jiddee raaja
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Hindi Story: दौलतराम अभी अपनी दुकान ठीकठाक कर ही रहे थे कि एक लड़का आकर उनसे बोला कि एक लीटर गुड़ दे दो। दौलतराम जी ने उससे कहा कि गुड़ लीटर में नहीं किलो में बिकता है। अब उस लड़के ने कहा-‘अच्छा तो फिर एक किलो गुड़ इस बोतल में डाल दो।’ दौलतराम जी को बड़ी हैरानगी हो रही थी कि आज सुबह-सुबह यह लड़का कहां से मेरा दिमाग खराब करने आ गया।

परंतु फिर भी उसे प्यार से समझाया कि गुड़ बोतल में नहीं थैले में दिया जाता है। इसी के साथ उन्होंने उस लड़के से कहा कि अब तुम दुकान पर बैठो, मैं ग्राहक बन कर तुमसे सामान लेने आता हूं। अगले ही पल दौलतराम जी उस लड़के से बोले कि एक किलो गुड़ दे दो। लड़का बोला कि बोतल लाये हो क्या? दौलतराम जी को समझ आ गया कि यह लड़का बहुत ही जिद्दी किस्म का है। इसे इतनी देर से समझा रहा हूं लेकिन यह न जाने किस मिट्टी से बना हुआ है कि अपनी जिद्द छोड़ने को तैयार ही नहीं। एक बार तो दौलतराम जी के मन में आया कि इसे धक्के देकर अपनी दुकान से निकाल दूं, लेकिन अगले ही पल उनके मन में विचार आया कि क्रोध करने का मतलब है कि दूसरों की गलतियों की सजा स्वयं को देना। इस विचार के मन में आते ही उन्होंने उस लड़के से कहा कि मैं तुम्हें एक जिद्दी राजा की कहानी सुनाता हूं। यह लड़का भी खुशी-खुशी कहानी सुनने के लिये बैठ गया।

दौलतराम जी ने कहा कि एक बार एक राजा था। वह बहुत पूजा-पाठ करता था। एक दिन भगवान उसकी तपस्या से खुश होकर उससे बोले कि राजन् तुम जो भी मांगना चाहो मांग सकते हो। हम तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करेंगे। इस राजा ने कहा कि फिर आप मुझे ऐसा वरदान दो कि मैं सदा के लिये अमर हो जाऊं, दुनिया की कोई भी ताकत मुझे कभी भी मार न सके। भगवान ने कहा कि यह काम तो बहुत मुश्किल है, लेकिन हम फिर भी अपना वादा पूरा करेंगे। इस वरदान को पाने के लिये तुम्हें एक शर्त पूरी करनी होगी।

आज सूर्य छिपने से पहले यदि तुम अपने राज्य की सीमा से बाहर निकल जाते हो तो तुम सदा-सदा के लिये अमर हो जाओगे, परंतु यदि तुम ऐसा नहीं कर पाये तो फिर मैं तुम्हें मौत के चंगुल से नहीं बचा पाऊंगा। यह वरदान पाते ही राजा ने अपने सबसे विश्वसनीय मंत्री को बुला कर सारा किस्सा सुनाया। उस मंत्री ने कहा कि हमारे महल में कई अच्छे घोड़े हैं, लेकिन सबसे अधिक भरोसे वाला आपका सफेद घोड़ा है। आप उस पर बैठ कर राज्य की सीमा आसानी से पार कर सकते हो। राजा ने मंत्री से कहा कि हमारे पास सबसे तेज दौड़ने वाला तो काला घोड़ा है फिर तुम मुझे सफेद घोड़े पर जाने के लिये क्यूं कह रहे हो? मंत्री ने अपनी राय देते हुए कहा कि काला घोड़ा थोड़ा पागल किस्म का है। उसके ऊपर हम अधिक भरोसा नहीं कर सकते।

