kirayedar

Hindi Motivational Story: शाम को जब सब खाना खा चुके, तो बेटे ने पिता को दवाई देते हुए कहा, पिताजी आप डॉक्टर को रिपोर्ट दिखाने गए थे, उनका कहना है कि स्वास्थ्य में कुछ खास सुधार नहीं हो रहा। कहते हैं कि आपके लिए अब शहर की आबोहवा ठीक नहीं है, यहाँ प्रदूषण का लेवल बहुत बढ़ चुका है कि दमा पूरी तरह ठीक हो जाए कहना मुश्किल है।

पिता ने चुपचाप दवा निगली, फिर टूथपीक से दाँत कुरेदते हुए बोले, डॉक्टर ठीक कहता है साँस खींचो तो धुआँ सा भर जाता है फेफड़ों में…इसमें तो अच्छा भला आदमी बीमार पड़ जाए। बेटे ने उसी टेक पर बात आगे बढ़ाई, दो-चार साल में ही अच्छे-खासे तंदुरुस्त फेंफड़े जवाब दे जाए। सो तो है लेकिन उपाय भी क्या है, जब लोग शहर में ही रहना चाहें, हर आदमी को गाड़ी चाहिए, हरियाली से कोई वास्ता नहीं, तो फिर इसी में जीने की आदत डालनी होगी। बेटा कुछ देर चुप रहा। फिर बोला, आप क्यों नहीं कुछ दिन आबोहवा बदल कर देखते, हवा बदलेगी, मन बदलेगा क्या पता दवा से ज्यादा आबोहवा असर कर जाए? पिता को बात जचि। बेटे की इस फिक्र पर मुग्ध भी हुए। अगले दिन उन्होंने गाँव के लिए विदा ली। शाम को ही पिता वाले कमरे में कोई नया किराएदार आ गया। एक किरायेदार गया दूसरा आ गया।

ये कहानी ‘नए दौर की प्रेरक कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंNaye Dore ki Prerak Kahaniyan(नए दौर की प्रेरक कहानियाँ)