Mahashivratri 2025
Mahashivratri 2025

Sawan Special 2024: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का प्रमुख समय होता है। इस दौरान भक्तगण शिवजी की पूजा-अर्चना करते हैं और उन्हें उनके प्रिय चीजों का भोग अर्पित करते हैं। शिवजी की पूजा के साथ-साथ भोग तैयार करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखनी चाहिए ताकि पूजा विधि पूर्वक और सही तरीके से सम्पन्न हो सके। यहां उन चीजों का विस्तार से बताया गया है जिनका उपयोग भोग बनाते समय नहीं करना चाहिए।

Also read: इन स्वादिष्ट भोगों से भगवान शिव को करें प्रसन्न,पूरी होगी हर मनोकामना: Sawan 2024

भोग बनाते समय इन चीजों का उपयोग न करें

नमक का उपयोग न करें: व्रत के दौरान और शिवजी के भोग में साधारण नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, सेंधा नमक (लौह नमक) का उपयोग किया जाता है। सेंधा नमक विशेष रूप से व्रत के लिए अनुमोदित होता है क्योंकि यह अधिक शुद्ध और प्राकृतिक होता है। यह नमक भू-रसायनिक प्रक्रियाओं के बिना तैयार किया जाता है और इसमें कोई अतिरिक्त रसायन या आयोडीन नहीं होता है।

भोग बनाते समय लहसुन और प्याज का उपयोग न करें। व्रत और पूजा के दौरान इन दोनों सामग्री को अशुद्ध माना जाता है। यह दोनों सामग्री तामसिक मानी जाती हैं और धार्मिक नियमों के अनुसार इनका प्रयोग व्रत के दौरान वर्जित है। लहसुन और प्याज के स्थान पर आप अदरक, हींग, और हल्दी जैसे सात्विक विकल्प का उपयोग कर सकते हैं। ये सामग्री न केवल भोग को स्वादिष्ट बनाती हैं बल्कि व्रत के दौरान धार्मिक और पवित्र मानती जाती हैं।

भोग तैयार करते समय किसी भी प्रकार के मांसाहार, अंडे, और तामसिक भोजन का प्रयोग न करें। तामसिक भोजन को धार्मिक दृष्टिकोण से अशुद्ध माना जाता है और इसे व्रत तथा पूजा के दौरान वर्जित माना जाता है। व्रत के दौरान और भगवान शिव के भोग में हमेशा सात्विक और शुद्ध भोजन का उपयोग करें। सात्विक भोजन में प्राकृतिक और पवित्र सामग्री का प्रयोग होता है, जो न केवल शरीर के लिए लाभकारी होता है बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी उपयुक्त होता है।

बैंगन और कटहल को तामसिक माने जाने की वजह से व्रत और पूजा के दौरान इनका उपयोग नहीं किया जाता है। इसके बजाय, हरी सब्जियों का चयन करना उचित रहता है। हरी सब्जियाँ जैसे लौकी, पत्तागोभी, पालक, और मट्ठा व्रत के दौरान और भोग में शामिल की जा सकती हैं।

व्रत के दौरान कच्चे अनाज का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसके स्थान पर आप साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, राजगिरा, और सामा के चावल जैसे विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं। ये विकल्प व्रत के नियमों के अनुसार उपयुक्त होते हैं और आपके भोग को शुद्ध और सात्विक बनाए रखते हैं।

भोग में अधिक तीखे और गरम मसालों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, आप हल्दी, हींग और अन्य साधारण मसालों का ही उपयोग करें। ये मसाले न केवल भोग को स्वादिष्ट बनाते हैं, बल्कि व्रत के दौरान भी उपयुक्त और पवित्र होते हैं।

पूजा और भोग बनाने के लिए ताम्बे और लोहे के बर्तनों का उपयोग नहीं करना चाहिए। इनकी जगह कांसे, स्टील या मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करें। कांसे और मिट्टी के बर्तन धार्मिक मान्यता के अनुसार शुभ माने जाते हैं और पूजा की पवित्रता को बनाए रखते हैं।

भोग में किसी भी प्रकार के खाद्य रंग और एसेंस का प्रयोग न करें। इसके बजाय, प्राकृतिक और शुद्ध सामग्री का ही उपयोग करें। ये सामग्री न केवल भोग को अधिक सात्विक और पवित्र बनाती हैं, बल्कि धार्मिक मान्यता के अनुसार भी उपयुक्त होती हैं।

मैं आयुषी जैन हूं, एक अनुभवी कंटेंट राइटर, जिसने बीते 6 वर्षों में मीडिया इंडस्ट्री के हर पहलू को करीब से जाना और लिखा है। मैंने एम.ए. इन एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर्स किया है, और तभी से मेरी कलम ने वेब स्टोरीज़, ब्रांड...