Baby Care: एक मासूम-सी जान को अपनी कोख में रखना इतना आसान काम भी नहीं है। लेकिन उससे भी ज्यादा मुश्किल है एक छोटे से बच्चे को प्यार से दुलारकर और सावधानी के साथ एक बच्चे का पालन-पोषण। एक नई मां के लिए इन पांच प्रमुख बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, ताकि वो एक बेहतरीन परवरिश कर पाएं।
स्मृति नई-नई मां बनी है, उसकी बेटी दस दिन की है और वह रात-भर जागती रहती है। सुसु-पॉटी करने पर वह रोती है। ऐसे में स्मृति भी नहीं सो पाती है जिसकी वजह से उसका मूड कुछ अजीब रहता है। वह अपनी बेटी की देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ना नहीं चाहती है। उसे इस बात की भी चिंता सताती है कि कहीं वो कुछ गड़बड़ न कर दे। देखा जाए तो यह परेशानी सिर्फ स्मृति की नहीं है बल्कि हर नई-नवेली मां की है। अगर आप भी स्मृति की तरह नई नवेली मां हैं तो चिंता न करें बस इन पांच बातों का ध्यान रखें, इससे आपका मां बनने का यह अहसास बेहद सुखद होगा।
पिता भी करें बेबी सिटिंग

याद रखें कि बच्चा केवल आपका ही नहीं है, बल्कि आपके पति का भी है तो बच्चा पालने की जिम्मेदारी भी आप दोनों की है। ऐसे में बेबी सिटिंग की जिम्मेदारी पिता को भी दें। संयुक्त परिवार में तो बच्चे की देखभाल करना थोड़ा आसान होता है लेकिन अगर आप अपने पति के साथ अकेली रह रही हैं तो आपको अवश्यंभावी रूप से यह जिम्मेदारी साझा करनी होगी। जब पिता अपने बच्चे के साथ समय व्यतीत करेंगे तो उसके काम भी वह सहर्ष स्वीकार करेंगे। अपना दूध पिलाने के बाद उसे डकार दिलवाने की जिम्मेदारी आप पिता को दें। कई बार रात में बच्चा ऐसे ही जाग जाते हैं और उनका खेलने का मन करता है ऐसे में कभी आप जागें तो कभी पिता। इससे आपका काम भी हल्का होगा और पिता और बच्चे का भी बॉन्ड मजबूत होगा। बहुत बार देखने में आता है कि पिता कहते हैं हमें तो बच्चे को गोद में लेने से डर लगता है, हालांकि उनके प्यार में कोई कमी नहीं होती, यहां पर आप आगे आएं जिस तरह से आप सीख रही हैं उन्हें भी सिखाएं।
बच्चे को दूध कैसे पिलायें

जब शिशु छोटा होता है तो वो बार-बार दूध नहीं मांगता लेकिन आपको उसे हर दो घंटे के अंदर दूध देना होता है। अगर आप एक बच्चे की मां हैं तो स्तनपान कराना बहुत मुश्किल नहीं है क्योंकि अस्पताल में नॄसग स्टाफ और घर की बुजुर्ग महिलाएं भी आपको इस संदर्भ में मार्गदर्शन देती हैं। हां, जुड़वां बच्चों को स्तनपान करवाने में आपको सतर्क रहने की जरूरत है। बहुत बार माएं ऐसा करती हैं कि एक साइड एक बच्चे के लिए तय कर देती हैं और एक साइड एक बच्चे के लिए, ऐसा न करें। अगर आपको यह याद रखने में दिक्कत हो किस तरफ से कौन-से शिशु को स्तनपान कराया था तो 24 घंटे का एक चक्र ले लें। 24 घंटे बाद साइड बदल दें। आपके जुड़वां बच्चे हैं तो आप इस चीज से अवगत होंगी कि कोई एक बच्चा ज्यादा दूध पीता है तो कोई कम। दोनों अगर दोनों ही साइड का दूध पीएंगे तो स्तनों में दूध का प्रवाह बराबर रहेगा। बच्चे को अपने कोहनी के साथ सहारा देते हुए एक हाथ में लेकर दूसरे हाथ की अंगुलियों को कैंची बनाकर निपल को दोनों अंगुलियों के बीच में लेकर दूध पिलाएं। कभी भी थकान हो तो लेटकर दूध पिलाने की गलती न करें। लेटकर दूध पिलाने से आपके स्तन के दबाव से बच्चे की नाक दब सकती है। कई बार दूध कान में भी चला जाता है। बस इस बात का ध्यान रखें कि अपनी कमर को हमेशा दीवार का सहारा देकर बैठें। कोशिश करें कि बच्चे को स्तनपान ही कराएं क्योंकि फॉर्मूला मिल्क बनाने में लगता आसान है लेकिन होता नहीं है। उसकी सफाई-सुथराई भी किसी चुनौती से कम नहीं होती। अगर आपको कमरदर्द की परेशानी हो रही है तो बच्चों के लिए फीडिंग पिलो भी आते हैं, इससे आप खुद को आराम में महसूस करेंगी।
उसके सिर को सहलाएं

