Sawan 2024 Special: भारतीय दर्शन में, भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं माना गया है, बल्कि इसे मन, शरीर और आत्मा को प्रभावित करने वाले तत्व के रूप में देखा गया है। आयुर्वेद और योग जैसे प्राचीन ज्ञान के अनुसार भोजन को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा गया है: तामसिक, राजसिक और सात्विक। ये तीनों गुण प्रकृति के मूल गुणों – तम, राज और सत्त्व से जुड़े हैं। तामसिक भोजन भारी, सुस्ती पैदा करने वाला होता है, जबकि राजसिक भोजन उत्तेजक और जोशीला होता है। दूसरी ओर, सात्विक भोजन शुद्ध, हल्का और पौष्टिक होता है। इन भोजन श्रेणियों को समझने से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए जागरूक खान-पान का चुनाव कर सकता है। आइए अब इन भोजन प्रकारों के बारे में विस्तार से जानते हैं और उनके हमारे जीवन पर प्रभाव को समझते हैं।
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तामसिक भोजन

तामसिक भोजन, आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से, वह है जो मन और शरीर को जड़ता, आलस्य और निष्क्रियता की ओर ले जाता है। यह भोजन प्रकार अंधकारमय, भारी और पाचन के लिए कठिन होता है। इसका सेवन करने से व्यक्ति में उदासीनता, आलस्य और नकारात्मक विचारों की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। तामसिक भोजन की प्रकृति ऐसी होती है कि यह शरीर में विषाक्त पदार्थों के संचय को बढ़ावा देता है, जिससे पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा, तामसिक भोजन का अधिक सेवन मन को कुंठित और अस्थिर बना सकता है, जिससे ध्यान केंद्रित करने और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
तामसिक भोजन में बासी या पुराना खाना, अत्यधिक तले हुए, मसालेदार, और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ शामिल हैं। मांस, मछली, अंडे, शराब, नशीले पदार्थ, और अधिकांश जंक फूड भी तामसिक श्रेणी में आते हैं। इन खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने से शरीर में सुस्ती, आलस्य और नकारात्मक विचारों की वृद्धि हो सकती है।
राजसिक भोजन

राजसिक भोजन, जिसे “रज” गुण से युक्त माना जाता है, वे खाद्य पदार्थ हैं जो शरीर और मन में ऊर्जा, उत्साह और गतिशीलता लाते हैं। यह भोजन स्वादिष्ट, उत्तेजक और तीव्र होता है, जो आपको तुरंत ऊर्जावान महसूस करा सकता है। राजसिक भोजन में अक्सर तीखे, खट्टे, नमकीन और मसालेदार स्वाद होते हैं जो इंद्रियों को उत्तेजित करते हैं। यह भोजन अक्सर गर्म या तला हुआ होता है, जो शरीर में गर्मी और ऊर्जा पैदा करता है। राजसिक भोजन ऊर्जा का एक त्वरित स्रोत प्रदान करता है, जो थकान को दूर करने और एकाग्रता बढ़ाने में मददगार हो सकता है। यह भोजन मन को उत्तेजित कर सकता है, जिससे विचारों की गति और रचनात्मकता में वृद्धि होती है।
राजसिक भोजन, तीव्र स्वाद, गर्म तापमान, और उत्तेजक गुणों वाला होता है। इसमें मसालेदार व्यंजन, चाय, कॉफी, चॉकलेट, तले हुए खाद्य पदार्थ, नमकीन स्नैक्स आदि शामिल हैं। ये भोजन शरीर और मन को सक्रिय बनाते हैं, लेकिन अधिक मात्रा में सेवन करने पर चिंता, अनिद्रा, और पाचन समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए, राजसिक भोजन का संतुलित सेवन महत्वपूर्ण है।
सात्विक भोजन

सात्विक भोजन, जिसे “सत्व” गुण से युक्त माना जाता है, वह आहार है जो शरीर और मन को शुद्धता, शांति और मानसिक स्पष्टता प्रदान करता है। यह भोजन ताजा, हल्का और पचने में आसान होता है, जो आपको तरोताजा और ऊर्जावान महसूस कराता है। सात्विक भोजन में प्राकृतिक और ताजे खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं, जो प्रकृति से सीधे प्राप्त किए जाते हैं। यह भोजन विटामिन, खनिज, और फाइबर से भरपूर होता है जो शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए आवश्यक होते हैं। सात्विक भोजन हल्का और पचने में आसान होता है, जिससे यह पाचन तंत्र पर बोझ नहीं डालता है। यह भोजन मन को शांत और एकाग्र रखने में मदद करता है।
सात्विक आहार में ताजे फल, जैसे सेब, केला, संतरा, आम, पपीता, खरबूजे, बेरी आदि शामिल हैं। इसके अलावा, ताजी सब्जियां जैसे पालक, गाजर, सेलरी, आलू, ब्रोकली, शलगम, मटर, फूलगोभी आदि सात्विक श्रेणी में आती हैं। अनाज और दालें, जैसे ब्राउन राइस, क्विनोआ, ज्वार, बाजरा, मूंग, मसूर, चना आदि भी सात्विक भोजन के प्रमुख घटक हैं। दूध, दही, छाछ, पनीर (देशी) और घी जैसे दुग्ध उत्पाद, साथ ही सूखे मेवे, बीज और प्राकृतिक शहद भी सात्विक आहार में शामिल किए जाते हैं।
