Phishing Links: जयपुर निवासी राहुल बजाज एक सफल बिजनेस मैन था। एक दिन उसे अपने बैंक से एक ईमेल आया। ईमेल में कहा गया था कि उसकी अकाउंट में कोई संदिग्ध गतिविधि पाई गई है और उसे अपनी जानकारी अपडेट करनी चाहिए। यह सब सही लगता था, क्योंकि वह अक्सर अपनी बैंक डिटेल्स चेक करता था। उसने बिना सोचे-समझे उस ईमेल में दिए गए लिंक पर क्लिक किया। अगले ही पल, उसकी स्क्रीन पर एक पॉप-अप आया, जिसमें उसे अपनी बैंक डिटेल्स डालने को कहा गया। राहुल ने तुरंत अपनी जानकारी भरी, क्योंकि वह सोच रहा था कि यह तो बैंक की आधिकारिक वेबसाइट है। कुछ ही घंटों बाद, राहुल के अकाउंट से हजारों रुपये गायब हो गए। उसे यह समझने में देर नहीं लगी कि यह पूरी तरह से एक धोखाधड़ी थी, जिसे ‘फिशिंग लिंक’ कहते हैं।
यह कहानी राहुल की नहीं, बल्कि हम सभी की हो सकती है। फिशिंग लिंक के जरिए हमारी निजी जानकारी चुराने की कोशिश लगातार हो रही है। यह धोखाधड़ी अब और भी सुलभ हो चुकी है, और साइबर अपराधी बहुत चतुर हो गए हैं। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि फिशिंग लिंक होते क्या हैं, इन्हें कैसे पहचाने, और इससे बचने के उपाय क्या हैं, ताकि हम अपनी जानकारी की सुरक्षा कर सकें और ऐसी गलतियों से बच सकें।
फिशिंग लिंक क्या होते हैं?
फिशिंग लिंक वह खतरनाक URLs होते हैं जो देखने में बिल्कुल असली वेबसाइट्स जैसे लगते हैं, लेकिन ये दरअसल एक धोखाधड़ी के जाल होते हैं, जो साइबर अपराधी तैयार करते हैं। ये लिंक आमतौर पर ईमेल, इंस्टेंट मैसेजेज़, और सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स के जरिए भेजे जाते हैं, ताकि लोगों को धोखा देकर वे इन पर क्लिक करें और अपनी निजी जानकारी दे बैठें।
फिशिंग लिंक कैसे भेजे जाते हैं?
ईमेल
सबसे आम तरीका है। ठग एक ईमेल भेजते हैं जो किसी प्रतिष्ठित संस्था या कंपनी के नाम पर होता है। इस ईमेल में अकाउंट अपडेट करने का आग्रह किया जाता है और एक लिंक दिया जाता है जो असल में एक धोखाधड़ी साइट पर ले जाता है।
SMS
यह SMS के जरिए किया जाता है, जिसमें संदिग्ध लिंक होते हैं, जो भरोसेमंद संस्थाओं से जुड़े होते हैं।
सोशल मीडिया
साइबर अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर भी धोखाधड़ी लिंक फैलाते हैं, जो दोस्ती के अनुरोध, संदेश, या रोमांचक लेखों के रूप में होते हैं।
इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लिकेशन
व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे एप्लिकेशन के माध्यम से भी ये लिंक भेजे जाते हैं।
क्या होता है जब आप फिशिंग लिंक पर क्लिक करते हैं?
मैलवेयर का इंस्टॉल होना
कभी-कभी, फिशिंग लिंक पर क्लिक करने से आपका सिस्टम मालवेयर से संक्रमित हो सकता है, जो आपकी व्यक्तिगत जानकारी चुरा सकता है या आपके सिस्टम को पूरी तरह से कंट्रोल कर सकता है।
क्रेडेंशियल्स की चोरी
ये लिंक अक्सर ऐसे फर्जी वेबसाइट्स पर ले जाते हैं, जो आपकी लॉगिन जानकारी चुराने के लिए डिज़ाइन की जाती हैं।
ब्राउज़र की कमजोरियों का लाभ उठाना
फिशिंग लिंक कभी-कभी आपकी ब्राउज़र की कमजोरियों को निशाना बनाते हैं और सुरक्षा खामियों का फायदा उठाते हैं।
IP एड्रेस की जानकारी का खुलासा
जब आप फिशिंग लिंक पर क्लिक करते हैं, तो आपके आईपी एड्रेस की जानकारी भी चुराई जा सकती है, जिससे आपका स्थान और अन्य संवेदनशील जानकारी उजागर हो सकती है।
मैलिशियस OAuth एप्लिकेशन की अनुमति
फिशिंग लिंक, OAuth (Open Authentication) एप्लिकेशन के लिए अनुमति प्राप्त कर सकते हैं, जिनसे आपके खाते तक पहुंच प्राप्त की जा सकती है।
फिशिंग लिंक को कैसे पहचानें?
URL के कंपोनेंट्स को समझें
URL के हर भाग को अच्छे से जांचें। क्या उसमें कोई अशुद्धियां हैं? क्या उसमें कोई अतिरिक्त शब्द या गलत स्पेलिंग है?
डोमेन नाम की प्रमाणिकता की जांच करें
डोमेन नाम को ध्यान से देखें। क्या वह असली वेबसाइट से मेल खाता है? अगर संदेह हो, तो सर्च इंजन का उपयोग करके उस वेबसाइट की सही पहचान करें।
शॉर्टन URLs से सावधान रहें
URL को छोटा किया जा सकता है, लेकिन उसे एक्सपैंड करने के लिए टूल्स का इस्तेमाल करें, ताकि आप पूरी लिंक देख सकें।
फिशिंग लिंक पर क्लिक करने पर क्या करें?
इंटरनेट से तुरंत डिस्कनेक्ट करें: Wi-Fi बंद करें या मोबाइल को एयरप्लेन मोड में डालें।
अगर आपने क्रेडेंशियल्स डाले: अपने पासवर्ड तुरंत बदलें, और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्षम करें।
अगर आपने कोई फ़ाइल डाउनलोड की हो: फाइल को डिलीट करें और एंटीवायरस स्कैन चलाएं।
यदि पैसे से संबंधित धोखाधड़ी हो: अपने बैंक से तुरंत संपर्क करें और अपने कार्ड बदलवाएं।
अगर आपको पहचान की चोरी का शक हो: क्रेडिट रिपोर्ट पर फ्रीज़ लगवाएं और साइबर अपराध अधिकारियों से संपर्क करें।
इंटरनेट पर सुरक्षित रहने के लिए, हमें लगातार जागरूक रहना होगा और फिशिंग लिंक जैसे धोखाधड़ी के तरीकों से बचने के उपाय जानने होंगे। हमेशा सतर्क रहें, सही वेबसाइट का पता लगाएं और कभी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