राजा ने मंत्री को डांटने के साथ उसकी हिदायत को अनदेखा करते हुए काले घोड़े पर बैठ कर राज्य की सीमा से बाहर जाने का फैसला कर लिया। सारा दिन भागते-भागते घोड़ा और राजा दोनों ही बुरी तरह से थक गये थे। लेकिन सदा के लिये अमर होने की लालसा में राजा हर हालात में सूर्य के छिपने से पहले सीमा को पार करना चाहता था। इसी मंशा के चलते वो काले घोड़े को लगातार दौड़ाये जा रहा था। अभी घोड़ा राज्य की सीमा से कुछ दूरी पर ही था कि वो हताश होकर बुरी तरह से लड़खड़ा कर गिर पड़ा। राजा के लाख कोशिश करने पर भी घोड़ा दुबारा उठ नहीं पाया और उसने राज्य की सीमा के अंदर ही दम तोड़ दिया। कुछ ही देर में सूर्य देवता भी छिप गये और राजा की मौत हो गई। जब राजा देवलोक में पहुंचा तो उसने भगवान से खफ़ा होते हुए कहा कि आपने मुझ से धोखा किया है। यदि आप मेरे घोड़े को नहीं मारते तो मैं सदा के लिये अमर हो सकता था।

भगवान ने कहा कि तुम अपने मंत्री की बात हमेशा मानते थे, लेकिन इस बार उसकी बात मानने की बजाए तुम उसे उल्टा डांट कर अपनी जिद्द के चलते काले घोड़े पर निकल पड़े। तुम्हारे काले घोड़े का अंतिम समय और उसकी मौत की जगह उसके जन्म से ही निश्चित थी। यदि इस बार भी तुमने अपने मंत्री की बात ढंग से सुनी होती तो तुम सदा के लिये अमर हो सकते थे, क्योंकि तुम्हारे सफेद घोड़े की अभी बहुत उम्र बाकी है।

दुकान पर बैठे उस लड़के ने कहा कि आप मुझे यह कहानी क्यूं सुना रहे हो? दौलतराम जी ने उससे कहा कि तुम्हें यह कहानी इसलिये सुनाई है क्योंकि अभी तुम्हारे सामने सारा जीवन पड़ा है। तुम्हारी भी हर बात में जिद्द की आदत को देख कर मेरे मन में यह विचार आया कि तुम तो अभी कच्ची मिट्टी की तरह हो। जिस भी सांचे में ढाले जाओगे ढल जाओगे। एक बार पकने के बाद बर्तन टूट तो सकता है लेकिन उसे किसी दूसरे सांचे में ढाला नहीं जा सकता। लड़के को भी जब यह बात समझ आई तो उसने हाथ जोड़ कर कहा कि आप तो मेरे गुरु समान हो, आज से मैं वो ही सब कुछ करूंगा जो कुछ आप सिखाएंगे। दौलतराम जी ने कहा कि फिर आज से यह वादा करो कि कभी भी जिद्द और गुस्सा नहीं करोगे, क्योंकि जिद्द और गुस्से में क्रोधित व्यक्ति अपना मुंह तो खोल लेता है, परंतु उसकी आंखें बंद हो जाती हैं।

कोई भी व्यक्ति जिस तरह उबलते पानी में अपना प्रतिबिम्ब नहीं देख सकता, इसी तरह गुस्से में कभी भी कोई ज्ञान-ध्यान की बात को नहीं समझ पाता। इसलिये कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले हमें सदा उसका शांत मन से विश्लेषण कर लेना चाहिये। कई बार हमारे जीवन में ऐसे पल आते हैं जब किसी विषय या वस्तु पर हमारा नजरिया दूसरों से अलग होता है, मतभेद कभी भी किसी से भी हो सकते हैं, परंतु हमें सदा मतभेद का सम्मान करना चाहिये। बल्कि ऐसे में परेशान होने की बजाय हमें अपने विचार साहसपूर्ण तरीके से रखने चाहिये। एक नेक विचार किसी का भी जीवन बदल सकता है, बशर्ते कि उस पर पूरी तौर से अमल किया जाये। दौलतराम जी के विचारों पर गौर करने के बाद जौली अंकल अपनी हर जिद्द छोड़ने के साथ हर किसी से यही कहना चाहते हैं कि जिंदगी के वो पल मुश्किल नहीं होते जब दूसरे आपको नहीं समझ पाते, सबसे मुश्किल पल वह होते हैं जब आप अपनी जिद्द के चलते खुद को नहीं समझ पाते। कामयाबी का सफर कभी आसान नहीं होता।

ये कहानी ‘कहानियां जो राह दिखाएं’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं

Kahaniyan Jo Raah Dikhaye : (कहानियां जो राह दिखाएं)