हर मां अपने बच्चे को दूध पिलाने के साथ उन्हें डकार दिलाना नहीं भूलती है लेकिन एक चीज और अहम है जब आप बच्चे को स्तनपान करा रही हों उस दौरान बच्चे की पेशानी को भी हल्के हाथों से दबाएं। छोटे से बच्चे होते हैं हमारे दूध पीने की वजह से उनकी पेशानी दुखती है। उन्हें रिलैक्स करें। स्तनपान करवाते समय आप खुश रहने की कोशिश करें। बच्चे को मुस्कुराकर देखें, बच्चा सिर्फ दूध नहीं पी रहा होता वो आपकी ऊर्जा को भी अपने अंदर ले रहा होता है। अपने बच्चे के साथ इस समय आप बात भी कर सकती हैं। आप उसकी नाजुक अंगुलियों से भी खेल सकती हैं। बच्चों को इस तरह का लाड़-प्यार बहुत अच्छा लगता है। अगर आपका बच्चा दूध पीने और सिर को सहलाने के बाद भी रो रहा है तो इस बात को जानने की कोशिश करें कि आखिर मामला क्या है। बच्चों को कई बार गैस की समस्या होने की वजह से रोते हैं। लेकिन आपके घरेलू नुस्खे करने के बाद भी बच्चों की बैचेनी में कोई फर्क नहीं पड़ रहा तो उन्हें डॉक्टर के पास ले जाएं। ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि बच्चा रोया और आप डॉक्टर के पास ले गए। आपको खुद समझदारी और धैर्य के साथ यह फैसला लें।
उसके नींद का समय

यह आपके हाथ में है कि आप अपने बच्चे का रुटीन कैसे सैट करेंगे। आदतें जब बहुत छोटी उम्र में पड़ती हैं तो वो पक्की होती हैं। आप चाहें तो नवजात बच्चे का एक रुटीन करवा सकती हैं। अगर आपको बच्चे का रात में एक फिक्स समय पर सुलाना है तो उस वक्त बच्चे के कपड़े चेंज करवाकर उसे रात के कपड़े पहनाएं। कमरे की रोशनी को कम कर दें। इस समय आप कोई रिलैक्सिंग साउंड भी ला सकती हैं। या फिर आप उसे लोरी गाकर सुला सकती हैं। लेकिन अपनी किसी भी कोशिश में आपको धैर्य रखना होगा। हो सकता है कि वो पहले दिन न सोए, लेकिन धीरे-धीरे वो इस रुटीन को समझकर उसे अपनाएगा। एक चीज को कभी न भूलें, जब भी आपका बच्चा सो रहा है आप भी इस मौके को हाथ से न जाने दें। बच्चे के साथ-साथ सोएंगी तो आपको भी आराम मिलेगा। उम्मीद है कि यह सभी बातें आपके काम की साबित होंगी। अपने मातृत्व का सुख भोगें। अपने बच्चे के साथ अपने बचपन को जीने के लिए तैयार हो जाएं। हां, बच्चे के लालन-पालन में आपको कोई भी दिक्कत हो तो अपनी मां या अपनी सास से सलाह लें। उनके पास अनुभव का एक खजाना है। इस समय उनसे बेहतर आपको कोई गाइड नहीं करेगा।
नहलाने में भी रखें ख्याल

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार बच्चे को जन्म के 24 घंटे के भीतर नहला देना चाहिए। हां, लेकिन जब आप शिशु को अस्पताल से घर पर लेकर आएं तो नियमित तौर से कुछ दिनों तक स्पंज बाथ करना ही बेहतर है। इसके अलावा अगर आप पानी से नहला रही हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि पानी बहुत गर्म न हो। ज्यादा तेज गर्म पानी से बच्चे की त्वचा जल जाती है। बच्चे नहाते वक्त पानी डालने से घबराने लगते हैं। ऐसे में पैरों से पानी डालना शुरू करें। एकदम से सिर पर पानी न डालें। नहाने से पहले हल्के हाथों से उसके शरीर की मालिश करें। कोशिश करें कि बच्चा धूप में ही मालिश करवाए। मालिश से उसके हाथ-पैर खुलेंगे। मौसम और उसके मिजाज को देखते हुए कपड़ों का चयन करें। अगर मौसम में कुछ खुन्की सी है तो भी नहाने के बाद कमरे में रूम हीटर चलाएं। बच्चे को तौलिए से अच्छे से पोंछें। इसके बाद ही कोई क्रीम पाउउर लगाएं। बच्चे को जब आप बनियान पहना रहे हों तो बार-बार उसकी जांच करते रहें। कई बार वो पहने हुए ही मुड़ जाते हैं और बच्चों को इससे बैचेनी होती है।
