satta ka hastaantaran
satta ka hastaantaran

Hindi Story: रसोईघर से उठती भिन्न भिन्न प्रकार की खुशबुएँ जब पूरे घर को सराबोर किये हुए थीं,तो भला वो
रामगोपाल जी को कैसे छोड़ देतीं।
उनका मन उन्हें खाने को मचलने लगा, वो तनिक रौब से अपनी पत्नी लक्ष्मी की ओर देखने लगे,उन्होंने उन्हें रुकने का इशारा कर दिया।
इस अवमानना पर उनका मन चोटिल नाग सा फुफकार उठा,
आदत के मुताबिक वो चेहरा आड़ा तिरछा बनाने लगे पर हाय हाय रे तकदीर,किसी ने उनसे कुछ पूछा ही नही।
जिस घर मे उनका स्वागत बरसों से इष्टदेव की तरह होता था ,आज उस घर ने अपना देवता ही बदल दिया है,और वो सब नवीन देवता के पुजारी बन गये थे।
वो ख़ुद पर तरस खाते हुए एक कोने में अपनी कुर्सी पर बेचैनी से ऐसे पहलू बदल रहे थे मानो उनकी राजगद्दी छिन चुकी हो।
कोई उनपर ध्यान नहीं दे रहा था दौडभागी में, उपेक्षा से वो यूँ महसूस कर रहे थे मानो वह कोई ऐसी मूर्ति हों जिसका बरसों विधिवत पूजन होने के बाद विसर्जन करने के लिये कोने में रख दिया है।
बार बार ये आवाज़ कानों में पड़ती कोई कमी न छूट जाये वो कोप से पत्नी से बोले…
कल के छोरे की आवभगत की ऐसी भगदड़ हो रही है मानो नये देवता के षोडशोपचार पूजन की तैयारी चल रही हो ….
तब तक शोर मचा जीजाजी आ गये….
लक्ष्मी ने उन्हें घूर कर देखा ,और घर के बाकी लोगों के साथ दरवाजे की ओर बढ़ गईं।
वो बेबसी से कोने में पड़ी छोटी मेज़ की तरफ देखने लगे जिसपर मिठाई ,नमकीन अनछुई पड़ी थी और चाय का खाली कप उन्हें मुँह चिढ़ा रहा था।
हुँह….नया नौ दिन पुराना सौ दिन कहकर उन्होंने अपने ससुराल के ही लिये नियुक्त कोट सूट की ओर नज़र डाली और सामने लगे दर्पण में अपना बेचैनी से टहलते हुए मूल्यांकन किया।
टाई,सोने की अंगूठियाँ,घड़ी सब अपने स्थान पर उन्हें सलामी दे रहे थे,ठसाठस भरा बटुआ किसी पेटू व्यक्ति की तरह और पकवान की प्रतीक्षा में था।
तबतक घरवालों की भीड़ नये दामाद अम्बर जी के स्वागत में बड़ी तत्परता से जुट गयी।दामादजी के पीछे उनका ड्राइवर उनके पालतू कुत्ते को गोद मे उठाये आ रहा था।
कुत्ते के लिये भी नया कटोरा और पैडिग्री हुँह हद है ,चोंचलेबाजी की रामगोपाल जी बड़बड़ाये।
उनकी सलहज और साले नये दामाद अम्बर के पैर छूने को ज्यों ही झुके…
अम्बर ने उन्हें हाथ बढ़ाकर रोक दिया और ख़ुद उनदोनों के चरण छूकर बोला,”कन्यादान के दाता आप मेरे मातापिता हैं,बेटे जैसा हूँ बल्कि बेटा ही हूँ कौन छूता है बेटे के पैर…
अम्बर की इस बात से लक्ष्मी के मन में कुछ दरक गया और रामगोपाल जी के दामाद के अहम में भी कुछ दरकने की आवाज़ आई…
सबके साथ हँसी मजाक की आवाजों से अकेले कोने में बैठे हुए उन्हें अपना इन्द्रासन डोलता नज़र आने लगा।उनके स्टारडम में एक नया सुपरस्टार जो सेंध लगाने को आ गया था।
अम्बर बड़ी सहजतापूर्वक सबसे बात कर रहा था,तबतक सबने मनुहार की नाश्ता करने के लिये।
