Nagging Children Effect
Nagging Children Effect Credit: Istock

Nagging Children Effect: आज के समय में एक अच्‍छा पेरेंट्स बनना आसान नहीं है। खासकर टीनेजर्स की नजर में अच्‍छे पेरेंट्स बनना किसी बोर्ड एग्‍जाम को पास  करने से कम नहीं होता। इस उम्र में बच्‍चे के शारीरिक और मानसिक विकास के अलावा भावनात्‍मक विकास में भी काफी बदलाव आते हैं। कई बार बच्‍चों की सोच और व्‍यवहार पेरेंट्स को पूरी तरह से अलग और वियर्ड लग सकती है। ऐसी स्थिति में बच्‍चों को टोकना या सही रास्‍ता दिखाना पेरेंट्स की जिम्‍मेदारी होती है। लेकिन बच्‍चे को हर बात पर टोकना और डांटना सही नहीं है। इस उम्र में बच्‍चे पेरेंट्स को दोस्‍त कम अपना दुश्‍मन अधिक मानते हैं क्‍योंकि पेरेंट्स उन्‍हें खुलकर जीने की आजादी नहीं देते। पेरेंट्स का जरूरत से ज्‍यादा टो‍कना उन्‍हें जिद्दी और इंट्रोवर्ट बना सकता है। कई बार बच्‍चे पेरेंट्स की बातों को इतनी गंभीरता से ले लेते हैं जिसका प्रभाव‍ उनकी मानसिकता पर पड़ने लगता है। पेरेंटिंग को मुश्किल न बनाते हुए जरूरी है कि पेरेंट्स बच्‍चों के दोस्‍त बनें और समझदारी से काम लें। साथ ही इन टिप्‍स को फॉलो करें।

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दबाव न बनाएं

बच्‍चों से बनाएं दोस्‍ताना व्‍यवहार
don’t apply pressure

टीनेज में बच्‍चे खुद को प्रूफ करने की कोशिश में लगे रहते हैं इसलिए वह अपने फैसलों और कामों को ही सही मानते हैं। ऐसी स्थिति में पेरेंट्स का टोकना उन्‍हें दबाव लगता है। जिसके चलते वह तनावग्रस्‍त और उदासी का अनुभव करते हैं। कई बार बच्‍चे पेरेंट्स से दूरी भी बना लेते हैं। इसलिए जरूरी है कि पेरेंट्स पहले बच्‍चे के फैसले का सम्‍मान करें और उन्‍हें सही-गलत के बारे में बताएं। उनपर दबाव न डालें।

खुलकर करें बात

टीनेज में बच्‍चे पेरेंट्स से खुलकर बात करने में कतराते हैं। वह अपनी समस्‍याएं तब तक पेरेंट्स के सामने नहीं रखते जब तक वह किसी मुसीबत में न फंस जाएं। वह पेरेंट्स से ज्‍यादा दोस्‍तों के करीब महसूस करते हैं। यदि पेरेंट्स चाहते हैं कि बच्‍चा उनसे हर बात शेयर करे, कुछ न छुपाए तो आपको उनका दोस्‍त बनकर खुलकर बात करना सीखना होगा। जब बच्‍चा अपनी परेशानी बताए तो उसे डांटने की बजाये शांति और धैर्य से उसकी बात सुनें। साथ ही उसे अहसास दिलाएं कि आप उससे सबसे ज्‍यादा प्‍यार करते हैं।

बच्‍चों के बनें दोस्‍त

बच्‍चों से बनाएं दोस्‍ताना व्‍यवहार
Become a friend of children

आपने देखा होगा कि बच्‍चे कई बार गुस्‍से में कह देते हैं कि आप नहीं समझेंगे। इसका मतलब है कि बच्‍चे आपको सिर्फ पेरेंट्स मानते हैं दोस्‍त नहीं। वह आपसे कुछ प्रतिशत बात ही शेयर करते हैं पूरी नहीं। इसलिए बच्‍चों के करीब रहने के लिए उनका दोस्‍त बनना बेहद जरूरी है। दोस्‍ती का व्‍यवहार आपके रिश्‍ते को अधिक मजबूत और गहरा कर सकता है। यदि आप बच्‍चों के दोस्‍त बनकर रहेंगे तो बच्‍चे को तनाव, एंग्‍जाइटी और मानसिक प्रेशर से भी दूर रखने में मदद मिलेगी।

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बच्‍चे को दें आजादी

बच्‍चा घरवालों से तब बातें छुपाता है या जबाव देता है जब वह खुद को कैद और बंधा हुआ महसूस करता है। बच्‍चे के साथ अपने रिश्‍ते को हेल्‍दी बनाए रखने के लिए जरूरी है कि आप उन्‍हें जीने की आजादी दें। उन्‍हें अपने लिए खुद फैसला लेने दें। वह जो करना चाहते हैं उन्‍हें करने दें। बार-बार उनकी गलतियों के लिए न टोकें। बच्‍चे गलती करके ही सीखते हैं। जब बच्‍चा आजाद महसूस करेगा तब हो सकता है कि वह आपसे खुलकर बात कर पाए।