लिफाफे का गुलाब-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Lifafe ka Gulaab

Hindi Love Story: “अरे भईया जल्दी करो , समय निकला जा रहा है , कुली – कुली , अरे देखकर चलो भईया ” , कहां जाना है ? शहर के बस स्टैंड पर इन आवाजों और इस शोर का आना आम बात थी। मगर आज इन आवाजों के बीच में एक प्यारी – सी आवाज़ आती है – ” भईया एक टिकट देना और यह सामान भी बस के ऊपर रखवा दीजिए “। यह आवाज किरण की थी जो कि अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपना व्यापार करने के लिए वापिस अपने शहर जा रही थी। तभी एक आवाज आती है – ” किरण जरा रुको ” यह आवाज राहुल की थी जो किरण को एक लिफाफा देने के लिए उसे आवाज देते हुए उसके पास पहुंचने की कोशिश करता है। मगर भीड़ अधिक होने के कारण वह किरण से नहीं मिल पाता और बस एक जोरदार धक्के के साथ चल पड़ती है और किरण के बैग से एक डायरी निकलकर नीचे जमीन पर गिर जाती है , राहुल डायरी को उठाकर बस को जाते हुए देखता रह जाता है। बस उसकी आंखों से गायब हो जाती है , वह डायरी में लिफाफा रखकर दोनों को अपने साथ लेकर वहां से चला जाता है।

दो वर्षों के बाद किरण वापिस उसी शहर में अपने व्यवसाय के लिए आती है उसे इस शहर में अपने व्यवसाय की शाखा खोलने के लिए कुछ रुपयों की जरूरत होती है इसलिए वह इस शहर की सबसे पुरानी और विश्वास पात्र बैंक में अपने व्यवसाय की शाखा इस शहर में खोलने के लिए लोन की अर्जी देने आती है। वह बैंक में मैनेजर के आने का इंतजार करती है , इंतजार करते हुए वह बैंक मैनेजर के कक्ष में चली जाती है और वहां रखी हुई कुर्सी पर बैठ जाती है। कुछ ही देर बाद राहुल बैंक में आ जाता है और अपने कक्ष में दाखिल होकर अपनी कुर्सी पर बैठ जाता है। किरण उसे नमस्ते करती है वह उसे बिना देखे नमस्ते कर देता है और पूछता है – ” जी बताएं क्या काम है ? मैं आपकी क्या सहायता कर सकता हूं ? किरण ज़वाब देती है – ” जी मुझे अपने व्यवसाय की शाखा इस शहर में खोलने के लिए बैंक से लोन चाहिए यह मेरे लोन के लिए कागज़ “। किरण लोन के काग़ज़ उसकी ओर रख देती है। राहुल कल आने के लिए कहता है , किरण कहती है – ” जी , ठीक है मैं कल आती हूं “। और वहां से चली जाती है।

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राहुल लोन के कागज देखने लग जाता है लोन आवेदक का नाम किरण , इस नाम को पढ़ते ही राहुल दो वर्ष पहले उस बस स्टैंड पर पहुंच जाता है , वह लोन आवेदक की तस्वीर देखता है और समझ जाता है, कि यह लोन आवेदक कोई और नहीं बल्कि उसका ” पहला प्यार ” उसकी किरण है। शाम होने पर वह बैंक से घर पर पहुंच जाता है। रात का भोजन करने के बाद राहुल अपने कमरे की बालकनी में चुपचाप अकेले बैठ जाता है और किरण की यादों में खो जाता है, उसके साथ में बैठकर किताबें पढ़ना , उसके साथ में बैठकर कॉफी पीना और उसकी एक छवि देखने के लिए उसका दिन भर इंतजार करना वह इन यादों में इतना खो गया था, कि सुबह का सूरज कब उसकेे कमरे में दाखिल हो चुका था, उसे स्वयं भी मालूम नहीं हो पाया था। राहुल को जब इसका एहसास हुआ तो उसने घड़ी की तरफ नजर उठाकर देखा घड़ी में सुबह के आठ बज रहे थे। राहुल तुरंत बैंक जाने की तैयारी में लग जाता है। राहुल आज बैंक जाने के रास्ते में अपनी संगीत की धुन में ही खोया हुआ था और आज उसकी बाईक की रफ्तार आम दिनों की तुलना में कुछ ज्यादा ही तेज थी। बैंक पहुंचकर वह बहुत खुश था क्योंकि आज उसका ” पहला प्यार ” उसकी दिल की धड़कनों में रहने वाली उसकी किरण को वह अपने दिल की बात कहने वाला था।

दोपहर हो चुकी थी मगर किरण की कोई खबर नहीं थी , उसने लोन के कागज में किरण का नंबर निकालकर उसे कॉल किया मगर लगातार घंटियों के जाने के बाद भी उसने कॉल नहीं उठाया था। राहुल को बेचैनी होने लगी थी , इसलिए वह वेरिफिकेशन का बहाना लेकर बैंक से किरण के लोन के कागज में बताए गए पते पर पहुंच जाता है , मगर वहां ताला लगा हुआ था आस – पास में पूछने पर पता चला कि किरण का एक्सीडेंट हो गया है , वह तुरंत अस्पताल पहुंच जाता है वहां पहुंचने पर डॉक्टर उसे बताते हैं कि उसे खून चढ़ाना होगा ब्लड ग्रुप किरण के परिवार के किसी सदस्य से मिल नहीं पाया है। डॉक्टर राहुल का ब्लड ग्रुप चैक करते हैं ब्लड ग्रुप मिल जाता है। किरण के होश में आने से पहले राहुल जा चुका था।

किरण के बिस्तर पर एक डायरी रखी हुई थी जिसमें राहुल का लिखा हुआ एक लिफाफा उन दोनों की तस्वीर के साथ गुलाब का एक फूल भी रखा हुआ था। वह समझ जाती है यह राहुल है। मन ही मन वह भी राहुल से प्यार करती है मगर कभी इज़हार करने की हिम्मत नहीं कर पाई थी। कुछ हफ्तों तक वह बिस्तर पर ही आराम करती है। राहुल हर दिन कोई बहाना लेकर उससे मिलने आ जाता किरण को भी यह पसंद आता है। किरण स्वस्थ होने पर बैंक पहुंच जाती है राहुल उसे स्वस्थ देखकर बहुत खुश होता है उसके लिए चाय मंगवा लेता है वह उससे लोन की कार्यवाही के बारे में बातें करने लगता है, बातों ही बातों में किरण उसे लिफाफा देते हुए कहती है यह आपके लिए है , राहुल लिफाफा खोलता है उसमें लिखा होता है ” लिफाफे का गुलाब ” और लिफाफे में दिल की धड़कनों को लिखने वाला दोनों ही बहुत प्यारे हैं मुझे दोनों से ही प्यार है। व्यवसाय लोन की किस्तों के साथ में होम लोन की किस्तों को भरने के लिए मैं तैयार हूं। तुम्हारा ” पहला प्यार ” तुम्हारी दिल की धड़कनों में रहने वाली तुम्हारी अपनी किरण।