Narendra Kumar Verma
Narendra Kumar Verma

Editorial Review: बसंत पंचमी के साथ ऋतु परिवर्तन की सुगंध हर ओर फैलने लगती है। प्रकृति अपने सुनहरे परिधान में सजीव हो उठती है और ज्ञान की देवी मां सरस्वती के पूजन से विद्या, बुद्धि और संगीत की साधना आरंभ होती है। यह पर्व विद्याॢथयों और ज्ञान-साधकों के लिए विशेष महत्व रखता है लेकिन यह यह ऋतु केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। बदलते मौसम में शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए हल्दी, गिलोय, तुलसी और शहद जैसे प्राकृतिक तत्वों का सेवन करना आवश्यक है। साथ ही, योग और प्राणायाम से रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। साधनापथ का फरवरी अंक कुम्भ में लोगों की आस्था और विद्याॢथयों के लिए सरस्वती पूजा के महत्व पर आधारित है।

इस बार बसंत पंचमी के साथ महाकुंभ 2025 की तैयारियां भी जोर पकड़ रही हैं। यह 144 साल बाद आया है। प्रयागराज का महाकुंभ न केवल आध्यात्मिक चेतना का महासंगम है, बल्कि यह सनातन संस्कृति की गहराई को भी दर्शाता है। गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर आस्था की डुबकी लगाने से मनुष्य स्वयं को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध और नवजीवन से परिपूर्ण महसूस करता है। मान्यता है कि कुंभ में स्नान करने से जीवन के समस्त पाप कट जाते हैं और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। अंत में यदि आप कुम्भ में स्नान करने जा रहे हैं तो सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें और याद रखें कि आस्था का संबंध आत्मशुद्धि, अंत चिंतन और आत्म मंथन से भी है। इसलिए आप जहां हैं वहीं आस्था की एक डुबकी आप तक पहुंच जाएगी। स्वस्थ रहें और आशावादी बने रहें।
धन्यवाद।

आपका…
नरेन्द्र कुमार वर्मा
nk@dpb.in