‘‘मुझे हेमरॉइड्स की शिकायत है। सुना है कि गर्भावस्था में इनकी हालत और भी खराब हो जाती है। मैं बचाव के लिए क्या कर सकती हूं?”
तकरीबन 50 प्रतिशत महिलाएँ इस तकलीफ को झेलती हैं। जिस तरह टाँगों में वैरीकोज़ वेन्स होने का डर रहता है। उसी तरह (मलाशय) रैक्टम की वेंस पर भी असर पड़ता है। गर्भाशय का बढ़ता दबाव पेल्विक क्षेत्र में रक्त के प्रकार की अधिकता से मलाशय की नसें सूज जाती हैं व उनमें हल्की खुजली होने लगती है। कब्ज हो सकती है या फिर पाइल्स हो सकती है, इसे पाइल्स इसलिए कहते हैं क्योंकि नसें, अंगूरों के पाइल की तरह हो जाती हैं। सबसे पहले तो कब्ज से अपना बचाव करें‒कीगल व्यायाम करें, लंबे घंटों तक खड़े होने पर बैठे रहने का काम न करें। टॉयलेट जाना हो तो उसे न टालें। स्टेप स्टूल पर बैठने से शौच में आसानी हो जाएगी।
हैज़ल पैक या आईस पैक से थोड़ी राहत मिल सकती है। गुनगुने पानी का स्नान भी आराम देगा। यदि बैठने से दर्द हो तो नीचे तकिया लगाएँ। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से पूछें। दादी मां का नुस्खा न आजमाएँ। वे एक चमच्च मिनरल ऑयल लगाने को कहेंगी जिससे कई अनमोल पोषक तत्व पिछले दरवाजे से बाहर निकल जाएँगे। जब भी इनसे रक्तस्राव हो तो अपने डॉक्टर की राय लें वैसे हेमोरायड्स डिलीवरी के बाद ठीक हो जाते हैं, ये इतने खतरनाक नहीं होते। वैसे ये डिलीवरी के बाद भी हो सकते हैं।
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