Petticoat Cancer
Petticoat Cancer Credit: Istock

Petticoat Cancer: भारत में अधिकांश महिलाएं साड़ी पहनना पसंद करती हैं। स्‍पेशल ओकेजन में ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं सिर्फ साड़ी ही पहनती हैं। माना कि साड़ी पहनना भारतीय परंपरा है लेकिन लंबे समय तक साड़ी पहनना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। जी हां, हाल ही में हुई एक रिसर्च के अनुसार साड़ी को सिक्‍योर रखने वाला पेटीकोट स्किन कैंसर का कारण बन रहा है। इस कैंसर को पेटीकोट कैंसर के नाम से ही जाना जाता है। एक्‍सपर्ट्स ने उन महिलाओं के लिए चिंता जताई है जो प्रतिदिन साड़ी पहनती हैं और पेटीकोट का टाइट नाड़ा बांधती हैं। पेटीकोट कैंसर क्‍यों होता है और इससे कैसे सुरक्षित रहा जा सकता है चलिए जानते हैं इसके बारे में।

क्‍यों होता है पे‍टीकोट कैंसर

Petticoat Cancer-पेटीकोट कैंसर के कारण
Why does petticoat cancer occur

पेटीकोट कैंसर जिसे मार्जोलिन के अल्‍सर के रूप में जाना जाता है। ये एक रेयर प्रकार का स्किन कैंसर है जो उन लोगों को प्रभावित करता है जो कमर के चारों ओर टाइट नाड़ा या इलास्टिक पहनते हैं। कमर पर टाइट नाड़ा बांधने से स्किन में घर्षण होता जिससे स्किन में दबाव, जलन, लालपन और अल्‍सर का कारण बन सकता है। इसके परिणामस्‍वरूप स्‍व्‍कैमस सेल कार्सिनोमा में विकसित हो सकती है। ये कैंसर पुराने घाव, पैर में अल्‍सर, तपेदिक, टीकाकरण और सांप के काटने से भी हो सकता है।

पेटीकोट कैंसर के संभावित लक्षण

ये एक प्रकार का स्किन कैंसर है जो नए और पुराने घावों या निशानों से भी विकसित हो सकता है। पेटीकोट कैंसर के लक्षण स्‍टेज के अनुसार शरीर को प्रभावित करते हैं।

प्रारंभिक लक्षण: पेटीकोट कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद मुश्किल हो सकता है। इसमें पुराने घाव या चोट के निशान में लालपन, खुजली, रंग या बनावट में परिवर्तन और उभरी हुई गांठ महसूस हो सकती है।

एडवांस लक्षण: कैंसर की स्‍टेज बढ़ने के साथ इसके लक्षणों में भी बदलाव होता है। घाव या चोट से बदबूदार स्‍त्राव निकलना, घुमावदार किनारे, अल्‍सर का ठीक न होना और रक्‍तस्‍त्राव होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

पेटीकोट कैंसर से कैसे करें बचाव

पेटीकोट कैंसर के कारण
How to prevent petticoat cancer

– पेटीकोट कैंसर से बचने के लिए ढीले कपड़ों का चुनाव करें। यदि नियमित रूप से साड़ी पहनते हैं तो पेटीकोट का नाड़ा ढीला बांधे ताकि स्किन में घर्षण पैदा न हो।

– यदि आपको पहले से कोई चोट या घाव है तो उसका सही ट्रीटमेंट करवाए। चोट को बढ़ने न दें।

– घाव से यदि स्‍त्राव होने लगे तो तुरंत चिकित्‍सक की मदद लें।

– जरूरत पड़ने पर घाव या अल्‍सर की स्‍क्रीनिंग करवाएं।

– जहां तक हो सके स्किन फ्रेंडली कपड़ों का चयन करें। सिंथेटिक की बजाय कॉटन और लिनेन फैब्रिक का चुनाव करें।

पेटीकोट कैंसर का सही ट्रीटमेंट

पेटीकोट कैंसर का ट्रीटमेंट अन्‍य कैंसर कि तरह ही किया जाता है। इसका इलाज मल्‍टी डिसीप्लिनरी एप्रोच का उपयोग करके किया जाता है। पेटीकोट कैंसर के शुरूआती दिनों में ही यदि सर्जरी करके सेल्‍स को हटा दिया जाता है तो कैंसर को बढ़ने से रोका जा सकता है। इसके अलावा कीमोथैरेपी करके सेल्‍स को जलाया जाता है। हालांकि भारत में अभी इस कैंसर के कुछ केस ही सामने आए हैं लेकिन पहले से सुरक्षात्‍मक कदम उठाए जाएं तो इससे बचाव किया जा सकता है।