रामगोपालजी को भी बुलाया गया,वो आनाकानी करने लगे,जब उन्हें नाश्ता भिजवाया गया तो उन्होंने अपने नखरों का किसी सधी हुई अप्सरा की तरह इस्तेमाल किया और मना कर दिया।
आज उन्हें अपना बीता समय चलचित्र सा याद आ गया जब उन्हें उनके घरवालों ने ससुराल में बढ़चढ़कर नखरे दिखाने की सीख दी थी।
पहली बार जाने पर जब उन्होंने जो अपना क्रोधी रुतबा क़ायम किया था उसमें बाल बराबर भी आँच न आने दी थी।
घरवाले उनके आगमन से काँपते और विदाई लेने पर ही राहत की साँस लेते।
आगमन के समय उनके कृपण हाथोँ और जुबाँ से कुछ मीठा न निकलता पर विदाई में कोई कमी रह जाती तो जतलाने में कमी न करते।
सब मेज़ पर पहुँच चुके थे तब तक किसी ने कहा अरे…फूफाजी को बुलाओ उन्होंने नाश्ता किया या नहीं…
लक्ष्मी के भतीजे ने हँसते हुए कहा,”फूफाजी इतने सरल नहीं है ,कोई कमी रह गयी तो छोड़ेंगे नहीं तुरन्त फूँ-फाँ में लग जायेंगे उनको एकांत ही भाता है।
आप सब शुरू कीजिये करीब पंद्रह मिनट बाद अब सब आधा नाश्ता खा चुके होंगे का अनुमान लगाकर रामगोपाल जी ने पत्नी से नाश्ते की मांग रख दी।
अम्बर की सास और लक्ष्मी की भाभी ने वहाँ कैसरोल लेकर रख दिये,और धीरे से कह दिया कि जीजाजी की आदत पता है सो पहले ही रख दिया था…
पति की हरकतों से अपमानित लक्ष्मी के चेहरे पर शर्म का रँग उतर आया….
उसने इस बार पति से हिम्मत करके कह दिया आपके समय पर आपका भी ख़ूब लाड़चाव हुआ है,पर अब नई पीढ़ी के लिये दामाद के सिंहासन को छोड़ो,अब आप फूफा ससुर भी हो….
क्योँ नहीं….रिटायरमेंट हुआ है मेरा दामाद के पद से और फूफा की पेंशन में कटी पिटी इज्जत पा रहा हूँ तुम्हारे घर से…रामगोपाल जी फुँफकार कर बोले….
नहीँ…थोड़ा सरल होकर देखिये ये कल का बच्चा कितना सहज़ है सबके साथ ,अब ये नेह कमा रहा हैं तो बदले में पायेगा ही न सम्मान…
मैं आपके रिश्तों में घुली कि नहीं और आप बर्फ़ पड़े दूध से मलाई की तरह अलगथलग हो…
इतना कहकर लक्ष्मी बिना उनके उत्तर का इंतजार किये सबके पास चली गयी।
रामगोपाल जी के रुतबे में भी अब भूतपूर्व दामाद तो लगा ही था क्योंकि अब सत्ता की कुर्सी पर अम्बर था।
उन्हें अकेलेपन और अपनी उपेक्षा से बेहतर लगा कि ठीक कह रही है लक्ष्मी ,इसबार कोई बुलायेगा तो नख़रे नहीं करूँगा।
अभी वो रूठने के भाव ,हमसे किसी ने कहा ही नहीं कि तैयारी में लगे ही थे कि अम्बर स्वयं आ गया और बोला
“फूफाजी !मुझसे नाराज़ हैं कोई गलती हुई क्या,मेरे साथ नहीं बैठेंगे तो मैं ख़ुद आपके पास आ गया,आपके साथ ही खाऊँगा”।
उनकी आँखों मे अपनी पीढ़ी और वर्तमान पीढ़ी की तुलना से झिझक भर गई…बोले नहीं बेटा मैं अपने समय भरपूर प्यार ले चुका अब तुम्हारी बारी है।
थोड़ी देर बाद मेज़ पर दो पीढ़ियों के दामादों का शानदार सँगम था,इसबार रामगोपालजी भी अम्बर के साथ अपने अनुभव बाँटकर ठहाके लगा रहे थे।
फूफाजी के हाथ से अम्बर को मिले शगुन पर घरवाले हैरान थे
सत्तारूढ़ दामाद ने नई पीढ़ी से प्यार सीख लिया था