Muskan
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Hindi Story: स्कूल से आते ही मुस्कान अपना स्कूल बैग एक तरफ रख रोज की तरह मां के गले से लिपट गई। इससे पहले की मां उसके लिए खाना तैयार करती, मुस्कान ने मम्मी से पूछा कि यह सैक्स क्या होता है? बच्ची के मुंह से यह अल्फाज सुनते ही मानों मुस्कान की मां के पैरो तले की जमीन खिसक गई हो।

आज उसे फिर से मुस्कान के पापा की इस जिद्द पर अफसोस होने लगा कि उन्होंने अपनी बेटी को सहशिक्षा (co education) स्कूल में क्यूं पढ़ने भेजा? आज यदि हमारी मुस्कान केवल लड़कियों के स्कूल में पढ़ रही होती तो शायद यह दिन देखने को न मिलता। खुद को थोड़ा संभालते हुए उसने अपनी बेटी से कहा कि पहले तुम खाना खा लो, इस विषय में बाद में बात करेंगे। खाना खत्म होते ही उत्सुकतावश मुस्कान ने अपना सवाल मां के सामने रख कर फिर से परेशानी खड़ी कर दी। किसी तरह समझा-बुझा कर मुस्कान की मां ने शाम तक का समय निकाला। जैसे ही मुस्कान के पापा घर लौटे तो बिना चाय-पानी पूछे अपना सारा दुःखड़ा एक ही सांस में उन्हें कह डाला। मुस्कान के पापा ने धीरज से काम लेते हुए बेटी से पूछा कि तुम्हें यह सब कुछ किसने बताया है? मुस्कान ने झट से अपने स्कूल बैग से एक फॉर्म निकाल कर अपने पापा की ओर बढ़ाते हुए कहा कि मैडम ने यह भरने के लिये कहा था।

मैंने बाकी का सारा फॉर्म तो भर लिया है, लेकिन एक पंक्ति में सैक्स के बारे में कुछ लिखना है। पिता ने जब ध्यान से फार्म देखा तो हंसते हुए उसे अपनी पत्नी की ओर बढ़ाया तो उसमें सैक्स के नाम पर केवल स्त्री या पुरुष के बारे में जानकारी मांगी गई थी। मुस्कान के पापा ने पत्नी की ओर हंस कर देखते हुए कहा कि खोदा पहाड़ निकली चुहिया। दोनों ने एक-दूसरे की तरफ ऐसे देखा जैसे किसी बड़ी मुसीबत से राहत मिल गई हो।

मुस्कान की मम्मी ने चाय के कप के साथ ही घर में आया हुआ एक पत्र भी पति को थमा दिया। यह पत्र सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से लेखक महोदय के नाम था। इस पत्र में शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा सैक्स शिक्षा की जानकारी से जुड़े हर प्रकार के ज्ञान को नई पीढ़ी तक कैसे पहुंचाया जाये, इसके बारे में एक लेख लिखने का अनुरोध किया गया था। लेख पसंद आने पर अच्छी रकम का वादा भी किया गया था। एक लेखक होने के नाते मुस्कान के पिता का जीवन भी उस दीपक की तरह था जो खुद अंधेरे में रहते हुए दूसरों को रोशन करता रहता है। यह भी अपनी कलम के माध्यम से समाज को उजाला तो दे रहे थे, लेकिन खुद अपना जीवन बहुत ही बुरे हाल में गुजार रहे थे। ऐसे में अच्छी रकम का वादा सुनते ही उन्हें अपने कई अधूरे ख्वाब पूरे होते दिखने लगे। बिना पल भर की देरी किये उन्होंने इस विषय पर अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाने शुरू कर दिये। मुस्कान के पापा लेखक की हैसियत से इस बात पर गहराई से विचार करने लगे कि यह जानते हुए भी कि इंसान के सबसे बड़े पांच दुश्मन काम, क्रोध, लोभ, मोह एवं अहंकार है। परंतु फिर भी हमारे यहां आम आदमी से लेकर ज्ञानी, विद्वान तक सबसे पहले नंबर पर खड़े इंसानियत के दुश्मन काम यानी सैक्स के बारे में बात करने से क्यूं कतराते हैं? आज आजादी के 60 बरस बाद हम दुनिया के साथ नये जमाने की नई राह पर चलने का दम तो भरते हैं, मगर हम अभी तक यह क्यूं नहीं तय कर पा रहे कि बाकी सभी विषयों की तरह इस विषय की जानकारी भी जीवन का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। हम पढ़े-लिखे होने के बावजूद इस बात को क्यूं भूल जाते हैं कि शिक्षा एवं ज्ञान चाहे किसी भी विषय से जुड़े हो उसका एकमात्र सबसे बड़ा लक्ष्य समाज को आत्मनिर्भर बनाना ही होता है।

