आप जानते हैं तुलसीदास जी ने क्यों की थी कष्ट निवारक हनुमान बाहुक की रचना?: Hanuman Bahuk
Hanuman Bahuk

Hanuman Bahuk: जब मनुष्य जीवन में कभी हारा हुआ महसूस करता है तो उसे अपने आराध्य की ज़रूरत महसूस होती है। हर व्यक्ति ही जीवन में कभी न कभी दुःख या उदासी महसूस करता है ऐसे में उसे शान्ति चाहिए होती है और वो शान्ति पाने के लिए ईश्वर के सम्मुख बैठ जाता है। अपनी हर समस्या को अपने आराध्य के चरणों में छोड़कर अपने नए दिन की शुरुआत करता है। इसी तरह हर व्यक्ति की आस्था कहीं न कहीं जुड़ी होती है जैसे कोई आत्मध्यान करता है तो कोई अपने ईश्वर के सम्मुख बैठकर आरती या मंत्र उच्चारण करके अपने कष्टों का निवारण करता है। इसी तरह बजरंगबली के भक्तों की उनमें बेहद आस्था है। यूँ तो हनुमान हर दुःख का निवारण करते हैं लेकिन पौराणिक कथाओं के अनुसार अगर व्यक्ति किसी रोग से ग्रस्त है ऐसे में वो हनुमान जी को स्मरण करता है तो उसे निश्चित ही फल प्राप्त होता है। खुद तुलसीदास हनुमान चालीसा में इस बात को लिख चुके हैं। जी हैं हनुमान चालीसा की एक पंक्ति हैं जिसमें कहा गया है कि ‘नासे रोग हरे सब पीरा , जपत निरंतर हनुमत बीरा’। इसी तरह हनुमान बाहुक के लिए भी कहा जाता है कि इसका पाठ करने पर निश्चित ही रोग और कष्ट दूर होते हैं। तो जानिए क्या है हनुमान बाहुक और इसे किसने लिखा था।

क्या है हनुमान बाहुक और कैसे करें पाठ

हनुमान बाहुक एक ऐसा महामंत्र माना जाता है जिससे आपको मानसिक और शारीरिक तौर पर शान्ति और स्वस्थता प्राप्त होती है। कहा जाता है हनुमान बाहुक का पाठ मंगलवार को करने से निश्चित ही आपको आराम मिलता है। मान्यता अनुसार हनुमान बाहुक का पाठ करने से पहले बजरंग बलि के समक्ष एक लोटे में पानी भर कर रखें फिर उसमें तुलसी का पत्ता डाल दें और पाठ करने के बाद पानी को ग्रहण कर लें। ऐसा करने से आप पाएंगे कि आपमें नकारात्मकता ख़त्म होने लगेगी और किसी भी रोग का आधार नकारात्मकता होती है जब ये ख़त्म होगी और सकारात्मकता बढ़ेगी तो अपने आप शरीर में कुछ अच्छे बदलाव होंगे।

तुलसीदास जी ने क्यों की हनुमान बाहुक की रचना

गोस्वामी तुलसीदाल ने हनुमान बाहुक की रचना की है ये तो हम जानते ही हैं लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि आखिर इसकी रचना क्यों हुई है। गोस्वामी तुलसी दास ने हनुमान बाहुक की रचना उस समय में की थी जब वो स्वयं रोगों से पीड़ित थे। उनके शरीर में अकड़न होने लगी थी और वात रोग के कारण वो बहुत परेशान होने लगे थे। इसका निवारण करने के लिए उन्होंने हनुमान बाहुक की रचना की। हनुमान बाहुक में उन्होंने अपनी पीड़ा को बताया है। हनुमान जी की शक्ति के आगे उनकी पीड़ा कुछ नहीं है ऐसा वर्णन केवल तुलसी दास ही कर सकते हैं। जब उन्होंने हनुमान बाहुक की रचना पूरी की तो वाक़ई उनकी पीड़ा ख़त्म हो गयी।

सृष्टि मिश्रा, फीचर राइटर हैं , यूं तो लगभग हर विषय पर लिखती हैं लेकिन बॉलीवुड फीचर लेखन उनका प्रिय विषय है। सृष्टि का जन्म उनके ननिहाल फैज़ाबाद में हुआ, पढ़ाई लिखाई दिल्ली में हुई। हिंदी और बांग्ला कहानी और उपन्यास में ख़ास रुचि रखती...