एक दयालु प्रवृत्ति का राजा रोजाना मंदिर जाता था और लौटते हुए रास्ते में मिलने वाले जरूरतमंदों की यथासंभव सहायता करता था। एक चतुर भिखारी ने सोचा कि उसे फसाकर उससे अच्छा-खासा धन ऐंठा जा सकता है। वह उसके पास आया और बोला कि क्या आप इस बात से सहमत हैं
कि इस पृथ्वी पर जितने मनुष्य हैं, सब भाई-भाई हैं। राजा ने कहा कि बिल्कुल सही बात है। इस पर वह बोला कि फिर तो आप इस बात से भी सहमत होंगे कि मैं भी आपका भाई हूँ। राजा ने कहा कि हां, तुम भी मेरे भाई हो। भिखारी बोला कि मुझे भाई होने के नाते, आपकी सारी संपत्ति में से अपना हिस्सा चाहिए।
राजा ने उसका चेहरा देखा और एक पैसे का सिक्का निकालकर उसे दे दिया और बोला कि यह लो, तुम्हारा हिस्सा भिखारी ने पूछा कि सिर्फ एक पैसा? इस पर राजा बोला कि इस पृथ्वी पर जितने मनुष्य हैं, सभी मेरे भाई हैं। इस लिहाज से तुम्हारे हिस्से में इससे ज्यादा नहीं आ सकता। भिखारी अपना सा मुंह लेकर वहाँ से चला गया।
सार- किसी की दयालुता का अनुचित लाभ नहीं उठाना चाहिए।
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