इसी बात को मद्देनजर रखते हुए मुस्कान के पापा ने अपनी कलम के माध्यम से सैक्स शिक्षा से जुड़े हर पहलू को तराशना शुरू किया तो उन्होंने पाया कि सैक्स का जाल तो हमारे चारों ओर फैला हुआ है। समाचार पत्रों से लेकर टेलीविजन सिनेमा और इंटरनेट पर इसकी भरमार है। जैसे ही कलम ने सैक्स शिक्षा पर लिखना शुरू किया तो सबसे पहले उन छोटी बच्चियों का ख्याल मन को सताने लगा जो अज्ञानता के चलते नादानी से कच्ची उम्र में ही गर्भवती हो जाती है। ऐसे बच्चों के बारे में सोच कर और भी घबराहट होने लगी जो अपने मां-बाप की इकलौती संतान होते हुए भी कई लाइलाज बीमारी के शिकार बन जाते हैं। सारी दुनिया को ज्ञान की रोषनी दिखाने वाला भारत देश इस मामले में इतने गहरे अंधकार में कैसे डूबा हुआ है, इसकी सोच से ही घबराहट होने लगती है। हमारे देश में इस शिक्षा के अभाव में कई बेटियां चाहते हुए भी खुद अपना बचाव नहीं कर पाती। थोड़ी-सी सैक्स शिक्षा भी 11 से 18 साल तक के बच्चों के जीवन में कष्टों को खत्म करते हुए उजालों से भर सकती है। इससे पहले कि हमारे फूल जैसे कोमल किशोर राह भटक कर अंधेरी डगर पर चलने को मजबूर हो जाये, हमें खुशी-खुशी अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। स्कूल के अध्यापकों को भी यह बात माननी होगी कि विषय चाहे कोई भी हो, ज्ञान के माध्यम से दूसरों को खुशी देना ही सर्वोत्तम दान है।

मुस्कान के पिता की परेशानी उस समय और बढ़ गई जब शिक्षा विभाग वालों ने उनके इस लेख को जनहित में देश के अनेक नामी समाचार पत्रों की सुर्खियां बना डाला। मुस्कान जो आठवीं कक्षा में पढ़ती थी, उसकी कक्षा के छात्रों ने सैक्स से जुड़े उल्टे-सीधे सवाल पूछ कर उसका स्कूल आना और क्लास में बैठना दूभर कर दिया। हर छात्र एक ही बात कहता था कि किसी को सैक्स के बारे में कोई भी जानकारी लेनी हो तो वो मुस्कान के घर पहुंचे क्योंकि इसके पिता तो सैक्स गुरु है। धीरे-धीरे उसकी सहेलियां भी मुस्कान से कन्नी काटने लगी। सभी टीचर भी उसे इस तरह से देखने लगे जैसे इस बच्ची ने कोई बहुत बड़ा जुर्म कर दिया हो। इस तरह के माहौल और तानों को सारा दिन सुन-सुन कर मुस्कान इतनी दुःखी और असहाय हो गई कि उसने खुदकुशी करने का मन बना लिया।

जबकि इंसान को ऐसे हालात में घबराने की बजाए सदैव यही बात याद रखने की जरूरत होती है कि जब लोग नासमझी के कारण आपकी बात नहीं सुनते हैं उस समय परमात्मा आपका साथ देता है। ज्ञानी लोगों की बात का विश्वास करे तो यही समझ आता है कि दूसरों को उम्मीदों का रास्ता दिखाने वालों को सदा ही उम्मीदों भरा सवेरा मिलता है। जौली अंकल का मानना है हमारे देश में सदियों से ज्ञान का प्रकाश फैलाने वालों को शुरू में अनेकों विपत्तियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में सैक्स शिक्षा जैसा काम तो हर किसी को असंभव ही प्रतीत होगा। लेकिन अपने देश और मानव जगत की सबसे अमूल्य धरोहर लाखों बच्चियां के चेहरों पर यदि सदा हंसी, खुशी और मुस्कान देखनी है तो हम सभी को मिलकर इस नेक कार्य को शुरू करने में अब और अधिक देर नहीं करनी चाहिये। हम वही पाते हैं जैसा निभाते हैं, इसलिए व्यवहार अच्छा होना चाहिए।

ये कहानी ‘कहानियां जो राह दिखाएं’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं

Kahaniyan Jo Raah Dikhaye : (कहानियां जो राह दिखाएं)