Morning Astrology: कहते हैं कि दिन की शुरुआत जैसी होगी आपका पूरा दिन भी वैसा ही बीतेगा। इसलिए शास्त्रों में ऐसी बातें बताई गई हैं, जिससे दिन की शुरुआत सकारात्मकता के साथ हो और आपका दिन भी सकारात्मक व्यतीत हो। इसलिए ऋषि-मुनियों के समय से ही ऐसी परंपरा रही है कि सुबह उठकर सबसे पहले अपनी हथेलियों को देखा जाए। शास्त्रों में हथेली दर्शन को बहुत ही शुभ और सकारात्मक माना जाता है। लेकिन इसके विपरीत आजकल लोग सुबह उठते ही सबसे पहले मोबाइल दर्शन करते हैं। आंख खुलते ही तकिए के नीचे या साइड टेबल पर रखे मोबाइल को उठाकर लोग अपडेट्स चेक करते हैं। वहीं कुछ लोग तो सुबह आंख खुलने के बाद पहले आधा-एक घंटा मोबाइल पर बिताते हैं उसके बाद अन्य काम करते हैं।

यदि आप भी ऐसा करते हैं तो यह आदत जितनी जल्दी हो सकते छोड़ दें। क्योंकि यह आपके आंख और दिमाग दोनों के लिए नुकसानदायक तो है ही। इसके साथ ही इससे दिन की शुरुआत में बाधा उत्पन्न होती है और दिनभर किए कार्यों में असफलता हासिल होती है और पूरा दिन तनाव से भरा रहता है। इसलिए शास्त्रों में दिन की शुरुआत हथेलियों को देखकर करने की बात कही गई है। आइये जानते हैं हथेली दर्शन के क्या लाभ हैं।
हथेली दर्शन के लाभ

प्राचीन समय से ही हथेली दर्शन की परंपरा रही है। आज भी कई घरों में बड़े-बुजुर्ग सुबह उठकर सबसे पहले अपनी हथेलियों को देखते हैं और इसके बाद दिन की शुरुआत करते हैं। इसके पीछे ऐसी मान्यता है कि हम अपने हाथों से सभी काम (कर्म) करते हैं। कर्म से हमारे हथेली पर भाग्य बनता है, जिससे हमें सफलता मिलता है। इसलिए हथेली दर्शन की परंपरा बनाई गई है।
विष्ण, लक्ष्मी और सरस्वती का मिलता है आशीर्वाद
सुबह उठकर हथेली दर्शन करने से भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और देवी सरस्वती का आशीर्वाद मिलता है। क्योंकि विष्णु जी पुरुषार्थ के प्रतीक हैं, मां लक्ष्मी धन-वैभव की प्रतीक हैं और देवी सरस्वती ज्ञान की प्रतीक हैं। ज्ञान का प्रयोग करते हुए हम पुरुषार्थ (काम) करते हैं, जिससे हमें धन की प्राप्ति होती है। इस तरह से व्यक्ति सुबह उठकर जब अपने हथेलियों को देखते हुए विष्णु, लक्ष्मी और सरस्वती का ध्यान करता है तब वह धनवान और ज्ञानवान बनता है।
हथेली दर्शन की विधि
सुबह उठकर बिस्तर पर बैठे-बैठे ही अपनी दोनों हथेलियों को आपस में जोड़ें और फिर आंखे बंद करके करदर्शन मंत्र पढ़ें। मंत्र पढ़ने के बाद दोनों हथेलियों को रगड़े और भी चेहरे पर हथेली को लगाएं।
कर दर्शन मंत्र:- “कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती, करमूले तु गोविंदः प्रभाते करदर्शनम्”
अर्थ है:- कर यानी हमारी हथेलियों के आगे वाले भाग पर मां लक्ष्मी वास करती हैं। करमध्ये यानी हथेली के बीच में देवी सरस्वती का वास है और करमूले यानी हथेली के मूल वाले भाग में विष्णुजी वास करते हैं। वहीं प्रभाते करदर्शनम् का मतलब है सुबह हथेलियों को देख कर हम लक्ष्मी, सरस्वती और विष्णु को प्रणाम करते हैं।
