ गई।पहाड़ चंद, शिखर चंद और पुत्र का नाम हिमालय, तीनों के नाम सुनहरे अक्षरों में चमक रहे थे।सरिता का मन थोड़ा सा उदास हो गया। पूर्व में यह बात घर में उठ चुकी थी और उनके घर में रिवाज नहीं था महिलाओं का नाम नेमप्लेट पर लिखवाना।
और तरला सोच रही थी- सरिता भले ही निकले पर्वत से पर उसका अपना वजूद है।
नेमप्लेट-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
