बेटा बेटी एक समान ये बात बच्चों को भी समझाएं
रंगों के आधार पर लड़के लड़कियों में भेदभाव करना बहुत अजीब सी बात है। जब हम बड़े यही सोच रखेंगे तो हमारे बच्चे भी इस सच मानते चले जाएंगे।
Parenting Tips: गुलाबी रंग लड़कियों के लिए और नीला रंग लड़कों के लिए। ऐसा कहते आपने ना जाने कितने ही लोगों को सुना होगा। क्या आप भी ऐसा ही विचार रखते हैं। क्या हम कभी खुद इस तर्क की वजह समझ पाए हैं। रंगों के आधार पर लड़के लड़कियों में भेदभाव करना बहुत अजीब सी बात है। जब हम बड़े यही सोच रखेंगे तो हमारे बच्चे भी इस सच मानते चले जाएंगे। शायद आपको लग सकता है ये बहुत छोटी सी बात है, लेकिन क्या आप जानते हैं बच्चों के मन पे इस भेदभाव का कितना नकारात्मक असर पड़ता है।
आइये जानते हैं जब आपका बच्चा ये बात दोहराने लगे तो उसे किस तरह से समझाया जाए।
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घर से करें शुरुआत

अगर आप का बच्चा लगातार कहता है पिंक लड़कियों के लिए होता है और ब्लू लड़कों के लिए। ऐसे में उसे डांटने और सख्ती दिखाने की जगह प्यार से समझाएं। बच्चे को बार बार समझाने की जगह उसके सामने उदहारण पेश करें। अपने परिवार के सदस्यों से बात करें। घर के सभी लोग दोनों रंग पहनें, इस तरह बच्चा समझेगा कोई रंग किसी ख़ास के लिए नहीं है। बच्चे पर घर के लोगों का असर सबसे ज्यादा होता है इसलिए उसके लिए सकारात्मक उदाहरण पेश करें।
दोस्ती बनी रहे

कई बार ऐसा होता है लोग अपने छोटे छोटे बच्चों से कहते हैं, लड़के लड़कों के साथ खेलें और लडकियां लड़कियों के साथ। इस तरह की सोच रखना बिलकुल ठीक नहीं है। बच्चे के मन पर बहुत गलत असर होता है। इस तरह बच्चा एक दायरे में बंध जाता है। बड़ा होने पर वो अपने आस पास रहने वाले विपरीत जेंडर वाले इंसान के लिए असहज महसूस करने लगता है। अपने बच्चे को हर किसी के साथ जुड़ने के लिए कहें बस इतना ख्याल रखें की सामने वाले के साथ रह कर आपका बच्चा कुछ गलत आदत न सीखे।
खेल खेल में

जेंडर के हिसाब से हम बच्चों को रंगो, इंसानों, खेल, पढाई, नौकरी सब चीज़ों में भेदभाव करना सिखाते हैं। कभी कहते हैं ये रंग लड़कियों का है ये लड़कों का। इंसान के रंग रूप, शरीर की बनावट से हम उनके साथ अलग तरह का व्यवहार करना सिखाते हैं। कुछ ख़ास खेलों के लिए कह देना ये लड़कों का खेल है ये लड़कियों का खेल है। लडकियां नाजुक होती है लड़के मजबूत होते हैं। नौकरी के लिए भी लोग बच्चों को समझाते हैं तुम लड़की हो तुम्हे बड़े हो कर लड़कियों वाली नौकरी करनी है, लड़कों वाली नौकरी नहीं करनी है। या लड़कों से कह देना की तुम लड़कियों वाले काम मत करो।
इन बातों का भी रखें ख्याल
लड़कों को बचपन से ही घर के काम करना सिखाएं।
लड़कियों को बाहर के काम में भी दिलचस्पी लेना सिखाएं।
बच्चों के साथ एक जैसा व्यवहार करें।
कमजोर मजबूत नाजुक डरपोक जैसा तमगा ना दें।
बच्चों को घुलमिल कर रहना सिखाएं।

अकेले रहने कि जगह साथ रहने कि अहमियत सिखाएं।
लड़कियों कि तरह मत रोना, इस तरह कि बेकार बात ना सिखाएं।
भावानएं सबकी होती है, सबका सम्मान करना सिखाएं।
अपने बच्चे को सबके साथ घुलमिल कर रहने के लिए कहें, और उनके सामने ऐसा ही व्यवहार करें।
